को-लोकेशन केस में NSE की सेटलमेंट अर्जी को सेबी ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद करीब एक दशक से अटके NSE के IPO की सबसे बड़ी कानूनी बाधा दूर हो गई है। सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने 15 जनवरी को इसकी जानकारी दी। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रेगुलेटरी क्लियरेंस मिलने के बाद अब NSE मार्च के अंत तक अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) यानी लिस्टिंग पेपर्स फाइल कर सकता है। इसके लिए एक्सचेंज ने इन्वेस्टमेंट बैंकर्स और लॉ फर्म्स के साथ बातचीत शुरू कर दी है। उम्मीद है कि इसी महीने के अंत तक सेबी की ओर से NOC जारी कर दी जाएगी, जिसके बाद सलाहकारों की औपचारिक नियुक्ति होगी। NSE देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। को-लोकेशन केस के कारण 2016 से अटका है IPO NSE साल 2016 से ही शेयर बाजार में लिस्ट होने की कोशिश कर रहा है। लेकिन को-लोकेशन केस की जांच के कारण उसे मंजूरी नहीं मिल रही थी। पिछले साल NSE ने 1,387 करोड़ रुपए देकर इस मामले को निपटाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे अब सेबी ने स्वीकार कर लिया है। सरकार ने 2.5% हिस्सेदारी बेचने को दी मंजूरी सेबी चेयरमैन ने ये भी बताया कि सरकार ने एक्सचेंज में 2.5% हिस्सेदारी कम करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दे दी है। इसका नोटिफिकेशन जल्द ही जारी किया जाएगा। साल 2024 में सेबी ने IPO नियमों में बदलाव किया था। अब 5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की वैल्यू वाली कंपनियां सिर्फ 2.5% हिस्सेदारी बेचकर भी लिस्ट हो सकती हैं। पहले यह सीमा 5% थी। इससे NSE जैसी बड़ी कंपनियों के लिए लिस्टिंग का रास्ता आसान हो गया है। अनलिस्टेड मार्केट में बढ़ी डिमांड, 15% तक चढ़े शेयर आईपीओ की सुगबुगाहट तेज होते ही अनलिस्टेड और ग्रे मार्केट में NSE के शेयरों की डिमांड बढ़ गई है। पिछले कुछ दिनों में इसके शेयरों की कीमत 10 से 15% तक उछल गई है। फिलहाल अनलिस्टेड मार्केट में NSE की वैल्यूएशन करीब 5 लाख करोड़ रुपए आंकी जा रही है। इसके शेयर 2,095 रुपए के आसपास ट्रेड कर रहे हैं। हालांकि, आधिकारिक वैल्यूएशन का पता लिस्टिंग के समय ही चलेगा। देश की सबसे बड़ी अनलिस्टेड कंपनी, 1.77 लाख शेयरहोल्डर्स NSE शेयरहोल्डर्स की संख्या के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी अनलिस्टेड कंपनी है। इसके कुल 1,77,807 शेयरहोल्डर्स हैं। आईपीओ के दौरान इतने बड़े बेस को मैनेज करना और बैंकों व विदेशी फंड्स जैसे संस्थागत निवेशकों को एग्जिट का मौका देना वकीलों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। अनलिस्टेड मार्केट वह बाजार होता है जहां उन कंपनियों के शेयरों की खरीद-बिक्री होती है जो अभी स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट नहीं हुई हैं। यहां निवेशक किसी कंपनी के आईपीओ आने से पहले ही उसके शेयर खरीद लेते हैं ताकि लिस्टिंग के समय बड़ा मुनाफा कमा सकें। चूंकि ये शेयर एक्सचेंज पर नहीं होते, इसलिए इनका सौदा सीधे दो लोगों या ब्रोकर्स के जरिए होता है और इसमें जोखिम भी स्टॉक मार्केट के मुकाबले ज्यादा होता है।
10 साल से अटका NSE का IPO जल्द आएगा:मार्च अंत तक ड्राफ्ट पेपर संभव; ₹1,387 करोड़ के सेटलमेंट को सेबी की सैद्धांतिक मंजूरी


