दरभंगा के केवटी प्रखंड प्रमुख जीवछी देवी के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर आज विशेष बैठक बुलाई गई है। ये कोरम के अभाव में निष्प्रभावी साबित हो गई। निर्धारित समय पर पर्याप्त जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के कारण न तो प्रस्ताव पर चर्चा हो सकी और न ही मतदान की प्रक्रिया पूरी हो पाई। इस घटनाक्रम के साथ ही फिलहाल प्रमुख जीवछी देवी की कुर्सी सुरक्षित हो गई है। प्रखंड मुख्यालय स्थित सभागार में बैठक आयोजित की गई थी। बैठक की तैयारी पूरी थी और प्रखंड विकास पदाधिकारी अपने कर्मियों के साथ समय पर मौजूद थे। लेकिन 36 सदस्यीय पंचायत समिति में अपेक्षित संख्या में सदस्य उपस्थित नहीं हो सके। लेकिन केवल दो सदस्य—सहाना खातून और पैगंबरपुर पंचायत के पंचायत समिति सदस्य पीतांबर यादव—ही बैठक में पहुंचे, जिससे कोरम पूरा नहीं हो पाया। बैठक की अध्यक्षता पीतांबर यादव ने की नियमों के तहत निर्धारित समय तक प्रतीक्षा के बाद भी जब पर्याप्त सदस्य नहीं पहुंचे, तो औपचारिक प्रक्रिया के तहतबाद मे बैठक की कार्रवाई शुरू की गई। बैठक की अध्यक्षता पीतांबर यादव ने की। इस दौरान जिला पदाधिकारी के निर्देश पर दरभंगा सदर के भूमि सुधार उपसमाहर्ता संजीत कुमार प्रेक्षक के रूप में मौजूद रहे, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमानुसार संपन्न हो सके। प्रेक्षक संजीत कुमार ने आवश्यक कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद स्पष्ट किया कि सदन में न्यूनतम उपस्थिति नहीं होने के कारण अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और बहस संभव नहीं है। उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में प्रस्ताव स्वतः निरस्त माना जाएगा। इसके साथ ही बैठक की कार्यवाही खत्म कर दी गई। पूरे घटनाक्रम के बाद प्रमुख जीवछी देवी के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। बैठक खत्म होते ही समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जश्न मनाया। कई स्थानों पर रंग-गुलाल लगाकर होली जैसे उत्सव का माहौल बना दिया गया। समर्थकों का कहना था कि यह जनता के विश्वास और उनके कामकाज पर मुहर है। हालांकि, दूसरी ओर इस घटनाक्रम को लेकर प्रखंड की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सदस्यों की अनुपस्थिति महज संयोग नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम भी हो सकता है, जिससे अविश्वास प्रस्ताव को गिराया जा सके। वहीं कुछ लोग इसे प्रस्ताव लाने वाले पक्ष की संगठनात्मक कमजोरी और समन्वय की कमी के रूप में देख रहे हैं। बता दें कि अविश्वास प्रस्ताव किसी भी निर्वाचित प्रमुख के खिलाफ असंतोष का एक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक माध्यम होता है, लेकिन इसके लिए निर्धारित संख्या में सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होती है। केवटी प्रखंड में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, जिससे प्रस्ताव बिना चर्चा के ही खत्म हो गया। कुल मिलाकर, केवटी प्रखंड की यह राजनीतिक घटना आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति की दिशा तय कर सकती है। फिलहाल प्रमुख जीवछी देवी की कुर्सी सुरक्षित है, लेकिन इस प्रकरण ने राजनीतिक हलचल जरूर बढ़ा दी है। दरभंगा के केवटी प्रखंड प्रमुख जीवछी देवी के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर आज विशेष बैठक बुलाई गई है। ये कोरम के अभाव में निष्प्रभावी साबित हो गई। निर्धारित समय पर पर्याप्त जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के कारण न तो प्रस्ताव पर चर्चा हो सकी और न ही मतदान की प्रक्रिया पूरी हो पाई। इस घटनाक्रम के साथ ही फिलहाल प्रमुख जीवछी देवी की कुर्सी सुरक्षित हो गई है। प्रखंड मुख्यालय स्थित सभागार में बैठक आयोजित की गई थी। बैठक की तैयारी पूरी थी और प्रखंड विकास पदाधिकारी अपने कर्मियों के साथ समय पर मौजूद थे। लेकिन 36 सदस्यीय पंचायत समिति में अपेक्षित संख्या में सदस्य उपस्थित नहीं हो सके। लेकिन केवल दो सदस्य—सहाना खातून और पैगंबरपुर पंचायत के पंचायत समिति सदस्य पीतांबर यादव—ही बैठक में पहुंचे, जिससे कोरम पूरा नहीं हो पाया। बैठक की अध्यक्षता पीतांबर यादव ने की नियमों के तहत निर्धारित समय तक प्रतीक्षा के बाद भी जब पर्याप्त सदस्य नहीं पहुंचे, तो औपचारिक प्रक्रिया के तहतबाद मे बैठक की कार्रवाई शुरू की गई। बैठक की अध्यक्षता पीतांबर यादव ने की। इस दौरान जिला पदाधिकारी के निर्देश पर दरभंगा सदर के भूमि सुधार उपसमाहर्ता संजीत कुमार प्रेक्षक के रूप में मौजूद रहे, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमानुसार संपन्न हो सके। प्रेक्षक संजीत कुमार ने आवश्यक कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद स्पष्ट किया कि सदन में न्यूनतम उपस्थिति नहीं होने के कारण अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और बहस संभव नहीं है। उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में प्रस्ताव स्वतः निरस्त माना जाएगा। इसके साथ ही बैठक की कार्यवाही खत्म कर दी गई। पूरे घटनाक्रम के बाद प्रमुख जीवछी देवी के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। बैठक खत्म होते ही समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जश्न मनाया। कई स्थानों पर रंग-गुलाल लगाकर होली जैसे उत्सव का माहौल बना दिया गया। समर्थकों का कहना था कि यह जनता के विश्वास और उनके कामकाज पर मुहर है। हालांकि, दूसरी ओर इस घटनाक्रम को लेकर प्रखंड की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सदस्यों की अनुपस्थिति महज संयोग नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम भी हो सकता है, जिससे अविश्वास प्रस्ताव को गिराया जा सके। वहीं कुछ लोग इसे प्रस्ताव लाने वाले पक्ष की संगठनात्मक कमजोरी और समन्वय की कमी के रूप में देख रहे हैं। बता दें कि अविश्वास प्रस्ताव किसी भी निर्वाचित प्रमुख के खिलाफ असंतोष का एक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक माध्यम होता है, लेकिन इसके लिए निर्धारित संख्या में सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होती है। केवटी प्रखंड में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, जिससे प्रस्ताव बिना चर्चा के ही खत्म हो गया। कुल मिलाकर, केवटी प्रखंड की यह राजनीतिक घटना आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति की दिशा तय कर सकती है। फिलहाल प्रमुख जीवछी देवी की कुर्सी सुरक्षित है, लेकिन इस प्रकरण ने राजनीतिक हलचल जरूर बढ़ा दी है।


