मुजफ्फरपुर जिले में न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने और गवाही से बचने वाले पुलिसकर्मियों पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने दो अलग-अलग आपराधिक मामलों में तत्कालीन डीएसपी समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है। यह कार्रवाई बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद कोर्ट में पेश नहीं होने पर की गई है। पहला मामला कुढ़नी थाना क्षेत्र से जुड़ा है। साल 2021 में पुलिस ने रौशन कुमार को लोडेड कट्टा, जिंदा कारतूस और स्मैक के साथ गिरफ्तार किया था। इस मामले की सुनवाई विशेष एनडीपीएस कोर्ट-2 में चल रही है।
केस में महत्वपूर्ण गवाह, जिनमें तत्कालीन लाइन डीएसपी विपिन नारायण शर्मा भी शामिल हैं। लंबे समय से गवाही देने नहीं पहुंच रहे हैं। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए डीएसपी विपिन नारायण शर्मा, अनुसंधान अधिकारी (आईओ) विवेकानंद सिंह, जमादार प्रकाश कुमार, होमगार्ड जवान कुमोद कुमार और दिनेश चौधरी समेत छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गवाहों की गैरमौजूदगी के कारण मामले का निष्पादन रुका हुआ है।
एनडीपीएस और आर्म्स एक्ट के तहत हुई थी गिरफ्तारी दूसरा मामला सदर थाना क्षेत्र का है, जो 3 अगस्त 2020 को दर्ज हुआ था। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि खबड़ा भेल कॉलोनी में किराए के मकान में एटीएम फ्रॉड गिरोह के सदस्य छिपे है। छापेमारी के दौरान पुलिस ने मादक पदार्थों और अन्य आपत्तिजनक सामान के साथ आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इस केस में भी गवाही की प्रक्रिया पुलिसकर्मियों की सुस्ती के कारण बाधित हो रही है। विशेष अदालत ने इस मामले में केस दर्ज कराने वाले तत्कालीन दरोगा और आईओ समेत छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। तत्कालीन दरोगा रघुवीर सिंह, आईओ राजेश यादव, सिपाही छोटे लाल सिंह, संजीव कुमार, होमगार्ड अरविंद कुमार और धनिक कुमार राणा के खिलाफ वारंट जारी किया गया है। न्यायिक प्रक्रिया में देरी पर कोर्ट सख्त इन दोनों मामलों में अदालतों ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों का कोर्ट में पेश न होना न्याय व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है। जब रक्षक ही गवाही देने से बचेंगे, तो अपराधियों को सजा दिलाना नामुमकिन होगा। कोर्ट ने जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन वारंटों का तामिला सुनिश्चित कराया जाए और संबंधित पुलिसकर्मियों को कोर्ट में पेश किया जाए। मुजफ्फरपुर जिले में न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने और गवाही से बचने वाले पुलिसकर्मियों पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने दो अलग-अलग आपराधिक मामलों में तत्कालीन डीएसपी समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है। यह कार्रवाई बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद कोर्ट में पेश नहीं होने पर की गई है। पहला मामला कुढ़नी थाना क्षेत्र से जुड़ा है। साल 2021 में पुलिस ने रौशन कुमार को लोडेड कट्टा, जिंदा कारतूस और स्मैक के साथ गिरफ्तार किया था। इस मामले की सुनवाई विशेष एनडीपीएस कोर्ट-2 में चल रही है।
केस में महत्वपूर्ण गवाह, जिनमें तत्कालीन लाइन डीएसपी विपिन नारायण शर्मा भी शामिल हैं। लंबे समय से गवाही देने नहीं पहुंच रहे हैं। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए डीएसपी विपिन नारायण शर्मा, अनुसंधान अधिकारी (आईओ) विवेकानंद सिंह, जमादार प्रकाश कुमार, होमगार्ड जवान कुमोद कुमार और दिनेश चौधरी समेत छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गवाहों की गैरमौजूदगी के कारण मामले का निष्पादन रुका हुआ है।
एनडीपीएस और आर्म्स एक्ट के तहत हुई थी गिरफ्तारी दूसरा मामला सदर थाना क्षेत्र का है, जो 3 अगस्त 2020 को दर्ज हुआ था। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि खबड़ा भेल कॉलोनी में किराए के मकान में एटीएम फ्रॉड गिरोह के सदस्य छिपे है। छापेमारी के दौरान पुलिस ने मादक पदार्थों और अन्य आपत्तिजनक सामान के साथ आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इस केस में भी गवाही की प्रक्रिया पुलिसकर्मियों की सुस्ती के कारण बाधित हो रही है। विशेष अदालत ने इस मामले में केस दर्ज कराने वाले तत्कालीन दरोगा और आईओ समेत छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। तत्कालीन दरोगा रघुवीर सिंह, आईओ राजेश यादव, सिपाही छोटे लाल सिंह, संजीव कुमार, होमगार्ड अरविंद कुमार और धनिक कुमार राणा के खिलाफ वारंट जारी किया गया है। न्यायिक प्रक्रिया में देरी पर कोर्ट सख्त इन दोनों मामलों में अदालतों ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों का कोर्ट में पेश न होना न्याय व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है। जब रक्षक ही गवाही देने से बचेंगे, तो अपराधियों को सजा दिलाना नामुमकिन होगा। कोर्ट ने जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन वारंटों का तामिला सुनिश्चित कराया जाए और संबंधित पुलिसकर्मियों को कोर्ट में पेश किया जाए।


