जिला मुख्यालय से 90 किमी दूर जिले की सबसे बड़ी सेंचुरी फुलवारी की नाल में जंगल की सुरक्षा करने वाले कई वनकर्मियों की पोस्ट खाली है। 511 वर्ग किमी एरिया में फैली इस सेंचुरी को तीन रेंजों में बांट रखा है। इसमें पानरवा, कोटड़ा और मामेर रेंज है। एक रेंज में गश्त के लिए रोजाना 50 से 100 किमी दूर तक जाना पड़ता है। यहां तीनों रेंज में पुराने वाहन का उपयोग किया जा रहा है। सेंचुरी के 9 नाकों पर 9 फॉरेस्टर की पोस्ट है। इसमें सिर्फ एक फॉरेस्टर तैनात है। एक ट्रेनिंग पर गया हुआ है, बाकी 7 पद खाली हैं। इसी तरह 9 वनरक्षक और 10 कैटल गार्ड की पोस्ट भी खाली हैं। अगर इन पदों पर कर्मचारियों को लगाया जाए तो मॉनिटरिंग पुख्ता होगी, जिससे वन में कटान के मामलों को रोका जा सकेगा। अभी पद खाली होने से निगरानी तंत्र कमजोर हो रखा है। हालांकि अभी 40 कर्मचारी जरूर इस सेंचुरी में तैनात हैं। भास्कर एक्सपर्ट – राहुल भटनागर, सेवानिवृत्त सीसीएफ
हर रेंज में उपलब्ध होने चाहिए वाहन फुलवारी की नाल सेंचुरी में भी जितने भी पद खाली हैं, उन पर कर्मचारियों को तैनात करना चाहिए। इसके साथ ही हर रेंज में वाहन देने चाहिए। इसके एसीएफ का वाहन अलग होना चाहिए। यह सेंसिटिव एरिया है। यहां निगरानी पर विशेष फोकस करने की जरूरत है। इसके लिए हर रेंज में वाहन उपलब्ध होने चाहिए। जबकि वन मंडल की हर रेंज में गाड़ियां दे रखी हैं।


