गोरखपुर में एलपीजी गैस सिलेंडर को लेकर होटल, रेस्टोरेंट, ढ़ाबा और कैफे संचालकों की दिक्कत बढ़ती जा रही है। सिलेंडर न मिलने की वजह से शहर के तमाम छोटे रेस्टोरेंट और कैफे बंद हो चुके हैं। वहीं बड़े होटल रेस्टोरेंट संचालकों ने मैन्यू में आइटम लिमिटेड कर दिए हैं। इसके अलावा पहले से मिली बुकिंग्स ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। आलम यह है कि कुछ संचालकों को ग्राहकों से लिमिटेड आइटम ऑर्डर करने के लिए रेस्टोरेंट के बाहर नोटिस लगानी पड़ी है। ज्यादा गैस इस्तेमाल होने वाले सभी आइटम्स को फिलहाल के लिए मैन्यू से हटा दिया गया। सिलेंडर के लिए ओनर तमाम कोशिशों में लगे हैं। किसी को बिल्कुल ही नहीं मिल पा रहा है तो किसी के पास दो- तीन के बजाय मुश्किल से एक ही सिलेंडर उपलब्ध हो पा रहा है। वह भी कब तक मिलेगा इसकी कोई गारंटी नहीं है। गैस को बचाने के लिए जितना हो सकता है उतनी आइटम्स को इंडक्शन चूल्हे या इलेक्ट्रिक फ्रायर जैसे संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मालिकों का कहना है कि अगर ऐसे ही चलता रहा तो पारंपरिक तरीका अपनाना पड़ेगा। बिजनेस चलाने के लिए लकड़ी और कोयले पर खाना पकाना पड़ेगा। इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है। इंडक्शन का इस्तेमाल कर काम चला रहे
शहर के गोलघर स्थित बोबिज रेस्टोरेंट के ओनर अतुल मल्होत्रा ने बताया- कॉमर्शियल गैस की दिक्कत ने चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल वेंडर सप्लाई दे रहे हैं लेकिन बिल्कुल लिमिट में। हमारा रेगुलर कंजंप्शन 2- 3 सिलेंडर का है, लेकिन सिर्फ एक ही सिलेंडर उपलब्ध हो पा रहा है। जिससे काफी दिक्कत हो रही है। हालांकि अभी इंडक्शन का इस्तेमाल करके हमारा काम चल रहा है लेकिन आगे दिक्कत बढ़ सकती है। अगर ऐसे ही चलता रहा तो लकड़ी और कोयले पर खाना बनाना पड़ेगा। किसी एजेंसी से नहीं मिल रहा सिलेंडर
वहीं करी ऑन रेस्टोरेंट के मैनेजर मयंक श्रीवास्तव ने बताया- हमने मैन्यू के आइटम्स को लिमिटेड कर दिया है। स्टार्टर्स में जिनमें गैस का ज्यादा इस्तेमाल होता है उन आइटम्स को फिलहाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। अभी तंदूरी और मेनकोर्स पर ही फोकस किया जा रहा है। कस्टमर्स को अवेयर करने के लिए नोटिस भी लगा दिया गया है। ताकि वे कोऑपरेट करते रहें। यह हालत शहर के सभी होटल और रेस्टोरेंट्स की है। अब सिर्फ लोकल एडमिनिस्ट्रेशन से ही मदद की उम्मीद बची है। सबसे ज्यादा टेंशन बुकिंग्स की हो रही है। अभी 14 और 15 मार्च को हमारे पास बहुत सी बुकिंग्स हैं। ऐसा लगता है कि उसे कैंसल करना पड़ेगा। हम लगातार प्रयास में लगे हैं लेकिन किसी भी एजेंसी से सिलेंडर नहीं मिल रहा है। कुकिंग के लिए लकड़ी कोयले का कर रहे इस्तेमाल
रंगरेजा रेस्टोरेंट की ओनर सुप्रिया द्विवेदी ने बताया कि फिलहाल उनके स्टॉक में दो से तीन दिन का बैकअप है। उसके बाद क्या होगा कुछ कहा नहीं जा सकता है। जो सिलेंडर हैं उन्हें आने वाले 14-16 मार्च के बुकिंग के लिए बचा कर रखा गया है। किसी तरह वे कम्प्लीट कर सके। किसी ने शादी तो कोई इंगेजमेंट और रिसेपशन के लिए महीनों पहले बुकिंग दे रखी है। जिसे कैंसल नहीं किया जा सकता है। गैस की बचत के लिए ज्यादा खाना पकाने वाली आइटम को तंदूरी चूल्हे पर पकाया जा रहा है। उसी में किसी तरह लकड़ी और कोयला लगा कर काम चल रहा है। आगे ऐसे ही चलता रहा तो या तो मेन्यू आधा करना पड़ेगा या फिर रेस्टोरेंट बंद करना पड़ेगा।


