अब कलर कोडिंग से होगी पाइपलाइन की पहचान:नालों की होगी जियो फेंसिंग, शिकायतों की डुप्लीकेसी पूरी तरह हो जाएगी समाप्त

अब कलर कोडिंग से होगी पाइपलाइन की पहचान:नालों की होगी जियो फेंसिंग, शिकायतों की डुप्लीकेसी पूरी तरह हो जाएगी समाप्त

पटना में अब जलापूर्ति पाइपलाइन की कलर कोडिंग हो रही। पाइपलाइन को आसानी से पहचानने और रखरखाव में सुविधा के लिए सभी पाइप को कलर कोडिंग कर चिन्हित किया जाएगा। पटना नगर निगम मुख्यालय में नगर आयुक्त यशपाल मीणा की अध्यक्षता में शनिवार को बैठक आयोजित हुई। इसमें शहर की पाइपलाइन, ड्रेनेज और सड़कों के बेहतर प्रबंधन को लेकर डिटेल चर्चा हुई। पटना नगर निगम क्षेत्र के रोड और नाला की भी जियो फेंसिंग की जा रही है। ग्रीवंस रिड्रेसल सिस्टम को इस नई व्यवस्था से इंटीग्रेट किया जाएगा, जिससे शिकायतों का समाधान और भी तेज और प्रभावी होगा। इस प्रकार हो रही कलर कोडिंग कलर कोडिंग को अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया। ग्रीन मतलब 2016 के बाद स्थापित पाइपलाइन, येलो का मतलब 2016 से पहले स्थापित पाइपलाइन, रेड को डेड पाइपलाइन की कैटेगरी में रखा गया है, जबकि, ब्लू रंग पंप हाउस का संकेत है। जियोफेंसिंग और कलर कोडिंग से यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई हो और एक ही शिकायत के दोहराव से बचा जा सके। शिकायतों की डुप्लीकेसी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी नगर आयुक्त ने नगर निगम के अधिकारियों और अभियंताओं को निर्देश दिया कि इन संरचनाओं का जियोफेंसिंग जल्द सुनिश्चित करें, जिससे उनकी स्थिति, रखरखाव और मरम्मत में तेजी आए। इसके बाद इंटीग्रेशन के उपरांत शिकायतों की डुप्लीकेसी भी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। पटना नगर निगम क्षेत्र के रोड, नाला और जलापूर्ति पाइपलाइन की जियोफेंसिंग होने से मुख्यालय स्तर पर तुरंत पता लगाया जा सकेगा कि किसी नागरिक ने किसी विशेष क्षेत्र में पाइप, नाला या सड़क से संबंधित शिकायत दर्ज कराई है। इसके आधार पर संबंधित कर्मचारी तत्काल उस स्थल पर पहुंचकर समस्या का समाधान करेंगे। पटना में अब जलापूर्ति पाइपलाइन की कलर कोडिंग हो रही। पाइपलाइन को आसानी से पहचानने और रखरखाव में सुविधा के लिए सभी पाइप को कलर कोडिंग कर चिन्हित किया जाएगा। पटना नगर निगम मुख्यालय में नगर आयुक्त यशपाल मीणा की अध्यक्षता में शनिवार को बैठक आयोजित हुई। इसमें शहर की पाइपलाइन, ड्रेनेज और सड़कों के बेहतर प्रबंधन को लेकर डिटेल चर्चा हुई। पटना नगर निगम क्षेत्र के रोड और नाला की भी जियो फेंसिंग की जा रही है। ग्रीवंस रिड्रेसल सिस्टम को इस नई व्यवस्था से इंटीग्रेट किया जाएगा, जिससे शिकायतों का समाधान और भी तेज और प्रभावी होगा। इस प्रकार हो रही कलर कोडिंग कलर कोडिंग को अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया। ग्रीन मतलब 2016 के बाद स्थापित पाइपलाइन, येलो का मतलब 2016 से पहले स्थापित पाइपलाइन, रेड को डेड पाइपलाइन की कैटेगरी में रखा गया है, जबकि, ब्लू रंग पंप हाउस का संकेत है। जियोफेंसिंग और कलर कोडिंग से यह सुनिश्चित होगा कि किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई हो और एक ही शिकायत के दोहराव से बचा जा सके। शिकायतों की डुप्लीकेसी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी नगर आयुक्त ने नगर निगम के अधिकारियों और अभियंताओं को निर्देश दिया कि इन संरचनाओं का जियोफेंसिंग जल्द सुनिश्चित करें, जिससे उनकी स्थिति, रखरखाव और मरम्मत में तेजी आए। इसके बाद इंटीग्रेशन के उपरांत शिकायतों की डुप्लीकेसी भी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। पटना नगर निगम क्षेत्र के रोड, नाला और जलापूर्ति पाइपलाइन की जियोफेंसिंग होने से मुख्यालय स्तर पर तुरंत पता लगाया जा सकेगा कि किसी नागरिक ने किसी विशेष क्षेत्र में पाइप, नाला या सड़क से संबंधित शिकायत दर्ज कराई है। इसके आधार पर संबंधित कर्मचारी तत्काल उस स्थल पर पहुंचकर समस्या का समाधान करेंगे।  

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