‘ऐसा लग रहा है कि नीतीश कुमार की कनपट्टी में कट्टा सटाके राज्यसभा वाले पेपर पर साइन करा लिया गया है। उनकी सम्मानजनक विदाई नहीं हुई। बिहार की राजनीति से मंडल युग खत्म हो गया है। नीतीश को 2020 में ही रिटायरमेंट ले लेना चाहिए था।’ यह कहना है प्रेम कुमार मणि का। वह नीतीश कुमार के खास दोस्तों में गिने जाते हैं। मुख्यमंत्री द्वारा राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन भरने के बाद से जदयू के नेता और कार्यकर्ता नाराज हैं। नीतीश के खास दोस्त भी खुश नहीं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को लेकर हमने उनके चार करीबी दोस्तों से बात की। दोस्त नं. 1 प्रेम कुमार मणि: नीतीश को नहीं मिली सम्मानजनक विदाई जदयू के पूर्व नेता प्रेम कुमार मणि नीतीश कुमार के पुराने दोस्त हैं। उन्होंने कहा, ‘नीतीश की सम्मानजनक विदाई नहीं हुई। यह सभी को दिख रहा है। मुझे भी दिख रहा है। वे भले ही राज्यसभा जा रहे हों, लेकिन लगता है कि उनकी राजनीतिक विदाई का समय है। उनके सक्रिय राजनीति का अंत हो रहा है। दूसरी बात यह कि मंडल युग का बिहार की राजनीति से खात्मा हो गया है।’ ‘पीएम ने जैसी भाषा का इस्तेमाल चुनाव के समय किया और कहा कि कनपटी में कट्टा सटाकर…। अब लग रहा है कि नीतीश कुमार की कनपटी में कट्टा सटाके राज्यसभा जाने वाले पेपर पर साइन करा लिया गया।’ ‘मैंने तो 2020 में ही कहा था कि नीतीश कुमार को रिटायरमेंट ले लेना चाहिए, जब उन्हें 43 सीटें मिली थीं। नीतीश से मैंने कहा भी था कि आपको अब संन्यास ले लेना चाहिए। उन्होंने जवाब दिया कि बीजेपी चाहती है कि वे मुख्यमंत्री पद पर रहें।’ प्रेम कुमार मणि ने कहा, ‘बीजेपी को अपने बचाव के लिए नीतीश कुमार की जरूरत थी। बिहार में नीतीश के बिना बीजेपी की कोई जमीन तैयार नहीं हो रही थी। अब बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा।’ दोस्त नं. 2- सरयू राय: नीतीश की प्रतिष्ठा के अनुसार नहीं हुआ फैसला नीतीश कुमार के मित्र सरयू राय ने कहा, ‘नीतीश 2005 से मुख्यमंत्री हैं। उनके बारे में अच्छे तरीके से फैसला लेना चाहिए था। अचानक घोषणा नहीं होनी चाहिए थी। यह नीतीश की प्रतिष्ठा के हिसाब से ठीक नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। केन्द्रीय अध्यक्ष की भूमिका में वे कितना सहज रहेंगे यह भी समझने की बात है। ऐसा न हो कि अध्यक्ष के पावर का इस्तेमाल कार्यकारी अध्यक्ष करने लगें।’ उन्होंने कहा, ‘नीतीश के मन में क्या है, यह जानना आसान नहीं। उनकी एक खासियत रही है कि अपने खास दोस्तों के सामने भी बहुत अधिक नहीं खुलते। अपना दायरा बनाकर रखते हैं। उन्होंने कई बार चुपचाप अपमान बर्दाश्त किया है।’ एक ऐसी ही घटना लालू यादव से जुड़ी है। 1992 में जब लालू जनता दल से बिहार के CM थे तब दिल्ली स्थित बिहार निवास में मैं, ललन सिंह और नीतीश कुमार उनसे मिलने गए। लालू यादव ने मुझे और ललन सिंह को अपमानित किया। नीतीश कुमार उस वक्त चुप रहे, लेकिन उनके चेहरे पर नाराजगी साफ दिख रही थी।’ ‘घर जाने के बाद उन्होंने मुझे फोन किया। मैं मिलने गया तो कहा कि लालू यादव को पत्र लिखिए। शरद यादव ने पत्र लालू यादव तक जाने से रोका। नीतीश ने उसे अखबार में छपवा दिया था।’ दोस्त नं. 3 नरेंद्र प्रसाद: मैंने नीतीश के साथ बस हाईजैक किया था नरेंद्र प्रसाद सिंह और नीतीश कुमार की दोस्ती इंजीनियरिंग की पढ़ाई के समय से है। नीतीश के साथ बिताए दिनों को याद करते हुए नरेंद्र प्रसाद ने कहा, ‘हम दोनों का ब्रांच इलेक्ट्रिकल था। 