रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने सोमवार को वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। उन्होंने रेल परियोजनाओं से छत्तीसगढ़ के विकास की जानकारी दी। इस दौरान बिलासपुर जोनल मुख्यालय में मौजूद रेलवे के PCCM (प्रधान मुख्य वाणिज्य प्रबंधक) और चीफ इंजीनियर नींद में झपकी लेते नजर आए। दैनिक भास्कर ने प्रेस कांफ्रेस के दौरान झपकी ले रहे अफसरों का वीडियो भी बनाया है। बता दें कि इस बार बजट में छत्तीसगढ़ राज्य को रेलवे के लिए 7470 करोड़ रुपए दिया गया है। दावा है कि यह कांग्रेस शासन काल के बजट से 24 गुना अधिक है। बिलासपुर जोन को पिछले बजट से 545 करोड़ रुपए ज्यादा मिले है। हालांकि, कोई भी नया प्रोजेक्ट नहीं मिला है। दरअसल, इस वर्चुअल प्रेस कांफ्रेस में बिलासपुर जोनल मुख्यालय के जीएम तरुण प्रकाश, डीआरएम राकेश रंजन सहित जोन के एक दर्जन वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। रेल मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में चारों ओर रेल विकास के कार्य तेजी से चल रहे हैं। परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद बस्तर सहित दूरस्थ अंचलों की जनता को इसका सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने रावघाट परियोजना, परमालकसा–खरसिया कॉरिडोर समेत कई महत्वपूर्ण रेल लाइनों का उल्लेख किया। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद ट्रेनों की संख्या वर्तमान की तुलना में लगभग दोगुनी हो जाएगी। इससे ओडिशा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों को भी लाभ मिलेगा। छत्तीसगढ़ में 51 हजार 80 करोड़ रुपए के विकास के काम छत्तीसगढ़ में रेल विकास के काम को गति देने के लिए 2026–27 के बजट में 7470 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। जो पिछले बजट से 545 करोड़ रुपए अधिक है। इससे पहले बजट में बिलासपुर जोन को 6925 करोड़ रुपए दिए थे। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में 51 हजार 80 करोड़ रुपए के विकास के काम चल रहे हैं। काम पूरा होने के बाद छत्तीसगढ़ में मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की संख्या भी दोगुनी हो जाएगी। हालांकि, इस बजट कोई भी नई परियोजना मंजूर नहीं की गई है। 11 साल में 311 से 7470 पहुंचा बजट छत्तीसगढ़ में रेल विकास के 51,080 करोड़ के काम चल रहे हैं। 32 अमृत स्टेशनों का पुनर्विकास, 100 फीसदी विद्युतीकरण और नई प्रीमियम सेवाओं से कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा। छत्तीसगढ़ के लिए रेल बजटीय आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 2009-14 में राज्य के लिए रेल बजट का वार्षिक औसत आवंटन 311 करोड़ रुपए था। वहीं, 2026-27 में यह बढ़कर 7 हजार 470 करोड़ रुपए हो गया है। इस वृद्धि से रेल नेटवर्क को मजबूत करने, स्टेशनों के पुनर्विकास, नई लाइन, डबलिंग, ट्रिपलिंग कार्यों और संरक्षा के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध होंगे। वर्तमान में ट्रैक निर्माण-विस्तार, स्टेशन पुनर्विकास और यात्री सुविधा उन्नयन, रेल संरक्षा, अंडरपास, फ्लाईओवर जैसे ग्रेड-सेपरेशन के काम शामिल हैं। 32 स्टेशनों पर 1674 करोड़ खर्च होंगे राज्य में कुल 32 स्टेशनों को पूरी तरह पुनर्विकास के लिए चिन्हित किया गया है। जिन पर 1674 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इनमें से पांच स्टेशन डोंगरगढ़ प्रथम चरण, अंबिकापुर, भानुप्रतापपुर, भिलाई और उरकुरा में काम पूरा हो चुका है। अमृत स्टेशन योजना के तहत जिन स्टेशनों में काम चल रहा है, उसमें स्टेशन परिसरों में सुगम यात्री सुविधाएं, साफ-सफाई, बेहतर प्रवेश, निकास, आधुनिक प्रतीक्षालय, यात्री सूचना प्रणाली, पार्किंग प्रबंधन और दिव्यांग जन सुविधाओं को विशेष महत्व दिया जा रहा है। प्रीमियम सेवा का भी विस्तार प्रीमियम ट्रेनों के विस्तार से छत्तीसगढ़ को नई गति मिलने लगी है। राज्य में रेल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने उच्च गुणवत्ता वाली प्रीमियम सेवाओं का भी विस्तार किया गया है। वर्तमान में 2 जोड़ वंदे भारत एक्सप्रेस और एक जोड़ी अमृत भारत एक्सप्रेस संचालित है। इन सेवाओं से यात्रियों को तेज, आरामदायक और आधुनिक यात्रा अनुभव मिल रहा है। राज्य के प्रमुख शहरों की देश के अन्य भागों से कनेक्टिविटी मजबूत हुई है।


