‘ए राजा… उठी ना… बबुआ के गोदी में उठाके खेलाई ना… बुचिया खोजत बाड़ी सन…’ आरा सदर अस्पताल एक महिला ऑब्जरवेशन वार्ड के बेड नंबर 14 पर एडमिट अपने पति के कानों में ये बातें बोले जा रही है। उसे उम्मीद है कि कभी तो पति मेरी बात सुनकर आंख खोलेंगे और कोई रिस्पॉन्स देंगे। दरअसल, अस्पताल के बेड नंबर 14 पर एडमिट मरीज 5 मार्च को सड़क हादसे में घायल हो गया था। घायल होने के बाद उसे आरा अस्पताल लाया गया, वहां से पटना एम्स रेफर किया गया। वहां बेड नहीं मिलने पर मरीज को पटना पीएमसीएच और फिर प्राइवेट अस्पताल में एडमिट कराया गया। आखिरकार मरीज को उसके परिजन वापस आरा सदर अस्पताल लेकर आए और एडमिट कराया। मरीज सड़क हादसे में कैसे घायल हुआ? मरीज आखिर बातचीत क्यों नहीं कर रहा? आखिर ऐसा क्या हुआ कि आरा सदर अस्पताल से एम्स, पीएमसीएच, प्राइवेट अस्पताल से वापस मरीज को आरा में एडमिट कराया गया? मरीज के परिजन का क्या कहना है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले हादसे की पूरी कहानी जानिए बड़हरा प्रखंड के ज्ञानपुर गांव के रहने वाले 32 साल के गुप्तेश्वर पासवान 5 मार्च को गांव में ही सड़क हादसे के शिकार हो गए। गुप्तेश्वर पासवान अपनी पत्नी सुमन देवी, दो बेटी 13 साल की लीलावती, 5 साल की स्वीटी और ढाई साल के बेटे गुलशन कुमार के साथ रहता है। पत्नी सुमन देवी ने बताया कि होली के दिन गुलशन को बुखार हुआ था। लेकिन होली का समय था, इसलिए डॉक्टर को न दिखाकर मेडिकल से दवा खरीदकर लाए और बेटे को खिला दिया। सुमन ने बताया कि 5 मार्च को जब बेटे की हालत में सुधार नहीं हुआ तो मैं अपने पति गुप्तेश्वर पासवान के साथ बेटे को लेकर आरा सदर अस्पताल पहुंची। डॉक्टर से बेटे का इलाज कराने के बाद हम तीनों ऑटो से गांव के मोड़ पर उतर गए और सड़क पार कर घर की ओर जाने लगे। मरीज गुप्तेश्वर की पत्नी के मुताबिक, सड़क पार करने के दौरान एक तेज रफ्तार कर ने मेरे पति को टक्कर मार दी और फरार हो गया। उन्होंने बताया कि टक्कर इतनी तेज थी कि मेरे पति लहूलुहान होकर सड़क पर गिर गए। 20 मिनट तक मैं लोगों से पति को उठाकर अस्पताल ले जाने की गुजारिश करती रही, लेकिन किसी ने मेरी मदद नहीं की। सुमन ने बताया कि आखिरकार मैं बेटे को गोद में लेकर दौड़कर गांव पहुंची और मदद मांगी। इसके बाद पति को गांव के लोगों ने उठाकर आरा सदर अस्पताल भिजवाया। आरा में प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने पटना एम्स रेफर किया सुमन ने बताया कि कार की टक्कर से पति के सिर, सीना और पेट में गंभीर चोटें आईं। कई जगह से खून निकल रहा था। लिहाजा, आरा सदर अस्पताल में डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद पति को पटना एम्स रेफर कर दिया। एम्स में पति को ले जाने पर बेड नहीं मिला, फिर हम लोग गुप्तेश्वर को लेकर पटना पीएमसीएच पहुंचे। उन्होंने बताया कि पीएमसीएच में भी जब बेहतर इलाज नहीं मिला तो पति को 6 मार्च को पटना के ही प्राइवेट अस्पताल में एडमिट कराया। इलाज के लिए पैसे नहीं थे, गांव में 1 लाख का चंदा इकट्ठा किया मरीज गुप्तेश्वर की पत्नी सुमन