अररिया में वर्षों से लंबित नर्सिंग प्रशिक्षण केंद्र अब अपने अंतिम चरण में है। लगभग 30 करोड़ रुपए की लागत से अररिया आरएस में बन रहे इस केंद्र में जल्द ही एएनएम, जीएनएम और पैरामेडिकल पाठ्यक्रम शुरू होने की तैयारी है। इससे स्थानीय युवाओं को चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इस केंद्र का शिलान्यास 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने किया था। इसका लक्ष्य 2019 से प्रशिक्षण शुरू करना था, लेकिन निर्माण में देरी के कारण यह सपना 2025 तक अधूरा रहा। स्थानीय सांसद और विभिन्न संगठनों ने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे से कई बार इसे जल्द शुरू करने की मांग की थी, जिसके बाद उन्होंने आश्वासन दिया था। अब निर्माण कार्य अंतिम दौर में है। केंद्र का निर्माण देख रही कंपनी के केयरटेकर संजीव कुमार ने बताया कि पिछले चार महीनों से काम तेजी से चल रहा है। उन्होंने पुष्टि की कि निर्माण से जुड़ा लगभग सारा काम पूरा हो चुका है और अब केवल हैंडओवर बाकी है। डीपीएम संतोष कुमार ने जानकारी दी कि एकेडमिक बिल्डिंग पूरी तरह तैयार है, जबकि हॉस्टल ब्लॉक एक से डेढ़ महीने में पूरा हो जाएगा। 200 छात्र-छात्राएं को मिलेगा प्रशिक्षण हॉस्टल ब्लॉक पूरा होने के बाद, केंद्र को विभाग को हैंडओवर कर दिया जाएगा। हैंडओवर मिलने पर राज्य स्तर पर सूचना जारी की जाएगी और उसके बाद नए सत्र की शुरुआत होगी। अधिकारियों का अनुमान है कि यह केंद्र शुरू होने पर प्रतिवर्ष लगभग 200 छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान दे सकेंगे। इससे जिले के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती मिलेगी और नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ की कमी भी दूर होगी। गुणवत्ता जांच के बाद विभाग को होगा हैंडओवर हालांकि, हैंडओवर से पहले ही भवन में कुछ दरारें दिखाई देने लगी हैं। इस पर डीपीएम संतोष कुमार ने स्पष्ट किया कि विभाग गुणवत्ता जांच के बाद ही हैंडओवर लेगा। सभी कमियां दूर कर गुणवत्तापूर्ण ढांचा सुनिश्चित किया जाएगा। बढ़ती जनसंख्या और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव के बीच यह केंद्र अररिया के लिए वरदान साबित हो सकता है। स्थानीय युवा अब 2026 में नए सत्र की शुरुआत का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही यह केंद्र संचालन में आ जाएगा और जिले के स्वास्थ्य क्षेत्र में नई क्रांति लाएगा। अररिया में वर्षों से लंबित नर्सिंग प्रशिक्षण केंद्र अब अपने अंतिम चरण में है। लगभग 30 करोड़ रुपए की लागत से अररिया आरएस में बन रहे इस केंद्र में जल्द ही एएनएम, जीएनएम और पैरामेडिकल पाठ्यक्रम शुरू होने की तैयारी है। इससे स्थानीय युवाओं को चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इस केंद्र का शिलान्यास 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने किया था। इसका लक्ष्य 2019 से प्रशिक्षण शुरू करना था, लेकिन निर्माण में देरी के कारण यह सपना 2025 तक अधूरा रहा। स्थानीय सांसद और विभिन्न संगठनों ने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे से कई बार इसे जल्द शुरू करने की मांग की थी, जिसके बाद उन्होंने आश्वासन दिया था। अब निर्माण कार्य अंतिम दौर में है। केंद्र का निर्माण देख रही कंपनी के केयरटेकर संजीव कुमार ने बताया कि पिछले चार महीनों से काम तेजी से चल रहा है। उन्होंने पुष्टि की कि निर्माण से जुड़ा लगभग सारा काम पूरा हो चुका है और अब केवल हैंडओवर बाकी है। डीपीएम संतोष कुमार ने जानकारी दी कि एकेडमिक बिल्डिंग पूरी तरह तैयार है, जबकि हॉस्टल ब्लॉक एक से डेढ़ महीने में पूरा हो जाएगा। 200 छात्र-छात्राएं को मिलेगा प्रशिक्षण हॉस्टल ब्लॉक पूरा होने के बाद, केंद्र को विभाग को हैंडओवर कर दिया जाएगा। हैंडओवर मिलने पर राज्य स्तर पर सूचना जारी की जाएगी और उसके बाद नए सत्र की शुरुआत होगी। अधिकारियों का अनुमान है कि यह केंद्र शुरू होने पर प्रतिवर्ष लगभग 200 छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान दे सकेंगे। इससे जिले के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती मिलेगी और नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ की कमी भी दूर होगी। गुणवत्ता जांच के बाद विभाग को होगा हैंडओवर हालांकि, हैंडओवर से पहले ही भवन में कुछ दरारें दिखाई देने लगी हैं। इस पर डीपीएम संतोष कुमार ने स्पष्ट किया कि विभाग गुणवत्ता जांच के बाद ही हैंडओवर लेगा। सभी कमियां दूर कर गुणवत्तापूर्ण ढांचा सुनिश्चित किया जाएगा। बढ़ती जनसंख्या और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव के बीच यह केंद्र अररिया के लिए वरदान साबित हो सकता है। स्थानीय युवा अब 2026 में नए सत्र की शुरुआत का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही यह केंद्र संचालन में आ जाएगा और जिले के स्वास्थ्य क्षेत्र में नई क्रांति लाएगा।


