सांसद उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के विधायकों के टूटने पर सस्पेंस जारी है। इस बीच, अब विधायकों ने अपना रुख साफ कर दिया है। सीतामढ़ी के बाजपट्टी से RLM विधायक रामेश्वर महतो ने भास्कर से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा है कि राजनीति से संन्यास ले लूंगा, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा के साथ कभी राजनीति नहीं करूंगा। वह कहते कुछ हैं, करते कुछ हैं। RLM के तीनों बागी विधायक आपस में संपर्क में हैं। आज तीनों की एक मीटिंग होनी है। इसके बाद तय करेंगे कि आगे क्या फैसला लेना है। हालांकि, अभी तक ये तय नहीं हो पाया है कि किसी दूसरी पार्टी में जाना है या RLM में ही अलग धड़ा बनाना है। इस पर फिलहाल तीनों कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। सबसे पहले विधायक रामेश्वर महतो का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू पढ़िए… सवाल- चुनाव जीतने के तुरंत बाद आप अपने ही नेता से इतने नाराज क्यों हो गए? जवाब- नाराजगी के कारण हैं। ये (उपेंद्र कुशवाहा) बात लोहिया और जगदेव प्रसाद की करते हैं। खुद को समाजवादी बताते हैं। काम क्या किया? पूरे परिवार को एक बार में सेट कर दिया। लालू प्रसाद यादव की मजबूरी थी कि जेल जा रहे थे तो पत्नी (राबड़ी देवी) को सीएम बनाया। आप कौन सा जेल जा रहे थे। राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री बनने के 20 साल बाद विधानसभा चुनाव जीतकर उनके बेटे विधायक बने। आपका बेटा (दीपक प्रकाश) कौन सा चुनाव जीतकर आए कि आपने मंत्री बना दिया। ऐसे में सवाल तो बनता है। मुझे पेट भरने के लिए राजनीति नहीं करनी है। जिस दिन पेट भरने की बात आएगी दुकान खोलूंगा, राजनीति नहीं करूंगा। हजारों पार्टी कार्यकर्ता नेता के आगे-पीछे रहते हैं कि एक दिन उनके लिए भी कुछ होगा। इन्होंने सारे पद अपने परिवार में बांट दिए। सवाल- कहां से बातचीत बिगड़ी? आखिरी बार आमने-सामने बैठकर कब बात हुई? जवाब- उपेंद्र कुशवाहा के साथ आखिरी बातचीत 4 दिसंबर 2025 को हुई थी। उस रोज उन्होंने शाहाबाद के लोगों के लिए अपने आवास पर भोज आयोजित किया था। उसी दिन सभी नवनिर्वाचित विधायकों को भी बुलाया गया था। हमने उनके सामने अपनी नाराजगी जाहिर की। बताया कि उन्होंने जो किया है, सही नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मैं ज्यादा बोल रहा हूं।’ तब बात इतनी बिगड़ी कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन 5 दिसंबर को मैं शामिल नहीं हो पाया। 4 दिसंबर के बाद हमारी बातचीत बंद हो गई है। सवाल- उपेंद्र कुशवाहा अगर कार्रवाई करेंगे तो आप क्या करेंगे? जवाब- उनकी कार्रवाई से पहले विधायकी पद से इस्तीफा दे दूंगा। अगर बात नहीं बनी तो राजनीति छोड़ दूंगा। लालच की राजनीति नहीं करता हूं। नीतीश कुमार को पिता तुल्य मानता हूं। उन्होंने मुझे बहुत स्नेह दिया है। संगठन सचिव, MLC बनाया। मैंने जो काम कहा वो कराया। सीतामढ़ी-नेपाल सड़क मेरे निवेदन पर बनवाया। वह मुझ पर इतना ट्रस्ट करते थे। इन्होंने (उपेंद्र कुशवाहा) मुझे बहला-फुसलाकर उनका साथ छुड़वाया। अब अपने परिवार का भविष्य सेट कर लिया। मेरे भविष्य का क्या होगा? कार्यकर्ता जो इनकी दरी उठाते हैं, उनके भविष्य का क्या होगा? सवाल- क्या आपके साथ दोनों नाराज विधायक भी उनका साथ छोड़ देंगे? जवाब- इसकी जानकारी फिलहाल मुझे नहीं है। कुशवाहा के लिट्टी-मटन पार्टी के बाद हमलोग एक बार मिले थे। इसके बाद हमारी बातचीत नहीं हुई। मैंने अपना रुख स्पष्ट कर दिया था कि उपेंद्र कुशवाहा के साथ नहीं रहना है। मेरा गुजारा उनके साथ नहीं हो सकता। सवाल- आपलोग किसी पार्टी में जाएंगे या अपना अलग धड़ा बनाएंगे? जवाब- कुछ भी हो सकता है, लेकिन अभी तय नहीं है। बहुत जल्द इस पर बात कर आगे की रणनीति तय करेंगे। एक रास्ता तो लेना ही पड़ेगा। अकेले होने के बाद भी मुझे डर नहीं है। मैं कार्रवाई से पहले उनका साथ छोड़ दूंगा। मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा, लेकिन ऐसे व्यक्ति के साथ नहीं जाऊंगा जो कहे कुछ और करे कुछ। आपके घर में मटन और लिट्टी का भोज हो और कार्यकर्ता के घर में चूल्हा भी न जले तो ऐसी राजनीति किस काम की। लिट्टी पार्टी से भी दूर रहे थे उनके विधायक दरअसल, लोकसभा का शीतकालीन सत्र समाप्त होने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने पटना में अपने आवास पर बुधवार शाम को लिट्टी-पार्टी का आयोजन किया था। पार्टी में उन्होंने अपने तीनों विधायकों को भी आमंत्रित किया। सभी विधायक पटना में थे, लेकिन पार्टी शुरू होने के चंद घंटे पहले विधायक माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह दिल्ली निकल गए। दिल्ली जाने से पहले इन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से उनके आवास पर मुलाकात की। इसके बाद से ही बगावत की चर्चा तेज हो गई है। कुशवाहा की पार्टी में बगावत की वजह समझिए दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा ने चुनाव बाद आखिरी समय में मास्टर स्ट्रोक चला था। उन्होंने अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री पद की शपथ दिला दी। दीपक किसी सदन के सदस्य नहीं थे। उपेंद्र कुशवाहा पहले से राज्यसभा सांसद हैं। राजनीति से दूर रहने वाली पत्नी को इस बार सासाराम से विधायक बनवा दिया। यही कारण है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है। ये तय माना जा रहा था कि उनके सबसे लंबे समय तक सहयोगी रहे माधव आनंद को मंत्री बनाया जा सकता है। उन्हें मंत्री की जगह विधायक दल का नेता बनाया गया। सांसद उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के विधायकों के टूटने पर सस्पेंस जारी है। इस बीच, अब विधायकों ने अपना रुख साफ कर दिया है। सीतामढ़ी के बाजपट्टी से RLM विधायक रामेश्वर महतो ने भास्कर से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा है कि राजनीति से संन्यास ले लूंगा, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा के साथ कभी राजनीति नहीं करूंगा। वह कहते कुछ हैं, करते कुछ हैं। RLM के तीनों बागी विधायक आपस में संपर्क में हैं। आज तीनों की एक मीटिंग होनी है। इसके बाद तय करेंगे कि आगे क्या फैसला लेना है। हालांकि, अभी तक ये तय नहीं हो पाया है कि किसी दूसरी पार्टी में जाना है या RLM में ही अलग धड़ा बनाना है। इस पर फिलहाल तीनों कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। सबसे पहले विधायक रामेश्वर महतो का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू पढ़िए… सवाल- चुनाव जीतने के तुरंत बाद आप अपने ही नेता से इतने नाराज क्यों हो गए? जवाब- नाराजगी के कारण हैं। ये (उपेंद्र कुशवाहा) बात लोहिया और जगदेव प्रसाद की करते हैं। खुद को समाजवादी बताते हैं। काम क्या किया? पूरे परिवार को एक बार में सेट कर दिया। लालू प्रसाद यादव की मजबूरी थी कि जेल जा रहे थे तो पत्नी (राबड़ी देवी) को सीएम बनाया। आप कौन सा जेल जा रहे थे। राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री बनने के 20 साल बाद विधानसभा चुनाव जीतकर उनके बेटे विधायक बने। आपका बेटा (दीपक प्रकाश) कौन सा चुनाव जीतकर आए कि आपने मंत्री बना दिया। ऐसे में सवाल तो बनता है। मुझे पेट भरने के लिए राजनीति नहीं करनी है। जिस दिन पेट भरने की बात आएगी दुकान खोलूंगा, राजनीति नहीं करूंगा। हजारों पार्टी कार्यकर्ता नेता के आगे-पीछे रहते हैं कि एक दिन उनके लिए भी कुछ होगा। इन्होंने सारे पद अपने परिवार में बांट दिए। सवाल- कहां से बातचीत बिगड़ी? आखिरी बार आमने-सामने बैठकर कब बात हुई? जवाब- उपेंद्र कुशवाहा के साथ आखिरी बातचीत 4 दिसंबर 2025 को हुई थी। उस रोज उन्होंने शाहाबाद के लोगों के लिए अपने आवास पर भोज आयोजित किया था। उसी दिन सभी नवनिर्वाचित विधायकों को भी बुलाया गया था। हमने उनके सामने अपनी नाराजगी जाहिर की। बताया कि उन्होंने जो किया है, सही नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मैं ज्यादा बोल रहा हूं।’ तब बात इतनी बिगड़ी कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन 5 दिसंबर को मैं शामिल नहीं हो पाया। 4 दिसंबर के बाद हमारी बातचीत बंद हो गई है। सवाल- उपेंद्र कुशवाहा अगर कार्रवाई करेंगे तो आप क्या करेंगे? जवाब- उनकी कार्रवाई से पहले विधायकी पद से इस्तीफा दे दूंगा। अगर बात नहीं बनी तो राजनीति छोड़ दूंगा। लालच की राजनीति नहीं करता हूं। नीतीश कुमार को पिता तुल्य मानता हूं। उन्होंने मुझे बहुत स्नेह दिया है। संगठन सचिव, MLC बनाया। मैंने जो काम कहा वो कराया। सीतामढ़ी-नेपाल सड़क मेरे निवेदन पर बनवाया। वह मुझ पर इतना ट्रस्ट करते थे। इन्होंने (उपेंद्र कुशवाहा) मुझे बहला-फुसलाकर उनका साथ छुड़वाया। अब अपने परिवार का भविष्य सेट कर लिया। मेरे भविष्य का क्या होगा? कार्यकर्ता जो इनकी दरी उठाते हैं, उनके भविष्य का क्या होगा? सवाल- क्या आपके साथ दोनों नाराज विधायक भी उनका साथ छोड़ देंगे? जवाब- इसकी जानकारी फिलहाल मुझे नहीं है। कुशवाहा के लिट्टी-मटन पार्टी के बाद हमलोग एक बार मिले थे। इसके बाद हमारी बातचीत नहीं हुई। मैंने अपना रुख स्पष्ट कर दिया था कि उपेंद्र कुशवाहा के साथ नहीं रहना है। मेरा गुजारा उनके साथ नहीं हो सकता। सवाल- आपलोग किसी पार्टी में जाएंगे या अपना अलग धड़ा बनाएंगे? जवाब- कुछ भी हो सकता है, लेकिन अभी तय नहीं है। बहुत जल्द इस पर बात कर आगे की रणनीति तय करेंगे। एक रास्ता तो लेना ही पड़ेगा। अकेले होने के बाद भी मुझे डर नहीं है। मैं कार्रवाई से पहले उनका साथ छोड़ दूंगा। मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा, लेकिन ऐसे व्यक्ति के साथ नहीं जाऊंगा जो कहे कुछ और करे कुछ। आपके घर में मटन और लिट्टी का भोज हो और कार्यकर्ता के घर में चूल्हा भी न जले तो ऐसी राजनीति किस काम की। लिट्टी पार्टी से भी दूर रहे थे उनके विधायक दरअसल, लोकसभा का शीतकालीन सत्र समाप्त होने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने पटना में अपने आवास पर बुधवार शाम को लिट्टी-पार्टी का आयोजन किया था। पार्टी में उन्होंने अपने तीनों विधायकों को भी आमंत्रित किया। सभी विधायक पटना में थे, लेकिन पार्टी शुरू होने के चंद घंटे पहले विधायक माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह दिल्ली निकल गए। दिल्ली जाने से पहले इन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से उनके आवास पर मुलाकात की। इसके बाद से ही बगावत की चर्चा तेज हो गई है। कुशवाहा की पार्टी में बगावत की वजह समझिए दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा ने चुनाव बाद आखिरी समय में मास्टर स्ट्रोक चला था। उन्होंने अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री पद की शपथ दिला दी। दीपक किसी सदन के सदस्य नहीं थे। उपेंद्र कुशवाहा पहले से राज्यसभा सांसद हैं। राजनीति से दूर रहने वाली पत्नी को इस बार सासाराम से विधायक बनवा दिया। यही कारण है कि पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है। ये तय माना जा रहा था कि उनके सबसे लंबे समय तक सहयोगी रहे माधव आनंद को मंत्री बनाया जा सकता है। उन्हें मंत्री की जगह विधायक दल का नेता बनाया गया।


