ओडेला खनन हादसा; बक्सर का ऑपरेटर छठे दिन भी लापता:पानी में मिला जूता;परिजनों में मातम, 50 हजार टन पत्थर-चट्टानों के ढहने का अनुमान

ओडेला खनन हादसा; बक्सर का ऑपरेटर छठे दिन भी लापता:पानी में मिला जूता;परिजनों में मातम, 50 हजार टन पत्थर-चट्टानों के ढहने का अनुमान

राजस्थान के अलवर जिले में स्थित ओडेला खनन क्षेत्र में हुए हादसे में बक्सर निवासी पोकलेन ऑपरेटर रामानंद तिवारी का छठे दिन भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। बचाव दल को पानी से भरी गहरी खाई में उनका एक जूता तैरता हुआ मिला, जिसकी पहचान परिजनों ने की है। इस घटना के बाद परिवार की चिंता और बढ़ गई है। रामानंद तिवारी पिछले तीन माह से लीज संख्या 414-415 पर पोकलेन मशीन चला रहे थे। उनके भाई सदानंद तिवारी ने लीज मालिक और खनिज विभाग के अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मजदूरों को मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाता था, केवल भोजन दिया जाता था और डरा-धमकाकर जबरन काम कराया जाता था। 5 फरवरी को दिनभर हुई थी ब्लास्टिंग परिजनों के मुताबिक, 5 फरवरी को दिनभर भारी ब्लास्टिंग हुई थी। रामानंद ने पहाड़ खिसकने के खतरे की आशंका जताते हुए मशीन चलाने से मना किया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें काम करने के लिए मजबूर किया गया। आरोप है कि अवैध खनन के कारण खदान में 100 से 150 फीट गहरा गड्ढा बन गया था और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। घटना के चार दिन बाद पोकलेन मशीन को पानी से बाहर निकाल लिया गया, लेकिन ऑपरेटर का अब तक पता नहीं चल पाया है। खदान की गहराई लगभग 300 फीट बताई जा रही है, जिसमें 100 से 125 फीट तक पानी भरा है। पानी निकालने के लिए लगाए गए पंप पानी निकालने के लिए 75 एचपी के दो, तथा 60, 50 और 25 एचपी के एक-एक पंप लगाए गए हैं। 20 घंटे की मशक्कत के बाद जलस्तर करीब डेढ़ फीट कम हुआ है। अब 250 एचपी का बड़ा मोटर पंप लगाने की तैयारी है, ताकि तेजी से पानी निकालकर सर्च ऑपरेशन फिर से शुरू किया जा सके। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबा हटाना है। हादसे में लगभग 50 हजार टन पत्थर और चट्टानों के ढहने का अनुमान है। पानी निकलने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इस दौरान पहाड़ से उड़कर आई मक्खियों के हमले में नायब तहसीलदार भगवान मीना समेत दो जवानों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इधर बक्सर स्थित पैतृक घर में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पांच दिनों से घर में चूल्हा नहीं जला है। बहन सिंपल कुमारी ने जिलाधिकारी से फोन पर गुहार लगाते हुए भाई का अंतिम दर्शन कराने की अपील की है। प्रशासन की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया है। फिलहाल पूरे परिवार और जिलेवासियों की निगाहें बचाव अभियान पर टिकी हैं। राजस्थान के अलवर जिले में स्थित ओडेला खनन क्षेत्र में हुए हादसे में बक्सर निवासी पोकलेन ऑपरेटर रामानंद तिवारी का छठे दिन भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। बचाव दल को पानी से भरी गहरी खाई में उनका एक जूता तैरता हुआ मिला, जिसकी पहचान परिजनों ने की है। इस घटना के बाद परिवार की चिंता और बढ़ गई है। रामानंद तिवारी पिछले तीन माह से लीज संख्या 414-415 पर पोकलेन मशीन चला रहे थे। उनके भाई सदानंद तिवारी ने लीज मालिक और खनिज विभाग के अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मजदूरों को मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाता था, केवल भोजन दिया जाता था और डरा-धमकाकर जबरन काम कराया जाता था। 5 फरवरी को दिनभर हुई थी ब्लास्टिंग परिजनों के मुताबिक, 5 फरवरी को दिनभर भारी ब्लास्टिंग हुई थी। रामानंद ने पहाड़ खिसकने के खतरे की आशंका जताते हुए मशीन चलाने से मना किया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें काम करने के लिए मजबूर किया गया। आरोप है कि अवैध खनन के कारण खदान में 100 से 150 फीट गहरा गड्ढा बन गया था और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। घटना के चार दिन बाद पोकलेन मशीन को पानी से बाहर निकाल लिया गया, लेकिन ऑपरेटर का अब तक पता नहीं चल पाया है। खदान की गहराई लगभग 300 फीट बताई जा रही है, जिसमें 100 से 125 फीट तक पानी भरा है। पानी निकालने के लिए लगाए गए पंप पानी निकालने के लिए 75 एचपी के दो, तथा 60, 50 और 25 एचपी के एक-एक पंप लगाए गए हैं। 20 घंटे की मशक्कत के बाद जलस्तर करीब डेढ़ फीट कम हुआ है। अब 250 एचपी का बड़ा मोटर पंप लगाने की तैयारी है, ताकि तेजी से पानी निकालकर सर्च ऑपरेशन फिर से शुरू किया जा सके। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबा हटाना है। हादसे में लगभग 50 हजार टन पत्थर और चट्टानों के ढहने का अनुमान है। पानी निकलने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इस दौरान पहाड़ से उड़कर आई मक्खियों के हमले में नायब तहसीलदार भगवान मीना समेत दो जवानों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इधर बक्सर स्थित पैतृक घर में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पांच दिनों से घर में चूल्हा नहीं जला है। बहन सिंपल कुमारी ने जिलाधिकारी से फोन पर गुहार लगाते हुए भाई का अंतिम दर्शन कराने की अपील की है। प्रशासन की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया है। फिलहाल पूरे परिवार और जिलेवासियों की निगाहें बचाव अभियान पर टिकी हैं।  

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