प्रखंड अंतर्गत माधोपुर दोस्तीया गांव के समीप 13 करोड़ की लागत से बागमती बांध का निर्माण जारी है। निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों ने अनियमितता का आरोप लगाया है। लोगों ने बताया है कि बांध का निर्माण मिट्टी के स्थान पर बालू से किया जा रहा है। बांध की मजबूती के नाम पर निर्धारित मानकों को ताक पर रखकर मिट्टी की जगह बालू डालकर केवल खानापूर्ति की जा रही है, जिससे स्वाभिक रूप से बांध कमजोर होगी तथा भविष्य में बाढ़ के समय बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता है। बताया कि बागमती बांध चैन संख्या 22 एवं 23 के आसपास मानक के अनुरूप मिट्टी भराई न कर बालू डाल दिया जा रहा है, जो पानी के दबाव में टिकाऊ नहीं होगा। जो खतरनाक होगा। इस मामले को लेकर माधोपुर दोस्तीया ग्रामवासियों ने बागमती कार्यपालक अभियंता से मिलकर जांच की मांग की है। बताया है कि बांध निर्माण में मानक के अनुसार गुणवत्तापूर्ण मिट्टी भराई नहीं हो रही है। इसमें न तो उचित लेयरिंग की जा रही है और न ही रोलर से दबाव (कंपैक्शन) दिया जा रहा है। इससे बांध की ऊंचाई और मजबूती केवल कागजों में दिखाई जा रही है, जबकि जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। बताया कि मिट्टी भराई कार्य स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले मानसून में बांध को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है, जिसका सीधा असर गांव की आबादी और खेती पर पड़ेगा। इसे लेकर ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र जांच कर कार्य में सुधार नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीण संजय कुमार सिंह, चंदन सिंह, मनोज कुमार, अच्छे लाल साह, अरुण कुमार, ओम प्रकाश, सुबोध सिंह, बृजेश कुमार, सतीश कुमार सिंह आदि ने बताया कि फिलहाल इस मामले में विभागीय स्तर पर जांच का इंतजार है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कदम उठाता है और क्या बांध की सुरक्षा को लेकर ठोस कार्रवाई होती है या नहीं। ट्रैक्टर से बांध पर बालू मिट्टी गिराया जा रहा है, जो स्टीमेट के विपरित है। हम लोग के द्वारा मिट्टी डालने और मजबूत काम करने का आग्रह किया गया, लेकिन काम करवाने वाले व्यक्ति ने इसे सिरे से इनकार कर दिया है। बताया कि अगर बालू से बाध भरा जाएगा तो बाढ़ के समय बांध टूटने एवं बांध के मजबूती पर भी सवाल उठता है। खतरा हमें झेलना है, ठेकेदार व अधिकारी तो चैन से ही सोये रहेंगे। मामला संज्ञान में आया है। शीघ्र ही जांच कर सुधार की जाएगी। ऐसा नहीं होने पर कार्रवाई होगी। बांध निर्माण नियमानुसार मिट्टी से होना है, अगर बालू से हो रहा है तो यह गलत है। – शाहिद कमाल, कार्यपालक अभियंता, बागमती, शिवहर प्रखंड अंतर्गत माधोपुर दोस्तीया गांव के समीप 13 करोड़ की लागत से बागमती बांध का निर्माण जारी है। निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों ने अनियमितता का आरोप लगाया है। लोगों ने बताया है कि बांध का निर्माण मिट्टी के स्थान पर बालू से किया जा रहा है। बांध की मजबूती के नाम पर निर्धारित मानकों को ताक पर रखकर मिट्टी की जगह बालू डालकर केवल खानापूर्ति की जा रही है, जिससे स्वाभिक रूप से बांध कमजोर होगी तथा भविष्य में बाढ़ के समय बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता है। बताया कि बागमती बांध चैन संख्या 22 एवं 23 के आसपास मानक के अनुरूप मिट्टी भराई न कर बालू डाल दिया जा रहा है, जो पानी के दबाव में टिकाऊ नहीं होगा। जो खतरनाक होगा। इस मामले को लेकर माधोपुर दोस्तीया ग्रामवासियों ने बागमती कार्यपालक अभियंता से मिलकर जांच की मांग की है। बताया है कि बांध निर्माण में मानक के अनुसार गुणवत्तापूर्ण मिट्टी भराई नहीं हो रही है। इसमें न तो उचित लेयरिंग की जा रही है और न ही रोलर से दबाव (कंपैक्शन) दिया जा रहा है। इससे बांध की ऊंचाई और मजबूती केवल कागजों में दिखाई जा रही है, जबकि जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। बताया कि मिट्टी भराई कार्य स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले मानसून में बांध को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है, जिसका सीधा असर गांव की आबादी और खेती पर पड़ेगा। इसे लेकर ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र जांच कर कार्य में सुधार नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीण संजय कुमार सिंह, चंदन सिंह, मनोज कुमार, अच्छे लाल साह, अरुण कुमार, ओम प्रकाश, सुबोध सिंह, बृजेश कुमार, सतीश कुमार सिंह आदि ने बताया कि फिलहाल इस मामले में विभागीय स्तर पर जांच का इंतजार है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कदम उठाता है और क्या बांध की सुरक्षा को लेकर ठोस कार्रवाई होती है या नहीं। ट्रैक्टर से बांध पर बालू मिट्टी गिराया जा रहा है, जो स्टीमेट के विपरित है। हम लोग के द्वारा मिट्टी डालने और मजबूत काम करने का आग्रह किया गया, लेकिन काम करवाने वाले व्यक्ति ने इसे सिरे से इनकार कर दिया है। बताया कि अगर बालू से बाध भरा जाएगा तो बाढ़ के समय बांध टूटने एवं बांध के मजबूती पर भी सवाल उठता है। खतरा हमें झेलना है, ठेकेदार व अधिकारी तो चैन से ही सोये रहेंगे। मामला संज्ञान में आया है। शीघ्र ही जांच कर सुधार की जाएगी। ऐसा नहीं होने पर कार्रवाई होगी। बांध निर्माण नियमानुसार मिट्टी से होना है, अगर बालू से हो रहा है तो यह गलत है। – शाहिद कमाल, कार्यपालक अभियंता, बागमती, शिवहर


