भागीरथपुरा त्रासदी के लिए अफसर 200% जिम्मेदार:कैलाश विजयवर्गीय बोले- ये सिस्टम की नाकामी, इसलिए जवाबदेह भी सरकार; मुआवजा राशि 4 लाख करने की तैयारी

भागीरथपुरा त्रासदी के लिए अफसर 200% जिम्मेदार:कैलाश विजयवर्गीय बोले- ये सिस्टम की नाकामी, इसलिए जवाबदेह भी सरकार; मुआवजा राशि 4 लाख करने की तैयारी

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 16 मौतों ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं। अभी भी कई लोगों का इलाज चल रहा है। सरकार जागी मगर बहुत देर से। भास्कर ने जब इस इलाके के विधायक और प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से पूछा कि आखिर चूक कहां हुई? तो उन्होंने कहा इस त्रासदी के लिए 200 फीसदी अधिकारी ही जिम्मेदार है। मुख्यमंत्री ने दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की है। उन्होंने माना कि ये सिस्टम की नाकामी है, जिसकी जवाबदेही सरकार की है। साथ ही कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा राशि 4 लाख रुपए की जाएगी। भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो इसके लिए विशेष सिस्टम बनाने के निर्देश दिए है। और क्या कहा कैलाश विजयवर्गीय ने पढ़िए पूरी बातचीत…. सवाल: सरकार मौत के आंकड़े कन्फर्म क्यों नहीं कर रही?
जवाब: जो लोग डिस्पेंसरी के जरिए हॉस्पिटल में गए हैं, उनके आंकड़े हैं, पर कुछ लोग डायरेक्ट चले गए थे। हम उन्हें कन्फर्म कर रहे हैं। इस त्रासदी की वजह से यदि कोई भी व्यक्ति मृत हुआ है, तो उसे वो ही सुविधा मिलेगी जो सबको मिल रही है। मौत में फर्क नहीं है, लेकिन उसे कन्फर्म करना बहुत जरूरी है। सवाल: यह आंकड़े कब तक कन्फर्म हो जाएंगे?
जवाब: अधिकारियों को हमने निर्देश दिए हैं। पार्षद ने मुझे बताया है कि 14-15 मौत हुई है। हमने कलेक्टर को भी कहा है, सीएमएचओ को भी कहा है कि जरा देखिए, कन्फर्म करिए। इसमें एक प्रॉब्लम यह आ रही है कि कुछ लोगों के पोस्टमॉर्टम नहीं हुए हैं। इस पर मैंने कहा है कि उन लोगों का मेडिकल रिकॉर्ड देख लीजिए कि उनका इलाज किस बात का हुआ है। सवाल: इस पूरे कांड में सबसे बड़ी नाकामी क्या रही है?
जवाब: देखिए, यह सिस्टम की नाकामी है। मैं तो पहले दिन से कह रहा हूं कि चूंकि हम सरकार में हैं तो जवाबदेही हमारी है। सीएम ने एक कमेटी भी बनाई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट सीएम को दे दी होगी, शायद इसीलिए ही अधिकारियों पर कार्रवाई भी हुई है। और नए अधिकारी आए हैं। सिस्टम की नाकामी तो है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। सवाल: इसमें पार्षद भी शामिल थे, वह काम शुरू नहीं करवा पाए?
जवाब: देखिए, पार्षद बहुत छोटा जनप्रतिनिधि होता है। उसने लिखकर दे दिया कमिश्नर को, मेयर को और उन्होंने टेंडर बुलवा लिए। अब टेंडर कहीं पर रुक गया, तो यह नाकामी तो उस अधिकारी की है जिसके पास फाइल रुकी है। उसे पनीशमेंट मिलना चाहिए और उसे ये दिया भी गया है। सवाल: आगे ऐसा न हो, इसकी क्या तैयारी है?
जवाब: मैंने आज ही हमारे एसीएस (अपर मुख्य सचिव) को निर्देश दिए हैं कि हमें मध्य प्रदेश में सबसे प्राथमिकता से गंदे पानी की शिकायत को लेना चाहिए। हमें भोपाल में एक नम्बर देना चाहिए जो सिर्फ गंदे पानी की शिकायत और समाधान के लिए हो। साथ ही यह भी कहा है कि जिस भी नगर पालिका और निगम के पास गंदे पानी की शिकायत आए, उसकी जानकारी हमको भी दें। इसके लिए हम एक अधिकारी की नियुक्ति करेंगे कि वह यह देखे और समय पर निराकरण करवाए। क्योंकि कोई भी दुर्घटना बहुत बड़ी होती है और उससे सबक लेना बहुत जरूरी है। सवाल: मुआवजा राशि को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है?

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *