सिथौली-बिरलानगर के बीच अब एक ही ट्रैक पर एक साथ दौड़ सकेंगी 4 से 5 ट्रेनें, यात्रियों के समय की होगी बचत

सिथौली-बिरलानगर के बीच अब एक ही ट्रैक पर एक साथ दौड़ सकेंगी 4 से 5 ट्रेनें, यात्रियों के समय की होगी बचत

– हाई-टेक हुई ग्वालियर की रेल लाइन, साढ़े 11 किमी खंड पर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली शुरू

– ट्रेनों की लेटलतीफी पर लगेगा ब्रेक, यात्रियों का सफर होगा सुपरफास्ट

ग्वालियर. झांसी-ग्वालियर-दिल्ली रेलखंड पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने और आउटर पर लगने वाले अकारण हॉल्ट को खत्म करने के लिए रेलवे ने सिथौली-ग्वालियर-बिरलानगर के बीच ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली को हरी झंडी दे दी है। साढ़े 11 किलोमीटर लंबे इस व्यस्त रेलखंड पर नई तकनीक लागू होने से ट्रेनों का संचालन पहले की तुलना में अधिक तेज, सटीक और सुरक्षित हो जाएगा। अब यात्रियों, खासकर नौकरीपेशा और लंबी दूरी का सफर करने वालों को सिग्नल के इंतजार में घंटों खड़ा नहीं रहना पड़ेगा। इस रूट पर रोजाना डेढ़ सौ के लगभग यात्री ट्रेनें और 180 के लगभग मालगाड़ी गुजरती हैं। इस व्यवस्था से सभी ट्रेनों की रफ्तार पर असर पड़ेगा।

अभी तक की व्यवस्था में ग्वालियर से बिरलानगर तक के बीच एक ही ट्रेन को प्रवेश दिया जाता था। जब तक वह स्टेशन खाली नहीं होता, दूसरी ट्रेन को पीछे ही रोक दिया जाता था। लेकिन नई ऑटोमैटिक सिग्नलिंग में हर 1 से 1.5 किलोमीटर पर सिग्नल लगाए गए हैं। अब एक ही ट्रैक पर एक के पीछे एक 4 से 5 ट्रेनें एक साथ चल सकेंगी। इससे ट्रेनों को बार-बार रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी और यात्रा के समय में खासी कमी आएगी।देलेवाड़ा से मुरैना तक का 218 किमी खंड हुआ हाई-टेक

प्रोजेक्ट यूनिट झांसी द्वारा की गई इस सफल कमीशनिंग के साथ ही देलवाड़ा से मुरैना तक का 218 किलोमीटर का लंबा रेल खंड अब पूरी तरह से ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली में तब्दील हो चुका है। इससे उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाला यह मुख्य कॉरिडोर अब बिना किसी बाधा के ट्रेनों की आवाजाही के लिए तैयार है।

आगामी लक्ष्य: फरवरी और मार्च में पूरी होगी अगली कड़ी

1. फरवरी 2026: मुरैना-सिकरोदा-हेतमपुर सेक्शन को ऑटोमैटिक प्रणाली से जोड़ दिया जाएगा।2. मार्च 2026: दैलवाड़ा-ललितपुर-जीरोन सेक्शन (ललितपुर यार्ड रीमॉडलिंग सहित) का कार्य पूर्ण करने की योजना है।मानवीय चूक की गुंजाइश खत्म हो जाएगी

सिथौली, ग्वालियर और बिरलानगर स्टेशनों पर केवल सिग्नल ही नहीं बदले गए हैं, बल्कि पूरी इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली को अपग्रेड किया गया है। इस खंड में 49 अत्याधुनिक ट्रैक डिटेक्शन उपकरण लगाए गए हैं। ये सेंसर कंट्रोल रूम को ट्रेनों की सटीक स्थिति की जानकारी पल-पल देते रहेंगे, जिससे मानवीय चूक की गुंजाइश खत्म हो जाएगी और सिग्नल संचालन अधिक तेज़ होगा।इनका कहना है

सिथौली- ग्वालियर और बिरला नगर खंड में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली शुरू होने से यात्रियों को काफी फायदा मिलेगा। वहीं ट्रेनों का संचालन भी तेजी से होगा। यह काम काफी समय से चल रहा था। इसे पूरा कर लिया गया है।

मनोज कुमार सिंह, पीआरओ झांसी मंडल

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