उमरिया जिले के चंदिया स्थित मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन (MPWLC) के बेसहनी ओपन कैप वेयरहाउस में धान के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। बारिश में भीगी हुई धान को आनन-फानन में स्टैक में रखवाकर ढक दिया गया है, जिससे यह आशंका और बढ़ गई है। इसको लेकर सोमवार को खाद्य अधिकारी ने ट्रांसपोर्टर को नोटिस जारी किया है। यह स्थिति 27 जनवरी को हुई तेज बारिश के कारण उत्पन्न हुई। उस समय ट्रक चालकों की हड़ताल के चलते 27 से 29 जनवरी तक ट्रक खड़े थे। कई ट्रकों में लदी धान को ढकने की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण धान की बोरियां भीग गईं। बारिश के बाद दो दिनों तक धूप कम निकलने से ट्रकों में रखी धान सूख नहीं पाई। स्थिति बिगड़ने पर 29 जनवरी की शाम को ट्रकों से धान अनलोड कर उसे स्टैक में रखवाकर ढक दिया गया। पहले से गीली धान को इस तरह रखने से उसके खराब होने की आशंका बढ़ गई है। वेयरहाउस परिसर में 80 से अधिक ट्रक खड़े थे, जिनमें से 30 से अधिक ट्रकों में धान या तो ढकी नहीं थी या ढकने की व्यवस्था अपर्याप्त थी। ट्रांसपोर्टर को नोटिस जारी प्रभारी खाद्य अधिकारी रोहित सिंह ने सोमवार को बताया कि इस लापरवाही के संबंध में ट्रांसपोर्टर को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धान उतारने और रखवाने की जिम्मेदारी MPWLC की होती है। 40 बोरी धान गीला वेयरहाउस के सर्वेयर किशन विश्वकर्मा ने बताया कि 40 बोरी गीली धान को वापस खरीदी केंद्र भेज दिया गया है। धान उपार्जन के दस दिन बाद भी लगभग 5000 मैट्रिक टन धान का परिवहन होना शेष है। अभी किसानों का लगभग 50 करोड़ रुपए का भुगतान रुका हुआ है। जिले की 33 समितियों के माध्यम से धान का उपार्जन किया गया था, लेकिन कई केंद्रों से अब तक धान का परिवहन नहीं हो सका है। परिवहन में देरी के कारण किसानों के खातों में धान की राशि नहीं पहुंच पाई है, जिससे उनमें नाराजगी बढ़ रही है। तीन साल हो चुका है हजारों क्विंटल धान खराब उल्लेखनीय है कि चंदिया कैप वेयरहाउस में लगभग तीन वर्ष पूर्व भी 6000 क्विंटल धान खराब हो चुकी है। उस मामले में अब तक जिम्मेदारी तय नहीं हो सकी है और खराब धान आज भी वेयरहाउस में रखी हुई है।


