15 साल पुरानी आधा दर्जन से अधिक बसों को नोटिस

15 साल पुरानी आधा दर्जन से अधिक बसों को नोटिस

टीकमगढ़ परिवहन विभाग द्वारा 15 वर्ष से अधिक पुरानी आधा दर्जन से अधिक यात्री बसों को संचालन से हटाने के लिए नोटिस जारी किए जाने के बावजूद बस संचालकों पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। विभागीय आदेशों की खुलेआम अनदेखी करते हुए ये जर्जर बसें आज भी ग्रामीण क्षेत्रों की सडक़ों पर फ र्राटा भर रही है।

जिले में परिवहन अधिकारी महीने में एकाध बार ही कार्यालय पहुंचते है। जिले का प्रभार सागर के आरटीओ के पास होने के कारण नियमित निगरानी नहीं हो पा रही है। जिसका सीधा फायदा बस संचालक उठा रहे है और मनमाने ढंग से खटारा बसों का संचालन जारी है।

शासन के नियमों अनुसार 15 वर्ष से अधिक पुरानी व्यावसायिक बसों को सरेंडर कराना अनिवार्य है, क्योंकि ऐसी बसें न केवल प्रदूषण फैला रही है, बल्कि यात्रियों की जान के लिए भी गंभीर खतरा बनी हुई है। इसके बावजूद अब तक न तो बसें सरेंडर कराई गईं और न ही विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई की गई है।

ग्रामीण रूटों पर अधिक खतरा

सबसे अधिक जर्जर बसें ग्रामीण रूटों पर संचालित हो रही है। इनमें टीकमगढ़ से दिगौड़ा, लिधौरा, लिधौरा से जतारा, चंदेरा, जतारा से पलेरा, खरगापुर, बल्देवगढ़ से बुडेरा होते हुए बड़ागांव धसान, गोर, मोहनगढ़ और जेरोन तक के मार्ग शामिल है। इन मार्गों पर रोजाना सैकड़ों यात्री जान जोखिम में डालकर सफ र करने को मजबूर है।

शासन का आदेश बेअसर

जिले के बस स्टैंड से ग्रामीण क्षेत्रों और अन्य जिलों के लिए प्रतिदिन 205 से अधिक यात्री बसें संचालित हो रही है। शासन द्वारा 15 साल पुरानी बसों को अमान्य घोषित किया जा चुका है। कई बसों के पास फि टनेस प्रमाण पत्र, वैध दस्तावेज और प्रशिक्षित चालक तक नहीं है, इसके बावजूद संचालन धड़ल्ले से जारी है।

50 फीसदी बसों में नहीं पैनिक बटन

जिले से अन्य महानगरों के लिए संचालित बसों में से करीब 50 फीसदी बसों में पैनिक बटन और ट्रैकिंग सिस्टम या तो लगे ही नहीं है या चालू हालत में नहीं है। कई चालकों को इन उपकरणों की जानकारी तक नहीं है। जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे है।

शासन के निर्देश पर15 साल से अधिक पुरानी यात्री बसों को सडक़ों पर चलने की अनुमति नहीं है। ऐसी बसों को नोटिस जारी किए गए है। यदि ये बसें सडक़ों पर चलती पाई जाती

मनोज कुमार, आरटीओ टीकमगढ़।

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