पुराने वाहनों पर अब एजेंसियों से ही लगेंगी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट

विक्की कुमार | अमृतसर पंजाब सरकार द्वारा वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (एचएसआरपी) को अनिवार्य किए जाने के बाद अब पुराने वाहन चालकों के लिए नियम और सख्त हो गए हैं। सरकार की ओर से पहले इसके लिए नवंबर माह के अंत तक की समय-सीमा तय की गई थी, जिसे बाद में दो महीने बढ़ाकर 8 जनवरी अंतिम तारीख घोषित की गई थी। इसी बीच पुराने वाहनों पर नंबर प्लेट लगाने वाली निजी कंपनी का टेंडर सरकार के साथ समाप्त हो चुका है। जानकारी के अनुसार अब पुराने वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने की पूरी जिम्मेदारी सीधे ऑटोमोबाइल एजेंसियों को सौंप दी गई है। ऐसे में यदि किसी वाहन मालिक को अपने पुराने वाहन पर एचएसआरपी लगवानी है, तो उसे संबंधित एजेंसी के माध्यम से ही यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके लिए आवेदन ऑनलाइन किया जाएगा और सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद नंबर प्लेट एजेंसी में ही लगाई जाएगी। ऑनलाइन आवेदन के दौरान वाहन मालिकों से कई दस्तावेज मांगे जाएंगे, जिनमें यह भी शामिल होगा कि वाहन किस एजेंसी से खरीदा गया था। सभी दस्तावेज जमा करवाने के बाद ही एजेंसी में नंबर प्लेट फिट करवाई जा सकेगी। पहले यह कार्य सरकार द्वारा अधिकृत निजी कंपनियों के माध्यम से किया जा रहा था। एफटीए कंपनी अमृतसर के इंचार्ज भगेल सिंह का कहना है कि यह आदेश 8 जनवरी को उनके पास आया था। एग्रो कंपनी की तरफ से अपना काम बंद कर दिया गया है। क्योंकि कंपनी का सरकार के साथ टेंडर खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि अब एजेंसियों से ही नंबर प्लेट लगेगी। लेकिन इसके लिए अप्लाई अॉनलाइन ही होगा। उन्होंने कहा कि कंपनी ने अपने कर्मचारियों को भी नौकरी से घर भेज दिया है। अब सिर्फ एफटीए कंपनी ही काम कर रही है। कंपनी का दफ्तर न्यू अमृतसर है और वह नंबर प्लेट प्रिंट करके एजेंसियो को ही सप्लाई करेगी। बताया जा रहा है कि वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने के लिए सरकार ने पहले एग्रो और एफटीए कंपनी के साथ अनुबंध किया था। अब एग्रो कंपनी का टेंडर समाप्त हो चुका है, जबकि एफटीए कंपनी अभी भी काम कर रही है। एफटीए एक सरकारी फर्म है, जिसका न्यू अमृतसर में सेंटर स्थापित है। वहीं पर नंबर प्लेट तैयार कर एजेंसियों को सप्लाई की जा रही है। सरकार के इस फैसले से पुराने वाहन चालकों की परेशानी बढ़ सकती है। खासकर उन लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, जिनके पास वाहन खरीद से संबंधित एजेंसी के पुराने बिल या अन्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। वाहन मालिकों का कहना है कि नियमों में अचानक बदलाव से उन्हें बेवजह दौड़भाग करनी पड़ रही है।

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