‘हे ईश्वर, इन्हें क्षमा करना…’:न्यू इंडिया चर्च में गूंजी विशेष प्रार्थना, शहर की खुशहाली और सद्भाव के लिए मांगी दुआ

‘हे ईश्वर, इन्हें क्षमा करना…’:न्यू इंडिया चर्च में गूंजी विशेष प्रार्थना, शहर की खुशहाली और सद्भाव के लिए मांगी दुआ

गोविंद नगर स्थित न्यू इंडिया चर्च ऑफ गॉड में शुक्रवार को गुड फ्राइडे के अवसर पर विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर चर्च परिसर पूरी तरह श्रद्धा और भक्ति के माहौल में डूबा नजर आया। बड़ी संख्या में मसीही समाज के लोग, विशेषकर महिलाएं प्रभु यीशु मसीह के बलिदान को याद करने पहुंचीं। भजन-कीर्तन से गूंजा चर्च परिसर प्रार्थना सभा की शुरुआत सुबह विशेष आराधना के साथ हुई। श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों और भजनों के माध्यम से प्रभु यीशु के त्याग को याद किया। चर्च में मौजूद लोगों ने मौन रखकर और प्रार्थना कर उस घड़ी को याद किया, जब मानवता की रक्षा के लिए प्रभु यीशु ने सूली पर चढ़कर अपने प्राणों की आहुति दी थी। वातावरण में गहरी शांति और आस्था का भाव दिखाई दे रहा था। महिलाओं ने लिया प्रेम और सेवा का संकल्प कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी सबसे प्रमुख रही। प्रार्थना में शामिल होने आईं महिलाओं ने कहा कि गुड फ्राइडे केवल शोक का दिन नहीं, बल्कि यह प्रेम, क्षमा और बलिदान की सीख देता है। उपस्थित महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे प्रभु यीशु के बताए गए करुणा और प्रेम के संदेश को अपने दैनिक जीवन में उतारेंगी। इस दौरान चर्च में आए लोगों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर समाज में शांति और भाईचारे के लिए विशेष दुआएं भी मांगी। शांति और सद्भाव की कामना प्रार्थना सभा के दौरान विशेष रूप से देश और शहर की खुशहाली के लिए प्रार्थना की गई। चर्च प्रबंधन और श्रद्धालुओं का कहना था कि गुड फ्राइडे का यह दिन हमें सिखाता है कि बुराई पर हमेशा अच्छाई की जीत होती है और क्षमा करना ही सबसे बड़ा धर्म है। भक्तिमय माहौल में लोगों ने श्रद्धापूर्वक प्रभु के चरणों में शीश नवाया। दिखा गहरी आस्था का नजारा
गोविंद नगर स्थित इस चर्च में सुबह से ही लोगों का आना शुरू हो गया था। चर्च को सादगी के साथ सजाया गया था ताकि प्रार्थना की गंभीरता बनी रहे। आराधना के बाद श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे के साथ शांति का संदेश साझा किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान कहीं भी आडंबर नहीं दिखा, बल्कि सादगी और सच्ची आस्था ही केंद्र में रही। लोगों ने नम आंखों से प्रभु यीशु के कष्टों को याद किया और उनके दिखाए मार्ग पर चलने की शपथ ली।

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