मोटापा (बीएमआई 30 या अधिक) वाले लोगों में संक्रमण से अस्पताल में भर्ती होने या मौत का खतरा सामान्य वजन (बीएमआई 18.5-24.9) वालों की तुलना में 70 प्रतिशत अधिक होता है। गंभीर मोटापे (बीएमआई 40 या अधिक) में यह जोखिम तीन गुना तक बढ़ जाती है। हाल ही द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। अध्ययन के अनुसार वैश्विक स्तर पर 2023 में 54 लाख संक्रमण से मौतों में से लगभग 6 लाख (10.8 प्रतिशत, यानी हर 10 में से 1 मौत) मोटापे के कारण हुई थी।
अध्ययन में फिनलैंड और यूके सहित अलग-अलग देशों के 5.4 लाख से अधिक वयस्कों के 13-14 साल के डेटा का विश्लेषण किया गया। इसमें मौसमी फ्लू, कोविड-19, निमोनिया, गैस्ट्रोएंटेराइटिस, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन और लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन जैसे सामान्य संक्रमण शामिल हैं। एचआईवी और टीबी पर मोटापे का प्रभाव नहीं पाया गया।
विशेषज्ञों का क्या है कहना?
विशेषज्ञों का मानना हैं कि मोटापा नियंत्रण से वैश्विक स्तर पर लाखों मौतें रोकी जा सकती हैं। प्रमुख लेखक डॉ. सोल्जा नाइबर्ग (यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसिंकी) ने कहा, ‘मोटापा वाले लोग विभिन्न संक्रमणों से गंभीर रूप से बीमार होने या मरने की अधिक संभावना रखते हैं। वैश्विक मोटापा दर बढ़ने से संक्रमण से जुड़ी मौतें और अस्पताल में भर्ती बढ़ेंगी। यह अध्ययन मोटापे को सिर्फ क्रॉनिक बीमारियों तक सीमित नहीं मानता, बल्कि संक्रमणों के लिए भी बड़ा जोखिम बताता है।’
उच्च आय वाले देशों में ज्यादा खतरा-
अध्ययन के अनुसार उच्च आय वाले देशों में मोटापे के कारण संक्रमण व मौतों की जोखिम ज्यादा है। अमेरिका में 26 प्रतिशत और यूके में 16 प्रतिशत मौतें मोटापे से जुड़ी है। भारत में 2023 में 12.11 लाख संक्रमण मौतों में से 3.8 प्रतिशत यानी लगभग 46,100 मौतें मोटापे से जुड़ी थीं। हर 1,000 मौतों में 46 मौतें मोटापे के कारण हुई। भारत में 29 प्रतिशत आबादी सामान्य मोटापे और 40 प्रतिशत पेट की मोटापे से ग्रस्त है।


