इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली दंगे में शामिल चार आरोपियों को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी याचिकाएं खारिज कर दी हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर एवं न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने आशू, अज़मल राफी, नईम कुरैशी और मो साजिद की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया है। याचिकाओं में प्राथमिकी रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की गई थी। तौकीर रज़ा के ऐलान पर हुआ था दंगा
मामला 26 सितंबर 2025 का है। मौलाना तौकीर रज़ा के आह्वान पर काफी लोग युवाओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज़ करने के विरोध प्रदर्शन के लिए एकत्र हुए थे। भीड़ में मौजूद कुछ लोग सर तन से जुड़ा का नारा लगाने लगे। पुलिस के मना करने पर भीड़ उत्तेजित हो गई और पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। ईट, पत्थर और लाठी डंडों से पुलिस पर हमला हुआ तथा पेट्रोल बम फेंके एवं फायरिंग भी की गई। घटना को लेकर बारादरी थाने के एसएचओ धनंजय पांडेय ने 28 नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज़ किया है। आरोपियों ने कहा-घटना में शामिल नहीं थे
याचियों का कहना था कि वे घटना में शामिल नहीं थे। उन्हें रंजिश कारण मुकदमे में झूठा फंसाया गया है। कुछ याचियों का कहना था कि वे घटना के समय किसी अन्य स्थान पर थे। भीड़ में किसी की शिनाख्त नहीं हो सकी है। पुलिस ने मनमाने तरीके से याचियों को मुकदमे में फंसा दिया। याचिका का विरोध करते हुए अपर शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि घटना काफी गंभीर है। आरोपियों ने पुलिस पर जानलेवा हमला किया। देश विरोधी नारे लगाए और कानून व्यवस्था को पूरी तरह छिन्न भिन्न कर दिया। कोर्ट ने घटना की गंभीरता को देखते हुए चारों आरोपियों की याचिकाएं खारिज़ कर दीं।


