दाउदनगर प्रखंड की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। यहां पंचायत समिति के कई सदस्यों ने प्रखंड प्रमुख और उपप्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। सदस्यों ने इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को एक संयुक्त हस्ताक्षरित आवेदन सौंपा है, जिसमें नियमानुसार विशेष बैठक बुलाकर अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराने की मांग की गई है। आवेदन में प्रमुख और उपप्रमुख की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। सदस्यों का आरोप है कि पंचायत समिति की बैठकें निर्धारित समय पर आयोजित नहीं की जा रही हैं, जिसके कारण विकास योजनाओं की समीक्षा और स्वीकृति में अनावश्यक देरी हो रही है। सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया है कि पंचायत समिति की निर्धारित बैठकें तय समयसीमा के भीतर नहीं बुलाई जाती हैं। इसके अतिरिक्त, स्थायी समिति की बैठक भी अब तक आयोजित नहीं की गई है, जिसके परिणामस्वरूप कई महत्वपूर्ण विकास योजनाएं लंबित पड़ी हैं। सदस्यों ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि विभिन्न योजनाओं के लिए आवंटित राशि का वितरण सभी पंचायत समिति क्षेत्रों में समान रूप से नहीं किया जा रहा है। इस असमान वितरण के कारण कुछ क्षेत्रों के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। 15वें वित्त आयोग और छठे राज्य वित्त आयोग की राशि के उपयोग तथा बीपीडीपी पोर्टल पर अपलोड को लेकर भी आपत्तियां उठाई गई हैं। सदस्यों का आरोप है कि राशि के वितरण में पारदर्शिता का अभाव रहा और कुछ विशेष क्षेत्रों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इसके अतिरिक्त, सदस्यों ने उपप्रमुख की बैठकों में अनियमित उपस्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उपप्रमुख की गैर-मौजूदगी से प्रशासनिक कार्यों के संचालन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। दाउदनगर प्रखंड की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। यहां पंचायत समिति के कई सदस्यों ने प्रखंड प्रमुख और उपप्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। सदस्यों ने इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को एक संयुक्त हस्ताक्षरित आवेदन सौंपा है, जिसमें नियमानुसार विशेष बैठक बुलाकर अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराने की मांग की गई है। आवेदन में प्रमुख और उपप्रमुख की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। सदस्यों का आरोप है कि पंचायत समिति की बैठकें निर्धारित समय पर आयोजित नहीं की जा रही हैं, जिसके कारण विकास योजनाओं की समीक्षा और स्वीकृति में अनावश्यक देरी हो रही है। सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया है कि पंचायत समिति की निर्धारित बैठकें तय समयसीमा के भीतर नहीं बुलाई जाती हैं। इसके अतिरिक्त, स्थायी समिति की बैठक भी अब तक आयोजित नहीं की गई है, जिसके परिणामस्वरूप कई महत्वपूर्ण विकास योजनाएं लंबित पड़ी हैं। सदस्यों ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि विभिन्न योजनाओं के लिए आवंटित राशि का वितरण सभी पंचायत समिति क्षेत्रों में समान रूप से नहीं किया जा रहा है। इस असमान वितरण के कारण कुछ क्षेत्रों के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। 15वें वित्त आयोग और छठे राज्य वित्त आयोग की राशि के उपयोग तथा बीपीडीपी पोर्टल पर अपलोड को लेकर भी आपत्तियां उठाई गई हैं। सदस्यों का आरोप है कि राशि के वितरण में पारदर्शिता का अभाव रहा और कुछ विशेष क्षेत्रों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इसके अतिरिक्त, सदस्यों ने उपप्रमुख की बैठकों में अनियमित उपस्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उपप्रमुख की गैर-मौजूदगी से प्रशासनिक कार्यों के संचालन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।


