Strait of Hormuz: ईरान-अमेरिका- इजरायल युद्ध धीरे-धीरे पूरी दुनिया को अपने जद में लेते जा रहे है। चीन के ईरान को सहयोग पहुंचाने के आरोप पर ड्रैगन पहले ही अमेरिका को जवाब दे चूका है। अब इसमें ब्रिटेन-फ्रांस सहित कई देश पर्दे के पीछे से शामिल हो गए हैं। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दुनिया भर में बढ़ती बेचैनी के बीच अब यूरोप ने एक अलग रास्ता अपनाने की कोशिश शुरू कर दी है। जहां एक तरफ हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ बातचीत और सहयोग के जरिए समाधान खोजने की कोशिश तेज होती दिख रही है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री (कीर स्टार्मर) Keir Starmer ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 40 से ज्यादा देशों की बैठक बुलाने का ऐलान किया है। उनका साफ कहना है कि अगर Strait of Hormuz बंद होता है, तो इसका असर सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरी दुनिया इसकी कीमत चुकाएगी। तेल की सप्लाई से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक, सब कुछ महंगा हो सकता है।
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
दरअसल, यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे अहम ट्रेड रूट्स में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है। अगर यह रुकता है, तो इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। चाहे वह यूरोप हो, एशिया हो या कोई और इलाका। इसी चिंता को देखते हुए ब्रिटेन और फ्रांस मिलकर एक ऐसा प्लान बना रहे हैं, जो न सिर्फ इस रास्ते को खुला रखे बल्कि शिपिंग को सुरक्षित भी बनाए। खास बात यह है कि यह पहल पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर आधारित होगी, न कि किसी एक देश की सैन्य ताकत पर।
कीर स्टार्मर ने और क्या कहा
कीर स्टार्मर ने एक इंटरव्यू में यह भी कहा कि ब्रिटेन पर दबाव जरूर है, लेकिन बिना साफ कानूनी आधार के वह किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होगा। उनका फोकस साफ है, तनाव कम करना और समुद्री रास्ते को चालू रखना। ब्रिटेन की मौजूदगी इस इलाके में पहले से है। उसके जहाज खाड़ी में तैनात हैं, लेकिन उनका मकसद लड़ाई नहीं, बल्कि सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
अमेरिका का रुख
अमेरिका की बात करें तो Donald Trump उन्होंने इस स्ट्रेट पर ब्लॉकेड लगाने की बात कही थी और दावा किया था कि उनके सहयोगी देश भी साथ देंगे। लेकिन ब्रिटेन ने पहले ही साफ कर दिया कि वह इस तरह की किसी सैन्य रणनीति का हिस्सा नहीं बनेगा।


