Health news: बदलती जीवनशैली और बढ़ते मानसिक तनाव के कारण आजकल लोगों में नींद पूरी न होने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसके चलते शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार अनिद्रा से स्लीप एपनिया, मधुमेह, हृदय रोग और मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में एम्स भोपाल के वैज्ञानिकों ने नींद सुधारने की एक नई और प्रभावी पद्धति विकसित की है, जिससे बिना दवा के बेहतर नींद संभव हो रही है।
मस्तिष्क के साथ बैठता है तालमेल
यह तकनीक पश्चिमी पद्धति ब्रेनवेव एंट्रेनमेंट और भारतीय योग-ध्यान का मिश्रण है। इसमें लयबद्ध ध्वनि, हल्की रोशनी के संकेत और निर्देशित ध्यान के जरिए मस्तिष्क की तरंगों को एक खास लय में लाया जाता है। विशेष रूप से डेल्टा ब्रेन वेव सत्र गहरी नींद से जुड़ी मस्तिष्क गतिविधियों को सक्रिय करता है। जब मस्तिष्क इन संकेतों के साथ तालमेल बैठाता है, तो दिमाग शांत होता है और शरीर स्वाभाविक रूप से गहरी नींद के लिए तैयार हो जाता है।
26 छात्र-छात्राओं पर किया गया शोध
इस पद्धति का परीक्षण एमबीबीएस के 26 छात्र-छात्राओं पर किया गया। परिणामों में पाया गया कि एक ही सत्र के बाद उनकी गहरी नींद की अवधि बढ़ी, रात में बार-बार जागने की समस्या कम हुई और नींद की समग्र गुणवत्ता में सुधार हुआ।
शोधकर्ता डॉ. वरुण मल्होत्रा के अनुसार, यह तकनीक अनिद्रा से जूझ रहे लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है। साथ ही ओंकार ध्यान के कारण मानसिक शांति, तनाव में कमी और हृदय स्वास्थ्य में भी सकारात्मक असर देखने को मिलता है। यह शोध भविष्य में नींद से जुड़ी समस्याओं के इलाज का एक सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प बन सकता है।


