Nokia की भारत में धांसू वापसी! Chennai में खुला दुनिया का सबसे बड़ा R&D सेंटर, 100G Network पर होगा काम

Nokia की भारत में धांसू वापसी! Chennai में खुला दुनिया का सबसे बड़ा R&D सेंटर, 100G Network पर होगा काम
एक समय नोकिया कंपनी का बोलबाला था, लेकिन अब नोकिया का नाम कहीं भी नहीं दिखता है। आपको बताते चलें कि, तमिलनाडु सरकार और नोकिया के बीच अगस्त 2024 में हुए एमओयू (Memorandum of Understanding) के बाद अब इसका असर दिखने लगा है। SIPCOT (सिपकोट) सिरुसेरी, चेन्नई में शुरु हुई ये नई सुविधा फिक्स्ड नेटवर्क टेक्नोलॉजी पर केंद्रित दुनिया की सबसे बड़ी आरएंडडी (रिसर्च एंड डेवलेपमेंट) लैब मानी जा रही है।
निवेश में बढ़ोतरी क्या संकेत देती है?
आपको बता दें कि, नोकिया ने अपने पहले स्टेप के निवेश को 220 करोड़ से बढ़ाकर 270 करोड़ कर दिया है। इतना ही नहीं, दूसरे चरण में कंपनी 300 करोड़ और निवेश करने की उम्मीद है। ये साफ संकेत है कि नोकिया भारत, खासकर तमिलनाडु को लंबे समय के टेक हब के तौर पर देख रही है। 
किन टेक्नोलॉजी पर होगा काम?
यह रिसर्च एंड डेवलेपमेंट सुविधा भविष्य की हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड जरुरतों को ध्यान देकर बनाई गई।  यहां प्रमुख रुप से 10G, 25G, 50G और 100G ऑप्टिकल नेटवर्क, फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) और अगली पीढ़ी की फिक्स्ड नेटवर्क ब्रॉडबैंड टेक्नोलॉजी लाने काम होगा। बता दें कि, ये सेंटर एक ग्लोबल टेस्ट बेड की तरह काम करेगा,जहां नई टेक्नोलॉजी को डेवलप और टेस्ट किया जाएगा।
रोजगार और स्किल डेवलपमेंट का फायदा
इस नई रिसर्च एंड डेवलेपमेंट सुविधा से करीब 200 से ज्यादा हाई-एंड टेक जॉब्स आई हैं। इसके साथ ही एडवांस नेटवर्किंग, डीप-टेक और इंजीनियरिंग स्किल्स को बढ़ावा मिलने की उम्मीद भी है। ऐसे में चेन्नई की पहचान केवल IT ही नहीं, बल्कि टेलीकॉम इनोवेशन हब के रुप में भी मजबूत होगी। 
सरकार का क्या कहना है?
उद्योग मंत्री टीआरबी राजा के मुताबिक, ये निवेश मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की अमेरिका यात्रा के दौरान किए वादों के कारण है। वहीं, यह कदम तमिलनाडु को ग्लोबल डीप-टेक और इंजीनियरिंग कंपनियों की पसंदीदा डेस्टिनेशन बनाने की दिशा प्रमुख मानी जा रही है।
भारत के लिए यह कदम जरुरी माना जा रहा है
टेलीकॉम एक्सपर्ट जानते हैं कि नोकिया की यह रिसर्च एंड डेवलेपमेंट लैब भारत की ग्लोबल टेलीकॉम वैल्यू चेन में अपनी भूमिका स्ट्रांग कर रही है। इसके साथ ही भविष्य के ब्रॉडबैंड और 5G/6G बैकबोन नेटवर्क के विकास में सहायक होगा। 

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