ने बताया कि प्राइवेट अस्पताल में पति को एडमिट तो कर लिया गया। इलाज भी शुरू किया गया, लेकिन पति के इलाज में कोई सुधार नहीं हुई। उन्होंने बताया कि 6 दिनों में ही अस्पताल ने 1.75 लाख का बिल बना दिया। उन्होंने बताया कि गांव के लोगों से इकट्ठा किए गए 1 लाख रुपए और इधर-उधर से जुगाड़कर अस्पताल का बिल चुकाया और पति को आरा सदर अस्पताल लेकर आ गई। उन्होंने बताया कि प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने की मेरी हैसियत नहीं है। जब 6 दिनों में करीब 2 लाख का बिल आ गया तो पता नहीं पति के पूरी तरह से ठीक होने पर कितना का बिल आएगा। सुमन ने कहा कि सरकार सिर्फ वादा करती है, आयुष्मान कार्ड का दिखावा करती है कि गरीबों का इलाज में कोई दिक्कत नहीं होगा। मैं पति को लेकर 5 मार्च से तीन से चार अस्पताल का चक्कर काट चुकी हूं, लेकिन कहीं बेहतर इलाज नहीं मिल रहा है, पति की हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है। हमलोगों को कोई सुनने वाला नहीं है। विधायक और सासंद से भी मदद मांगी लेकिन कुछ नहीं हुआ। गुप्तेश्वर पासवान के जीजा उमाशंकर पासवान ने बताया कि मरीज को पटना पीएमसीएच से एम्स तक लेकर गए। लेकिन कहीं कोई इलाज नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि आरा के सांसद के पास फोन किया, लेकिन उनके बोलने के बावजूद पीएमसीएच में बेवजह दौड़ाया गया, हम लोग गरीब हैं, हमें कोई नहीं पूछता। हम लोग कमाने खाने वाले हैं, थक-हार कर मरीज को 12 मार्च को आरा सदर अस्पताल लाया गया है। ‘ए राजा… उठी ना… बबुआ के गोदी में उठाके खेलाई ना… बुचिया खोजत बाड़ी सन…’ आरा सदर अस्पताल एक महिला ऑब्जरवेशन वार्ड के बेड नंबर 14 पर एडमिट अपने पति के कानों में ये बातें बोले जा रही है। उसे उम्मीद है कि कभी तो पति मेरी बात सुनकर आंख खोलेंगे और कोई रिस्पॉन्स देंगे। दरअसल, अस्पताल के बेड नंबर 14 पर एडमिट मरीज 5 मार्च को सड़क हादसे में घायल हो गया था। घायल होने के बाद उसे आरा अस्पताल लाया गया, वहां से पटना एम्स रेफर किया गया। वहां बेड नहीं मिलने पर मरीज को पटना पीएमसीएच और फिर प्राइवेट अस्पताल में एडमिट कराया गया। आखिरकार मरीज को उसके परिजन वापस आरा सदर अस्पताल लेकर आए और एडमिट कराया। मरीज सड़क हादसे में कैसे घायल हुआ? मरीज आखिर बातचीत क्यों नहीं कर रहा? आखिर ऐसा क्या हुआ कि आरा सदर अस्पताल से एम्स, पीएमसीएच, प्राइवेट अस्पताल से वापस मरीज को आरा में एडमिट कराया गया? मरीज के परिजन का क्या कहना है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले हादसे की पूरी कहानी जानिए बड़हरा प्रखंड के ज्ञानपुर गांव के रहने वाले 32 साल के गुप्तेश्वर पासवान 5 मार्च को गांव में ही सड़क हादसे के शिकार हो गए। गुप्तेश्वर पासवान अपनी पत्नी सुमन देवी, दो बेटी 13 साल की लीलावती, 5 साल की स्वीटी और ढाई साल के बेटे गुलशन कुमार के साथ रहता है। पत्नी सुमन देवी ने बताया कि होली के दिन गुलशन को बुखार हुआ था। लेकिन होली का समय था, इसलिए डॉक्टर को न दिखाकर मेडिकल से दवा खरीदकर लाए और बेटे को खिला दिया। सुमन ने बताया