58 साल से हमारी दोस्ती है। एक बार तो छात्रों के कल्याण के लिए नीतीश कुमार और हमलोगों ने मिलकर बस हाईजैक कर लिया था। इसके बाद सरकार को बस सुविधा आदि के लिए मनाया था।’ ‘दिल्ली यूनिवर्सिटी में बस हाईजैक हुआ था। उसके बाद बिहार में हमलोगों ने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में बस हाईजैक किया था। क्लास भी बाधित नहीं हुआ था। तत्कालीन मुख्यमंत्री केदार पांडेय से हमारी वार्ता हुई थी।’ वर्तमान राजनीति पर नरेंद्र प्रसाद ने कहा, ‘नीतीश कुमार दबाव में आने वाले नेता नहीं हैं। 58 साल से मैं उनको जानता हूं। भले नीतीश की उम्र 75 साल हो गई हो, सेहत पहले जैसी नहीं हो, लेकिन वे दबाव में नहीं हैं। उन्होंने सेकंड जनरेशन को आगे बढ़ाने के लिए सोचा है।’ ‘जो महाराष्ट्र व अन्य राज्यों में हुआ, अब बिहार में हो रहा है। नीतीश अभी भी मुख्यमंत्री पद पर रह सकते थे। वह राज्यसभा जाकर भी बिहार की राजनीति कर सकते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘अब निशांत जदयू में शामिल हो रहे हैं। 20 साल में मैंने निशांत को इस बात की धौंस दिखाते नहीं देखा कि वह सीएम के बेटे हैं। कार्यकारी अध्यक्ष, मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री, सभी पदों के लिए निशांत फिट हैं।’ दोस्त नं. 4- डॉ. उदय कांत मिश्र : नीतीश को कोई ताकत घेर नहीं सकती नीतीश कुमार के मित्र और बिहार राज्य आपदा प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. उदय कांत मिश्र ने कहा, ‘नीतीश कुमार की विदाई क्यों कहते हैं? क्या वे फिर बिहार नहीं आएंगे? क्या राजनीति छोड़ देंगे? मैं नीतीश कुमार का मित्र हूं, राजनेता या मुख्यमंत्री का दोस्त नहीं।’ ‘ऐसा लग रहा है कि नीतीश कुमार की कनपट्टी में कट्टा सटाके राज्यसभा वाले पेपर पर साइन करा लिया गया है। उनकी सम्मानजनक विदाई नहीं हुई। बिहार की राजनीति से मंडल युग खत्म हो गया है। नीतीश को 2020 में ही रिटायरमेंट ले लेना चाहिए था।’ यह कहना है प्रेम कुमार मणि का। वह नीतीश कुमार के खास दोस्तों में गिने जाते हैं। मुख्यमंत्री द्वारा राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन भरने के बाद से जदयू के नेता और कार्यकर्ता नाराज हैं। नीतीश के खास दोस्त भी खुश नहीं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को लेकर हमने उनके चार करीबी दोस्तों से बात की। दोस्त नं. 1 प्रेम कुमार मणि: नीतीश को नहीं मिली सम्मानजनक विदाई जदयू के पूर्व नेता प्रेम कुमार मणि नीतीश कुमार के पुराने दोस्त हैं। उन्होंने कहा, ‘नीतीश की सम्मानजनक विदाई नहीं हुई। यह सभी को दिख रहा है। मुझे भी दिख रहा है। वे भले ही राज्यसभा जा रहे हों, लेकिन लगता है कि उनकी राजनीतिक विदाई का समय है। उनके सक्रिय राजनीति का अंत हो रहा है। दूसरी बात यह कि मंडल युग का बिहार की राजनीति से खात्मा हो गया है।’ ‘पीएम ने जैसी भाषा का इस्तेमाल चुनाव के समय किया और कहा कि कनपटी में कट्टा सटाकर…। अब लग रहा है कि नीतीश कुमार की कनपटी में कट्टा सटाके राज्यसभा जाने वाले पेपर पर साइन करा लिया गया।’ ‘मैंने तो 2020 में ही कहा था कि नीतीश कुमार को रिटायरमेंट ले लेना चाहिए, जब उन्हें 43 सीटें मिली थीं। नीतीश से मैंने कहा भी था कि आपको अब संन्यास ले लेना चाहिए। उन्होंने जवाब दिया कि बीजेपी चाहती है कि वे मुख्यमंत्री पद पर रहें।’ प्रेम कुमार मणि ने कहा, ‘बीजेपी को अपने बचाव के लिए नीतीश कुमार की जरूरत थी। बिहार में नीतीश के बिना बीजेपी की कोई जमीन तैयार नहीं हो रही थी। अब बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा।’ दोस्त नं. 2- सरयू राय: नीतीश की प्रतिष्ठा के अनुसार नहीं हुआ फैसला नीतीश कुमार के मित्र सरयू राय ने कहा, ‘नीतीश 2005 से मुख्यमंत्री हैं। उनके बारे में अच्छे तरीके से फैसला लेना चाहिए था। अचानक घोषणा नहीं होनी चाहिए थी। यह नीतीश की प्रतिष्ठा के हिसाब से ठीक नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। केन्द्रीय अध्यक्ष की भूमिका में वे कितना सहज रहेंगे यह भी समझने की बात है। ऐसा न हो कि अध्यक्ष के पावर का इस्तेमाल कार्यकारी अध्यक्ष करने लगें।’ उन्होंने कहा, ‘नीतीश के मन में क्या है, यह जानना आसान नहीं। उनकी एक खासियत रही है कि अपने खास दोस्तों के सामने भी बहुत अधिक नहीं खुलते। अपना दायरा बनाकर रखते हैं। उन्होंने कई बार चुपचाप अपमान बर्दाश्त किया है।’ एक ऐसी ही घटना लालू यादव से जुड़ी है। 1992 में जब लालू जनता दल से बिहार के CM थे तब दिल्ली स्थित बिहार निवास में मैं, ललन सिंह और नीतीश कुमार उनसे मिलने गए। लालू यादव ने मुझे और ललन सिंह को अपमानित किया। नीतीश कुमार उस वक्त चुप रहे, लेकिन उनके चेहरे पर नाराजगी साफ दिख रही थी।’ ‘घर जाने के बाद उन्होंने मुझे फोन किया। मैं मिलने गया तो कहा कि लालू यादव को पत्र लिखिए। शरद यादव ने पत्र लालू यादव तक जाने से रोका। नीतीश ने उसे अखबार में छपवा दिया था।’ दोस्त नं. 3 नरेंद्र प्रसाद: मैंने नीतीश के साथ बस हाईजैक किया था नरेंद्र प्रसाद सिंह और नीतीश कुमार की दोस्ती इंजीनियरिंग की पढ़ाई के समय से है। नीतीश के साथ बिताए दिनों को याद करते हुए नरेंद्र प्रसाद ने कहा, ‘हम दोनों का ब्रांच इलेक्ट्रिकल था। 58 साल से हमारी दोस्ती है। एक बार तो छात्रों के कल्याण के लिए नीतीश कुमार और हमलोगों ने मिलकर बस हाईजैक कर लिया था। इसके बाद सरकार को बस सुविधा आदि के लिए मनाया था।’ ‘दिल्ली यूनिवर्सिटी में बस हाईजैक हुआ था। उसके बाद बिहार में हमलोगों ने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में बस हाईजैक किया था। क्लास भी बाधित नहीं हुआ था। तत्कालीन मुख्यमंत्री केदार पांडेय से हमारी वार्ता हुई थी।’ वर्तमान राजनीति पर नरेंद्र प्रसाद ने कहा, ‘नीतीश कुमार दबाव में आने वाले नेता नहीं हैं। 58 साल से मैं उनको जानता हूं। भले नीतीश की उम्र 75 साल हो गई हो, सेहत पहले जैसी नहीं हो, लेकिन वे दबाव में नहीं हैं। उन्होंने सेकंड जनरेशन को आगे बढ़ाने के लिए सोचा है।’ ‘जो महाराष्ट्र व अन्य राज्यों में हुआ, अब बिहार में हो रहा है। नीतीश अभी भी मुख्यमंत्री पद पर रह सकते थे। वह राज्यसभा जाकर भी बिहार की राजनीति कर सकते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘अब निशांत जदयू में शामिल हो रहे हैं। 20 साल में मैंने निशांत को इस बात की धौंस दिखाते नहीं देखा कि वह सीएम के बेटे हैं। कार्यकारी अध्यक्ष, मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री, सभी पदों के लिए निशांत फिट हैं।’ दोस्त नं. 4- डॉ. उदय कांत मिश्र : नीतीश को कोई ताकत घेर नहीं सकती नीतीश कुमार के मित्र और बिहार राज्य आपदा प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. उदय कांत मिश्र ने कहा, ‘नीतीश कुमार की विदाई क्यों कहते हैं? क्या वे फिर बिहार नहीं आएंगे? क्या राजनीति छोड़ देंगे? मैं नीतीश कुमार का मित्र हूं, राजनेता या मुख्यमंत्री का दोस्त नहीं।’


