निशांत की पॉलिटिकल ट्रेनिंग, कपड़ा पहनना-चलना और बैठना सीख रहे:नीतीश की तरह कड़क प्रशासक बनने की तैयारी; मंत्री दे रहे टिप्स

निशांत की पॉलिटिकल ट्रेनिंग, कपड़ा पहनना-चलना और बैठना सीख रहे:नीतीश की तरह कड़क प्रशासक बनने की तैयारी; मंत्री दे रहे टिप्स

सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को जदयू पॉलिटिकल ट्रेनिंग दे रही है। मंत्री अशोक चौधरी के घर पर उन्हें एक सधे हुए राजनेता की तरह चलना, बोलना, दिखना और व्यवहार करना सिखाया जा रहा है। जदयू की ओर से निशांत सीएम पद के लिए प्रोजेक्ट किए जा रहे हैं। उन्हें ट्रेंड करने में कई बड़े नेता जुटे हैं। बॉडी लैंग्वेज से लेकर ड्रेस सेंस तक, हर बात बारीकी से सिखाई जा रही है। किस तरह चल रही निशांत की पॉलिटिकल ट्रेनिंग? बोलने, पहनावे और प्रेजेंटेशन पर खास फोकस। हर पहलू पर हो रही बारीक तैयारी। पढ़िए पूरी इनसाइड रिपोर्ट। सबसे पहले जानिए, क्यों पड़ी निशांत को ट्रेनिंग की जरूरत निशांत कुमार 8 मार्च को जदयू में शामिल हुए। इसके बाद उनकी कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनीं। कपड़ों से लेकर चलने, सबके सामने खड़े होने और बात करने तक पर प्रतिक्रिया आई। कई लोगों ने तो यहां तक कहा कि ये ढीले ढाले व्यक्ति दिख रहे हैं। टीम निशांत में शामिल युवा विधायक ने बताया कि निशांत की प्रभावशाली नेता वाली छवि बनाने के लिए खास ट्रेनिंग दी जा रही है। जिससे वो पब्लिक से बेहतर बातचीत कर सकें। नीतीश की तरह उनकी इमेज दिखाई दे। इसके लिए निशांत मंत्री अशोक चौधरी के घर जा रहे हैं। कई मंत्री और विधायक इस काम में लगे हैं। निशांत की ट्रेनिंग की 5 प्रमुख बातें 1. बॉडी लैंग्वेज: मंच पर खड़ा होना, नेताओं से मिलना निशांत को सिखाया जा रहा है कि आम लोगों के सामने रहने, जनता से मिलने और मंच पर मौजूद होने के दौरान किस तरह की बॉडी लैंग्वेज होनी चाहिए। लोगों के सामने किस तरह खुद को प्रजेंट करना है। इसके लिए निशांत को सेल्फ-प्रेजेंटेशन की ट्रेनिंग दी जा रही है। यह सिर्फ कपड़े या स्टाइल तक सीमित नहीं है। बल्कि, उनकी पूरी छवि, व्यवहार, हाव-भाव और लोगों से जुड़ने के तरीके पर काम हो रहा है। 2- बोलने की कला…क्या और कैसे बोलें राजनीति में भाषा सबसे बड़ा हथियार होती है। नेता से लोग तभी जुड़ेंगे जब उसकी बात उनके दिलों तक पहुंचे। ट्रेनिंग में निशांत को बोलने की वह खास कला सिखाई जा रही है। बताया जा रहा है कि कब, क्या और कैसे बोलना है। निशांत को सिखाया जा रहा है कि सरल, साफ और जनता से जुड़ी भाषा में कैसे बात करनी है। लंबे और जटिल भाषणों की बजाय छोटे, असरदार वाक्यों का इस्तेमाल कैसे किया जाए। मीडिया के सवालों का किस तरह जवाब देना है। कैसे विवादित सवालों से बचना है। कैसे जवाब को अपने पक्ष में मोड़ना है। कैसे बिना आक्रामक हुए अपनी बात मजबूती से रखनी है। 3- ड्रेसिंग सेंस: फिट कुर्ते सलाह निशांत को ड्रेस सेंस की ट्रेनिंग दी जा रही है। बताया जा रहा है कि ढीले-ढाले कपड़े एक नेता की छवि के लिए ठीक नहीं। उन्हें शरीर पर ठीक से फिट आने वाले और नेता की छवि को सूट करने वाले कपड़े चुनने चाहिए। निशांत को सादगी के साथ ही खुद को अच्छा दिखाने वाले कपड़े चुनने की ट्रेनिंग दी जा रही है। नीतीश का ड्रेस सेंस शालीन और पारंपरिक है। वे ज्यादातर समय सफेद या हल्के रंग के सूती कुर्ते-पायजामे में नजर आते हैं। इससे उनकी सादगी और जमीनी जुड़ाव की झलक मिलती है। निशांत को भी अपने लिए ऐसा पहनावा चुनना सिखाया जा रहा है, जिसमें वह एक अनुभवी राजनेता जैसा दिखें। 