पूर्व गृह सचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री राज कुमार सिंह ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए केजरीवाल प्रकरण को लेकर बयान दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर कहा कि सीबीआई की ओर से दायर आपराधिक मामले में अदालत ने केजरीवाल और अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त किया गया। ये इस बात का संकेत है कि मामले में मुकदमा चलाने लायक पर्याप्त और स्वीकार्य साक्ष्य मौजूद नहीं थे। राज कुमार सिंह ने इसे झूठे और दुर्भावनापूर्ण अभियोजन का उदाहरण बताया और कहा कि इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आरोप तय करने और ट्रायल शुरू करने के लिए आवश्यक साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे। साथ ही अदालत ने संबंधित जांच अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्देश भी दिया है। राज कुमार सिंह के अनुसार, केवल विभागीय कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि यदि मामला वास्तव में झूठे अभियोजन का है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई भी की जानी चाहिए। झूठा आरोप लगाने पर 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान
अपने पोस्ट में उन्होंने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और वर्तमान में लागू भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) का उल्लेख करते हुए कहा कि झूठा आरोप लगाना स्वयं में दंडनीय अपराध है। उन्होंने विशेष रूप से बीएनएस की धारा 248 का हवाला देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति पर झूठा आरोप लगाने पर 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। उनका तर्क है कि यदि किसी नागरिक के विरुद्ध बिना पर्याप्त साक्ष्य के मामला दर्ज किया गया और अदालत ने उसे निराधार पाया, तो जिम्मेदार अधिकारियों को कानून के तहत जवाबदेह बनाना जाना चाहिए।
केजरीवाल शिकायत दर्ज कर सकते हैं राज कुमार सिंह ने यह भी सुझाव दिया कि केजरीवाल और उनके सहयोगी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत में संबंधित धाराओं के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिला न्यायाधीश का आदेश इस संदर्भ में महत्वपूर्ण दस्तावेज हो सकता है। उनके अनुसार, ऐसी कार्रवाई भविष्य में किसी भी जांच अधिकारी को राजनीतिक दबाव में आकर झूठा मुकदमा दर्ज करने से रोकेगी।
मुकदमों की प्रवृत्ति दलों के लिए घातक साबित हो सकती है आरके सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता स्थायी नहीं होती और आज जो दल सत्ता में है, वह भविष्य में विपक्ष में भी बैठ सकता है। ऐसे में यदि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के विरुद्ध झूठे मुकदमों की प्रवृत्ति जारी रही तो यह परंपरा सभी दलों के लिए घातक साबित हो सकती है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर नागरिक अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए आवाज उठाने की अपील की। राज कुमार सिंह की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। पूर्व गृह सचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री राज कुमार सिंह ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए केजरीवाल प्रकरण को लेकर बयान दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर कहा कि सीबीआई की ओर से दायर आपराधिक मामले में अदालत ने केजरीवाल और अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त किया गया। ये इस बात का संकेत है कि मामले में मुकदमा चलाने लायक पर्याप्त और स्वीकार्य साक्ष्य मौजूद नहीं थे। राज कुमार सिंह ने इसे झूठे और दुर्भावनापूर्ण अभियोजन का उदाहरण बताया और कहा कि इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आरोप तय करने और ट्रायल शुरू करने के लिए आवश्यक साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे। साथ ही अदालत ने संबंधित जांच अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्देश भी दिया है। राज कुमार सिंह के अनुसार, केवल विभागीय कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि यदि मामला वास्तव में झूठे अभियोजन का है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई भी की जानी चाहिए। झूठा आरोप लगाने पर 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान
अपने पोस्ट में उन्होंने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और वर्तमान में लागू भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) का उल्लेख करते हुए कहा कि झूठा आरोप लगाना स्वयं में दंडनीय अपराध है। उन्होंने विशेष रूप से बीएनएस की धारा 248 का हवाला देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति पर झूठा आरोप लगाने पर 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। उनका तर्क है कि यदि किसी नागरिक के विरुद्ध बिना पर्याप्त साक्ष्य के मामला दर्ज किया गया और अदालत ने उसे निराधार पाया, तो जिम्मेदार अधिकारियों को कानून के तहत जवाबदेह बनाना जाना चाहिए।
केजरीवाल शिकायत दर्ज कर सकते हैं राज कुमार सिंह ने यह भी सुझाव दिया कि केजरीवाल और उनके सहयोगी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत में संबंधित धाराओं के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिला न्यायाधीश का आदेश इस संदर्भ में महत्वपूर्ण दस्तावेज हो सकता है। उनके अनुसार, ऐसी कार्रवाई भविष्य में किसी भी जांच अधिकारी को राजनीतिक दबाव में आकर झूठा मुकदमा दर्ज करने से रोकेगी।
मुकदमों की प्रवृत्ति दलों के लिए घातक साबित हो सकती है आरके सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता स्थायी नहीं होती और आज जो दल सत्ता में है, वह भविष्य में विपक्ष में भी बैठ सकता है। ऐसे में यदि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के विरुद्ध झूठे मुकदमों की प्रवृत्ति जारी रही तो यह परंपरा सभी दलों के लिए घातक साबित हो सकती है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर नागरिक अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए आवाज उठाने की अपील की। राज कुमार सिंह की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।


