- – आयकर की दरों में बदलाव नहीं, लेकिन रिवाइज्ड रिटर्न और एक्सीडेंट क्लेम पर बड़ी राहत
- – गलत रिपोर्टिंग पर अब 117 प्रतिशत तक पेनल्टी
केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में भले ही प्रत्यक्ष करों की दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन करदाताओं को प्रक्रियात्मक नियमों में बड़ी राहत दी है। अब 31 जुलाई को रिटर्न भरने की आपाधापी का सामना नहीं करना पड़ेगा। ऐसी इकाइयां और प्रोफेशनल्स, जिनकी आय 2 करोड़ रुपए से कम है और जिनका ऑडिट नहीं होता है, वे अब 31 अगस्त तक अपना आयकर रिटर्न दाखिल कर सकेंगे।
यह जानकारी जयपुर के वरिष्ठ आयकर विशेषज्ञ पीसी.परवाल ने मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की ओर से आयोजित बजट समीक्षा वेबीनार में दी। उन्होंने बताया कि रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि को भी 31 दिसंबर से तीन माह आगे बढ़ा दिया गया है, जो करदाताओं के लिए एक बड़ा अवसर है।
बजट की ‘बारीकियां’ जो आपके लिए जानना जरूरी है
- एक्सीडेंट क्लेम के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं : सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में मिलने वाले मुआवजे पर देरी से भुगतान होने पर जो ब्याज मिलता था, उसे अब तक आय माना जाता था। नए प्रावधानों में इस ब्याज राशि को आयकर से पूर्णत मुक्त कर दिया गया है।
- अस्पष्ट क्रेडिट पर टैक्स घटा, पर चोरी पर सख्त चोट: आयकर रिटर्न में अस्पष्ट क्रेडिट पाए जाने पर पहले 60 प्रतिशत टैक्स, सरचार्ज और सेस लगता था। अब इसे घटाकर 30 प्रतिशत टैक्स, 25 प्रतिशत सरचार्ज और 4 प्रतिशत सेस यानी कुल 39 प्रतिशत कर दिया गया है। लेकिन यदि आयकर अधिकारी ने आय की गलत रिपोर्टिंग पकड़ी और उसे आपकी आय में जोड़ा, तो अब पेनल्टी की दर 39 प्रतिशत टैक्स से दोगुनी होगी, यानी आपको कुल 117 प्रतिशत तक चुकाना पड़ सकता है।
- पीएफ-ईएसआई पर नियोक्ताओं को राहत: पहले कर्मचारी का पीएफ/ईएसआई अंशदान एक्ट की अंतिम तिथि तक जमा न कराने पर वह नियोक्ता की आय मान लिया जाता था। अब इस नियम में ढील देते हुए इसे संबंधित एक्ट में रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि तक जमा कराने की छूट दी गई है।
- शेयर बाजार और गोल्ड बांड पर असर
- शेयर बायबैक: प्रमोटर के अलावा आम निवेशक को शेयरों की पुनर्खरीद पर होने वाला लाभ अब ‘कैपिटल गेन’ माना जाएगा और उसी दर से टैक्स लगेगा।
- गोल्ड बॉन्ड: सोवेरियन गोल्ड बॉन्ड को अगर मैच्योरिटी से पहले स्टॉक एक्सचेंज पर बेचा जाता है, तो कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। हालांकि, मूल निवेशक की ओर से पूरी अवधि तक रखने पर प्राप्त राशि टैक्स फ्री रहेगी।
- डिविडेंड: डिविडेंड इनकम से कमीशन या शेयर खरीदने के लिए, लिए गए लोन के ब्याज को घटाने के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है।
- मैट क्रेडिट के नियम बदले: न्यूनतम वैकल्पिक कर में बड़ा बदलाव किया है। पुराने प्रावधानों के तहत मिली मैट की क्रेडिट आगामी पांच वर्षों में नहीं मिलेगी।
इन्होंने की शिरकत
वेबीनार की शुरुआत में चैम्बर अध्यक्ष अनिल मिश्रा ने मुख्य वक्ता पीसी.परवाल और प्रतिभागियों का स्वागत किया। महासचिव आरके जैन ने संचालन किया। वेबिनार में भीलवाड़ा, कांकरोली, चित्तौड़गढ़ और बांसवाड़ा की विभिन्न इकाइयों के वित्तीय अधिकारी, सीए और सीएस शामिल हुए।


