अब जानवर नहीं, घर के सदस्य हैं आपके पेट्स, जानें क्यों बढ़ रही है इनकी डिजिटल डिमांड

अब जानवर नहीं, घर के सदस्य हैं आपके पेट्स, जानें क्यों बढ़ रही है इनकी डिजिटल डिमांड

Pet Videos Apps Demand: इंटरनेट की दुनिया ने इंसानों को एक कोने से दूसरे कोने तक जोड़ दिया है, जिससे कभी भी, कहीं भी, किसी से भी बात करना आसान हो गया है। वहीं, अगर आप अकेले रहना चाहें, तो आपके लिए एंटरटेनमेंट के कई विकल्प भी मौजूद हैं, जिससे आप बोर नहीं होंगे। ऐसे में अगर आपके घर पर कोई पालतू जानवर है और वह बोर हो रहा है, तो आपने उसे देखकर कभी ना कभी यह जरूर सोचा होगा कि काश इसके लिए भी कोई इंटरनेट से जुड़ी सुविधा होती, जिससे यह बोर न होता।

अगर आपने ऐसा कभी सोचा है, तो आपको जानकर हैरानी होगी कि आजकल हमारे पालतू सिर्फ हमारे घर के सदस्य नहीं रहे, बल्कि उनकी भी अपनी डिजिटल दुनिया बन गई है। अब यूट्यूब के साथ-साथ कई ऐसे ऐप्स मौजूद हैं, जिन पर उनके लिए अलग से वीडियो बनाए जाते हैं। आपका पालतू इन्हें देखकर बिना बोर हुए एंटरटेन हो सकता है। आइए जानते हैं कि जानवरों को बोर होने से बचाने के लिए आप इंटरनेट की कौन-कौन सी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।

पेट कंटेंट क्रिएशन क्रेज

कुछ साल पहले, जहां सिर्फ इंसानों का ही कंटेंट क्रिएशन में डिमांड थी, वहीं आज के समय में जानवरों की डिमांड भी तेजी से बढ़ रही है। खासकर कुत्तों और बिल्लियों के लिए। इसलिए आज के समय में यूट्यूब के साथ-साथ इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पर पालतू जानवरों के कई चैनल मौजूद हैं। आप इन्हें अपने पालतू के बोर होने पर दिखा सकते हैं, जिससे वह बोर नहीं होगा और ना ही आपको परेशान करेगा। इसके अलावा Happy Dog TV और Relax My Cat जैसी ऐप्स भी हैं, जो सिर्फ पालतू जानवरों के लिए बनाई गई हैं।

पालतू की स्क्रीन देखने की आदत

कुत्ते और बिल्लियां स्क्रीन पर दूसरे जानवरों को देखकर खुश होते हैं। उन्हें वीडियो देखना पसंद आता है, लेकिन उनका ध्यान लंबे समय तक नहीं टिकता। कुछ कुत्ते और बिल्लियां स्क्रीन में दिख रही चीजों का पीछा करते हैं और कभी-कभी वीडियो देखने के बाद वे खेलने में या खुद में व्यस्त हो जाते हैं। इसके अलावा, अब कुछ ऐसे ऐप्स भी बन रहे हैं, जिनमें जानवर खुद से वीडियो चुन सकते हैं या इंटरैक्टिव खेलों में हिस्सा ले सकते हैं। इससे उन्हें मजा आता है और बोर भी नहीं होते। जानवरों के लिए वीडियो सिर्फ इसलिए बनाए जाते हैं ताकि वे व्यस्त रहें या थक जाएं।

पालतू अब सिर्फ जानवर नहीं, परिवार के सदस्य

सालों पहले जहां सिर्फ जानवरों को पालतू समझा जाता था, वहीं आज के समय में लोग उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं। इसलिए इन दिनों जानवरों का जन्मदिन मनाना, अपने साथ वेकेशन पर ले जाना, या स्टॉलर में बैठाकर बच्चों की तरह घूमाना आम हो गया है। इसके अलावा, आपको जानकर हैरानी होगी कि दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर जैसे महानगरों में जानवरों के लिए विशेष रेस्टोरेंट, होटल और बोर्डिंग स्कूल जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, जहां आप उन्हें अपने साथ ले जा सकते हैं।

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