मंत्री की मीटिंग में अफसर मैडम का रील प्रेम:बिना माइक भजन संध्या; राजाराम ने हनुमान समर्थकों को किया ‘माफ’

मंत्री की मीटिंग में अफसर मैडम का रील प्रेम:बिना माइक भजन संध्या; राजाराम ने हनुमान समर्थकों को किया ‘माफ’

नमस्कार, अलवर में साउंड वाले से बहस के बाद भजन गायक ने बिना माइक प्रस्तुति दे दी। टोंक में ऊर्जा मंत्री की मीटिंग में अधिकारी मैडम रील देखती रहीं। जयपुर में राजाराम मील ने समाज के युवाओं को मैसेज दिया और जयपुर में बुजुर्ग साइकिल सवार ने सिखाई जिंदादिली। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. साउंड वाले से भजन गायक की ‘कहासुनी’ बिजनेस मैनेजमेंट की क्लास चल रही थी। मास्टरजी टीम कोऑर्डिनेशन का चैप्टर समझा रहे थे। मास्टरजी बोले- किसी भी बिजनेस की सफलता के लिए टीम के बीच समन्वय होना जरूरी है। एक छात्र ने खड़े होकर कहा- सरजी, यही बात उदाहरण देकर समझाओ। अभी तो बात सिर के ऊपर से जा रही है। मास्टरजी को ताजा वाकया याद था। वे बोले- देखो, अलवर में भजन कार्यक्रम का बड़ा आयोजन किया गया था। हर स्तर पर खूब प्रचार-प्रसार किया गया। विख्यात भजन गायक कन्हैया मित्तल को बुलाया गया। शानदार टेन्ट लगाया गया। डेकोरेशन किया गया। लाइट और बैठने की अच्छी व्यवस्था की गई। भजन गायक के लिए रैंप बनाया गया। लोगों की भीड़ भी अच्छी खासी जुटाई गई लेकिन… छात्र एक स्वर में बोले- लेकिन क्या मास्टरजी। मास्टर साहब बोले- लेकिन साउंड वाला भजन गायक से कोऑर्डिनेशन करने को तैयार नहीं। भजन गायक ने कई बार कहा कि आवाज बढ़ाओ। वह बहस करने लगे। दोनों तरफ से खरी-खरी सुनाई गई। भजन से पहले ही माथा खराब हो गया। गायक नीचे स्वर में गाने को तैयार नहीं और साउंड वाला आवाज बढ़ाने को तैयार नहीं। तो क्या हुआ? हुया ये कि गायक ने माइक को फेंक दिया। रैंप पर जाकर बिना माइक ही प्रोग्राम कर डाला। सारी चीजें व्यवस्थित थीं। लेकिन टीम कॉर्डिनेशन नहीं होने के कारण मजा किरकिरा हो गया और आयोजकों की किरकिरी भी हुई। बच्चे बोले- समझ गए मास्टर साहब। 2. मीटिंग में रील देख रही थीं मैडम शिकारी कभी-कभी खुद शिकार हो जाता है। हालांकि यह जंगल का नियम है। लेकिन ऊर्जा मंत्रीजी की मीटिंग में लागू हो गया। बात टोंक की है। ऊर्जा मंत्रीजी मीटिंग लेकर समीक्षा कर रहे थे। मीटिंग में महिला अधिकारिता विभाग की असिस्टेंट डायरेक्टर भी मौजूद थीं। मंत्रीजी बातें रख रहे थे, बातें सुन रहे थे और मैडम रील देखने में व्यस्त थीं। हो सकता है कि महिलाओं के मुद्दे रील में खोज रही हों। मैडमजी को पता ही नहीं चला कि उनके रील देखने की भी रील बन रही है। पीछे खड़े पत्रकार ने कैमरा जूम किया और वीडियो बना लिया। फिर मंत्रीजी तक बात पहुंचाकर रही-सही कसर पूरी कर दी। मंत्रीजी बोले- अच्छा ? ऐसी बात है? ऐसा है तो थमा देंगे चार्जशीट। 3. राजाराम मील वर्सेज हनुमान बेनीवाल एक भजन बहुत फेमस है। रामनवमी और हनुमान जयंती के अलावा भी कई धार्मिक अवसरों पर चलता है। भजन है- दुनिया चले ना श्रीराम के बिना…रामजी चलें ना हनुमान के बिना… राम और हनुमान में प्रेम है। मैत्री है। परस्पर आस्था है। श्रद्धा है। एक-दूसरे पर पक्का विश्वास है। लेकिन राजनीति के राजाराम और हनुमान के बीच जुबानी जंग चल रही है। राजाराम हैं जाट समाज के अध्यक्ष राजाराम मील। हनुमान हैं जाट समाज के बड़े नेता नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल। समाज के एक कार्यक्रम में हनुमान बेनीवाल ने राजाराम मील का नाम लेकर परिवार पर पर्सनल टिप्पणी कर दी थी। राजाराम ने व्यक्तिगत शौक को लेकर सही-गलत टिप्पणी कर दी। इसके बाद हनुमान सेना का पारा हाई हो गया। समर्थक मील के घर के बाहर पहुंच गए। पुतला फूंक दिया। दीवार पर लिख दिया हनुमान बेनीवाल। जिंदाबाद के नारे लगा दिए। इसके बाद मील साहब को अफसोस हुआ। बोले- समाज के बच्चे पढ़े-लिखें, नाम-नौकरी कमाएं। गलत कामों में फंस गए। थाने जाकर मैंने हंगामा करने वाले बच्चों को छुड़ाया। 4. चलते-चलते.. कार और बाइक वाले नजरें गड़ाकर पेट्रोल की कीमतों का समाचार पढ़ रहे हैं। युद्ध की बात कर रहे हैं। महंगाई पर बहस चल रही है। कोई कहता है कि तेल महंगाई का रिकॉर्ड तोड़ देगा। कोई कहता है कि गैस पर भी गाड़ी नहीं चलेगी। गाड़ी चलती है तो जाम में फंस जाती है। पार्किंग को लेकर पड़ोसियों में मारपीट और दुश्मनी का माहौल है। एक धड़ा पर्यावरण प्रदूषण की बात करता है। ओजोन परत फटकर आटा छानने की चलनी हो गई है। तमाम सवालों-चिंताओं और बहसों के इतर जयपुर की सड़कों पर एक बुजुर्ग साइकिल पर चांदपोल से त्रिपोलिया बाजार की तरफ जाते नजर आते हैं। साइकिल लहराकर चलती है। मुंह से सीटी बजाते चलते हैं। चलते चलते हैंडल छोड़कर हाथों को पंछी के पंखों की तरह लहराते हैं। उनके वाहन में न पेट्रोल-डीजल डलाने की जरूरत, न चार्जिंग पॉइंट में लगाने का झंझट। न पार्किंग की समस्या। जाम लगा तो बरामदे से निकल जाते हैं। कभी-कभी लगता है कि दुपहिया-चौपहिया वालों को चिढ़ाते हुए जा रहे हैं। उनकी जिंदादिली की दाद देनी चाहिए। सबसे बड़ी बात यह कि जो है, जितना है उसमें खुश हैं। स्टेटस की चिंता नहीं है। रील भी लोग ही बनाकर शेयर कर देते हैं। हमारा तो एक ही सुझाव है- काका, हैंडल छोड़ने वाले करतब के अलावा सब ठीक है। इनपुट सहयोग- धर्मेंद्र यादव (अलवर), महावीर बैरवा (टोंक)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार सुबह मुलाकात होगी..

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