4- विभागीय कामकाज और प्रशासनिक पकड़ की ट्रेनिंग अशोक चौधरी को मंत्री पद पर रहने का लंबा अनुभव है। वह इसके आधार पर निशांत को सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक ट्रेनिंग भी दे रहे हैं। समझा रहे हैं कि किसी विभाग का काम कैसे चलता है। फाइल कैसे आगे बढ़ती है। फैसले कैसे लिए जाते हैं और अधिकारियों से काम कैसे लिया जाता है। खास फोकस इस बात पर है कि अगर भविष्य में उन्हें कोई विभाग या बड़ी जिम्मेदारी मिलती है तो वे सिस्टम को समझकर प्रभावी तरीके से काम कर सकें। अधिकारियों के साथ संतुलित व्यवहार, मीटिंग में निर्णय लेने की क्षमता और ग्राउंड पर योजनाओं को लागू कराने की प्रक्रिया भी उन्हें सिखाई जा रही है। 5- सीनियर नेताओं का सम्मान, सरल व्यवहार निशांत कुमार को इस बात की ट्रेनिंग भी दी जा रही है कि सीनियर नेताओं के साथ किस तरह का व्यवहार करना चाहिए। गठबंधन के किसी साथी दल के सीनियर नेता से मिलते वक्त उन्हें क्या करना चाहिए। इसकी झलक गुरुवार को हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा की इफ्तार पार्टी में दिखी। इसमें निशांत मुख्यमंत्री की सिक्यूरिटी में पहुंचे। मुख्यमंत्री के लिए रखे सोफे पर बैठे दिखाई दिए। थोड़ी देर बाद डिप्टी CM सम्राट चौधरी कार्यक्रम में पहुंचे। सम्राट को देखते ही निशांत ने सोफा खाली कर दिया। CM के लिए रखे सोफे पर सम्राट बैठ गए। निशांत पास में रखे सोफे पर शिफ्ट हो गए। इससे पहले नीतीश कुमार भी इफ्तार पार्टी में पहुंचे थे। थोड़ी देर रुकने के बाद वे निकल गए। कौन दे रहे निशांत को ट्रेनिंग? निशांत को ट्रेनिंग देने में सिर्फ मंत्री अशोक चौधरी ही नहीं, बल्कि जेडीयू के कई अनुभवी नेता, रणनीतिकार और उनके उम्र के विधायक शामिल हैं। पार्टी के भीतर ‘टीम निशांत’ नाम से एक टीम सक्रिय है। इसमें 14 से 20 विधायक शामिल हैं। 8 मार्च को इस्लामपुर से विधायक रोहेल रंजन के आवास पर हुई बैठक में निशांत को भविष्य के मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा हुई थी। बता दें कि रोहेल रंजन निशांत के दोस्त हैं। दोनों ने इंजीनियरिंग साथ में की है। इस टीम का काम सिर्फ सलाह देना नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक दौरे, मुद्दों की प्राथमिकता और जनसंपर्क की रणनीति तय करना भी है। यानी यह पूरी प्रक्रिया एक संगठित और योजनाबद्ध तरीके से चलाई जा रही है। निशांत को ट्रेनिंग देने से कितना फायदा होगा? जानकारों के अनुसार ट्रेनिंग का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि निशांत इसे जमीन पर कितनी तेजी से लागू कर पाते हैं। अगर वे एक शांत, पढ़े-लिखे और संतुलित नेता की छवि बनाने में सफल होते हैं तो उन्हें शहरी और युवा वर्ग में जल्दी स्वीकार्यता मिल सकती है। हालांकि चुनौती भी बड़ी है। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें अपने पिता नीतीश कुमार की मजबूत राजनीतिक विरासत और अपेक्षाओं के दबाव के साथ खुद को साबित करना होगा। अगर ‘टीम निशांत’ की रणनीति सही तरीके से लागू होती है तो वे जेडीयू के लिए भविष्य का बड़ा चेहरा बन सकते हैं। वहीं, अगर जमीनी कनेक्शन कमजोर रहा तो यह पूरी कवायद सिर्फ इमेज बिल्डिंग तक सीमित रह सकती है। JDU ज्वाइन करने के बाद से एक्टिव हैं निशांत निशांत ने 8 मार्च को जेडीयू की सदस्यता लेने के बाद से अपनी राजनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। सदस्यता के दिन कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उन्हें पार्टी में शामिल कराया, जबकि ललन सिंह ने गमछा पहनाकर स्वागत किया था। इस दौरान नीतीश कुमार मौजूद नहीं थे। निशांत ने ललन सिंह और संजय झा के पैर छूकर आशीर्वाद लिया था। सदस्यता लेने के बाद निशांत ने कहा था, ‘मैं पार्टी के लिए मेहनत से काम करूंगा। मेरे पिताजी ने 20 साल में जो काम किए हैं, उन्हें आगे बढ़ाऊंगा। बिहार की जनता और देश की जनता से अपील करता हूं कि पिताजी पर विश्वास बनाए रखें।’ लगातार बढ़ रही निशांत की सक्रियता 10 मार्च को निशांत जेडीयू के वरिष्ठ नेता वशिष्ठ नारायण सिंह से मिलने पहुंचे। 11 मार्च को वे अचानक पार्टी कार्यालय पहुंचे। जहां मंत्री, विधायक और कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। महिला कार्यकर्ताओं ने उनकी आरती उतारी थी। 13 मार्च को निशांत अपने पैतृक गांव कल्याण बिगहा गए, जहां पूरे रास्ते लोगों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि लोगों का स्नेह और भरोसा उन्हें और मजबूत बना रहा है और वे हर व्यक्ति तक पार्टी को पहुंचाने के अभियान में जुटेंगे। बैठकों और रणनीति पर फोकस पिछले कई दिनों से निशांत लगातार विधायकों और नेताओं के साथ बैठक कर रहे हैं। इन बैठकों में उनके राजनीतिक दौरे, मुद्दों और संगठन विस्तार की रणनीति पर चर्चा हो रही है। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि उनकी भूमिका अब धीरे-धीरे बढ़ाई जा रही है। इफ्तार में दिखी नई भूमिका इस बार इफ्तार पार्टियों में भी निशांत की सक्रियता खास रही। कई जगहों पर वे नीतीश कुमार की जगह प्रमुख भूमिका में नजर आए। हज भवन की इफ्तार पार्टी में उनका अलग अंदाज देखने को मिला। लोगों ने उन्हें टोपी पहनाई और नारे लगे। बिहार का CM कैसा हो, निशांत कुमार जैसा हो। सीएम हाउस में भी वे रोजेदारों के साथ आगे बैठे, जबकि नीतीश कुमार पीछे नजर आए। सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को जदयू पॉलिटिकल ट्रेनिंग दे रही है। मंत्री अशोक चौधरी के घर पर उन्हें एक सधे हुए राजनेता की तरह चलना, बोलना, दिखना और व्यवहार करना सिखाया जा रहा है। जदयू की ओर से निशांत सीएम पद के लिए प्रोजेक्ट किए जा रहे हैं। उन्हें ट्रेंड करने में कई बड़े नेता जुटे हैं। बॉडी लैंग्वेज से लेकर ड्रेस सेंस तक, हर बात बारीकी से सिखाई जा रही है। किस तरह चल रही निशांत की पॉलिटिकल ट्रेनिंग? बोलने, पहनावे और प्रेजेंटेशन पर खास फोकस। हर पहलू पर हो रही बारीक तैयारी। पढ़िए पूरी इनसाइड रिपोर्ट। सबसे पहले जानिए, क्यों पड़ी निशांत को ट्रेनिंग की जरूरत निशांत कुमार 8 मार्च को जदयू में शामिल हुए। इसके बाद उनकी कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनीं। कपड़ों से लेकर चलने, सबके सामने खड़े होने और बात करने तक पर प्रतिक्रिया आई। कई लोगों ने तो यहां तक कहा कि ये ढीले ढाले व्यक्ति दिख रहे हैं। टीम निशांत में शामिल युवा विधायक ने बताया कि निशांत की प्रभावशाली नेता वाली छवि बनाने के लिए खास ट्रेनिंग दी जा रही है। जिससे वो पब्लिक से बेहतर बातचीत कर सकें। नीतीश की तरह उनकी इमेज दिखाई दे। इसके लिए निशांत मंत्री अशोक चौधरी के घर जा रहे हैं। कई मंत्री और विधायक इस काम में लगे हैं। निशांत