वाराणसी में मनरेगा को लेकर कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई द्वारा प्रस्तावित “मनरेगा बचाओ मार्च” से पहले ही सियासी माहौल गरमा गया है। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी के नेतृत्व में यह मार्च काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के मुख्य द्वार से प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) तक निकाले जाने की घोषणा की गई थी। हालांकि मार्च से पहले ही पुलिस प्रशासन ने एनएसयूआई के कई पदाधिकारियों को नजरबंद कर दिया है। पदाधिकारियों ने कहा – लोकतंत्र की हत्या है एनएसयूआई पदाधिकारियों ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने के अधिकार को दबाया जा रहा है। संगठन का कहना है कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना को कमजोर किए जाने के विरोध में यह मार्च निकाला जाना था, लेकिन सरकार और प्रशासन असहमति की आवाज को दबाने पर आमादा है। हर चौराहे पर पुलिस अलर्ट कांग्रेस और एनएसयूआई के इस प्रस्तावित मार्च को देखते हुए वाराणसी पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। बीएचयू के सिंह द्वार पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। इसके अलावा प्रधानमंत्री जनसंपर्क कार्यालय के आसपास भी बैरिकेडिंग कर दी गई है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। सुरक्षा के मद्देनज़र संवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त भी बढ़ा दी गई है। दोपहर में निकलना है मार्च एनएसयूआई की ओर से दोपहर 1:30 बजे मार्च निकालने की घोषणा की गई थी। संगठन के नेताओं का कहना है कि वे मनरेगा में मजदूरी भुगतान में देरी, काम के दिनों में कटौती और बजट में कमी जैसे मुद्दों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते थे। वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए हैं।