कि 5 मार्च को जब बेटे की हालत में सुधार नहीं हुआ तो मैं अपने पति गुप्तेश्वर पासवान के साथ बेटे को लेकर आरा सदर अस्पताल पहुंची। डॉक्टर से बेटे का इलाज कराने के बाद हम तीनों ऑटो से गांव के मोड़ पर उतर गए और सड़क पार कर घर की ओर जाने लगे। मरीज गुप्तेश्वर की पत्नी के मुताबिक, सड़क पार करने के दौरान एक तेज रफ्तार कर ने मेरे पति को टक्कर मार दी और फरार हो गया। उन्होंने बताया कि टक्कर इतनी तेज थी कि मेरे पति लहूलुहान होकर सड़क पर गिर गए। 20 मिनट तक मैं लोगों से पति को उठाकर अस्पताल ले जाने की गुजारिश करती रही, लेकिन किसी ने मेरी मदद नहीं की। सुमन ने बताया कि आखिरकार मैं बेटे को गोद में लेकर दौड़कर गांव पहुंची और मदद मांगी। इसके बाद पति को गांव के लोगों ने उठाकर आरा सदर अस्पताल भिजवाया। आरा में प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने पटना एम्स रेफर किया सुमन ने बताया कि कार की टक्कर से पति के सिर, सीना और पेट में गंभीर चोटें आईं। कई जगह से खून निकल रहा था। लिहाजा, आरा सदर अस्पताल में डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद पति को पटना एम्स रेफर कर दिया। एम्स में पति को ले जाने पर बेड नहीं मिला, फिर हम लोग गुप्तेश्वर को लेकर पटना पीएमसीएच पहुंचे। उन्होंने बताया कि पीएमसीएच में भी जब बेहतर इलाज नहीं मिला तो पति को 6 मार्च को पटना के ही प्राइवेट अस्पताल में एडमिट कराया। इलाज के लिए पैसे नहीं थे, गांव में 1 लाख का चंदा इकट्ठा किया मरीज गुप्तेश्वर की पत्नी सुमन ने बताया कि प्राइवेट अस्पताल में पति को एडमिट तो कर लिया गया। इलाज भी शुरू किया गया, लेकिन पति के इलाज में कोई सुधार नहीं हुई। उन्होंने बताया कि 6 दिनों में ही अस्पताल ने 1.75 लाख का बिल बना दिया। उन्होंने बताया कि गांव के लोगों से इकट्ठा किए गए 1 लाख रुपए और इधर-उधर से जुगाड़कर अस्पताल का बिल चुकाया और पति को आरा सदर अस्पताल लेकर आ गई। उन्होंने बताया कि प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने की मेरी हैसियत नहीं है। जब 6 दिनों में करीब 2 लाख का बिल आ गया तो पता नहीं पति के पूरी तरह से ठीक होने पर कितना का बिल आएगा। सुमन ने कहा कि सरकार सिर्फ वादा करती है, आयुष्मान कार्ड का दिखावा करती है कि गरीबों का इलाज में कोई दिक्कत नहीं होगा। मैं पति को लेकर 5 मार्च से तीन से चार अस्पताल का चक्कर काट चुकी हूं, लेकिन कहीं बेहतर इलाज नहीं मिल रहा है, पति की हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है। हमलोगों को कोई सुनने वाला नहीं है। विधायक और सासंद से भी मदद मांगी लेकिन कुछ नहीं हुआ। गुप्तेश्वर पासवान के जीजा उमाशंकर पासवान ने बताया कि मरीज को पटना पीएमसीएच से एम्स तक लेकर गए। लेकिन कहीं कोई इलाज नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि आरा के सांसद के पास फोन किया, लेकिन उनके बोलने के बावजूद पीएमसीएच में बेवजह दौड़ाया गया, हम लोग गरीब हैं, हमें कोई नहीं पूछता। हम लोग कमाने खाने वाले हैं, थक-हार कर मरीज को 12 मार्च को आरा सदर अस्पताल लाया गया है।