की ट्रेनिंग की 5 प्रमुख बातें 1. बॉडी लैंग्वेज: मंच पर खड़ा होना, नेताओं से मिलना निशांत को सिखाया जा रहा है कि आम लोगों के सामने रहने, जनता से मिलने और मंच पर मौजूद होने के दौरान किस तरह की बॉडी लैंग्वेज होनी चाहिए। लोगों के सामने किस तरह खुद को प्रजेंट करना है। इसके लिए निशांत को सेल्फ-प्रेजेंटेशन की ट्रेनिंग दी जा रही है। यह सिर्फ कपड़े या स्टाइल तक सीमित नहीं है। बल्कि, उनकी पूरी छवि, व्यवहार, हाव-भाव और लोगों से जुड़ने के तरीके पर काम हो रहा है। 2- बोलने की कला…क्या और कैसे बोलें राजनीति में भाषा सबसे बड़ा हथियार होती है। नेता से लोग तभी जुड़ेंगे जब उसकी बात उनके दिलों तक पहुंचे। ट्रेनिंग में निशांत को बोलने की वह खास कला सिखाई जा रही है। बताया जा रहा है कि कब, क्या और कैसे बोलना है। निशांत को सिखाया जा रहा है कि सरल, साफ और जनता से जुड़ी भाषा में कैसे बात करनी है। लंबे और जटिल भाषणों की बजाय छोटे, असरदार वाक्यों का इस्तेमाल कैसे किया जाए। मीडिया के सवालों का किस तरह जवाब देना है। कैसे विवादित सवालों से बचना है। कैसे जवाब को अपने पक्ष में मोड़ना है। कैसे बिना आक्रामक हुए अपनी बात मजबूती से रखनी है। 3- ड्रेसिंग सेंस: फिट कुर्ते सलाह निशांत को ड्रेस सेंस की ट्रेनिंग दी जा रही है। बताया जा रहा है कि ढीले-ढाले कपड़े एक नेता की छवि के लिए ठीक नहीं। उन्हें शरीर पर ठीक से फिट आने वाले और नेता की छवि को सूट करने वाले कपड़े चुनने चाहिए। निशांत को सादगी के साथ ही खुद को अच्छा दिखाने वाले कपड़े चुनने की ट्रेनिंग दी जा रही है। नीतीश का ड्रेस सेंस शालीन और पारंपरिक है। वे ज्यादातर समय सफेद या हल्के रंग के सूती कुर्ते-पायजामे में नजर आते हैं। इससे उनकी सादगी और जमीनी जुड़ाव की झलक मिलती है। निशांत को भी अपने लिए ऐसा पहनावा चुनना सिखाया जा रहा है, जिसमें वह एक अनुभवी राजनेता जैसा दिखें। 4- विभागीय कामकाज और प्रशासनिक पकड़ की ट्रेनिंग अशोक चौधरी को मंत्री पद पर रहने का लंबा अनुभव है। वह इसके आधार पर निशांत को सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक ट्रेनिंग भी दे रहे हैं। समझा रहे हैं कि किसी विभाग का काम कैसे चलता है। फाइल कैसे आगे बढ़ती है। फैसले कैसे लिए जाते हैं और अधिकारियों से काम कैसे लिया जाता है। खास फोकस इस बात पर है कि अगर भविष्य में उन्हें कोई विभाग या बड़ी जिम्मेदारी मिलती है तो वे सिस्टम को समझकर प्रभावी तरीके से काम कर सकें। अधिकारियों के साथ संतुलित व्यवहार, मीटिंग में निर्णय लेने की क्षमता और ग्राउंड पर योजनाओं को लागू कराने की प्रक्रिया भी उन्हें सिखाई जा रही है। 5- सीनियर नेताओं का सम्मान, सरल व्यवहार निशांत कुमार को इस बात की ट्रेनिंग भी दी जा रही है कि सीनियर नेताओं के साथ किस तरह का व्यवहार करना चाहिए। गठबंधन के किसी साथी दल के सीनियर नेता से मिलते वक्त उन्हें क्या करना चाहिए। इसकी झलक गुरुवार को हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा की इफ्तार पार्टी में दिखी। इसमें निशांत मुख्यमंत्री की सिक्यूरिटी में पहुंचे। मुख्यमंत्री के लिए रखे सोफे पर बैठे दिखाई दिए। थोड़ी देर बाद डिप्टी CM सम्राट चौधरी कार्यक्रम में पहुंचे। सम्राट को देखते ही निशांत ने सोफा खाली कर दिया। CM के लिए रखे सोफे पर सम्राट बैठ गए। निशांत पास में रखे सोफे पर शिफ्ट हो गए। इससे पहले नीतीश कुमार भी इफ्तार पार्टी में पहुंचे थे। थोड़ी देर रुकने के बाद वे निकल गए। कौन दे रहे निशांत को ट्रेनिंग? निशांत को ट्रेनिंग देने में सिर्फ मंत्री अशोक चौधरी ही नहीं, बल्कि जेडीयू के कई अनुभवी नेता, रणनीतिकार और उनके उम्र के विधायक शामिल हैं। पार्टी के भीतर ‘टीम निशांत’ नाम से एक टीम सक्रिय है। इसमें 14 से 20 विधायक शामिल हैं। 8 मार्च को इस्लामपुर से विधायक रोहेल रंजन के आवास पर हुई बैठक में निशांत को भविष्य के मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा हुई थी। बता दें कि रोहेल रंजन निशांत के दोस्त हैं। दोनों ने इंजीनियरिंग साथ में की है। इस टीम का काम सिर्फ सलाह देना नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक दौरे, मुद्दों की प्राथमिकता और जनसंपर्क की रणनीति तय करना भी है। यानी यह पूरी प्रक्रिया एक संगठित और योजनाबद्ध तरीके से चलाई जा रही है। निशांत को ट्रेनिंग देने से कितना फायदा होगा? जानकारों के अनुसार ट्रेनिंग का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि निशांत इसे जमीन पर कितनी तेजी से लागू कर पाते हैं। अगर वे एक शांत, पढ़े-लिखे और संतुलित नेता की छवि बनाने में सफल होते हैं तो उन्हें शहरी और युवा वर्ग में जल्दी स्वीकार्यता मिल सकती है। हालांकि चुनौती भी बड़ी है। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें अपने पिता नीतीश कुमार की मजबूत राजनीतिक विरासत और अपेक्षाओं के दबाव के साथ खुद को साबित करना होगा। अगर ‘टीम निशांत’ की रणनीति सही तरीके से लागू होती है तो वे जेडीयू के लिए भविष्य का बड़ा चेहरा बन सकते हैं। वहीं, अगर जमीनी कनेक्शन कमजोर रहा तो यह पूरी कवायद सिर्फ इमेज बिल्डिंग तक सीमित रह सकती है। JDU ज्वाइन करने के बाद से एक्टिव हैं निशांत निशांत ने 8 मार्च को जेडीयू की सदस्यता लेने के बाद से अपनी राजनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। सदस्यता के दिन कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने उन्हें पार्टी में शामिल कराया, जबकि ललन सिंह ने गमछा पहनाकर स्वागत किया था। इस दौरान नीतीश कुमार मौजूद नहीं थे। निशांत ने ललन सिंह और संजय झा के पैर छूकर आशीर्वाद लिया था। सदस्यता लेने के बाद निशांत ने कहा था, ‘मैं पार्टी के लिए मेहनत से काम करूंगा। मेरे पिताजी ने 20 साल में जो काम किए हैं, उन्हें आगे बढ़ाऊंगा। बिहार की जनता और देश की जनता से अपील करता हूं कि पिताजी पर विश्वास बनाए रखें।’ लगातार बढ़ रही निशांत की सक्रियता 10 मार्च को निशांत जेडीयू के वरिष्ठ नेता वशिष्ठ नारायण सिंह से मिलने पहुंचे। 11 मार्च को वे अचानक पार्टी कार्यालय पहुंचे। जहां मंत्री, विधायक और कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। महिला कार्यकर्ताओं ने उनकी आरती उतारी थी। 13 मार्च को निशांत अपने पैतृक गांव कल्याण बिगहा गए, जहां पूरे रास्ते लोगों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि लोगों का स्नेह और भरोसा उन्हें और मजबूत बना रहा है और वे हर व्यक्ति तक पार्टी को पहुंचाने के अभियान में जुटेंगे। बैठकों और रणनीति पर फोकस पिछले कई दिनों से निशांत लगातार विधायकों और नेताओं के साथ बैठक कर रहे हैं। इन बैठकों में उनके राजनीतिक दौरे, मुद्दों और संगठन विस्तार की रणनीति पर चर्चा हो रही है। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि उनकी भूमिका अब धीरे-धीरे बढ़ाई जा रही है। इफ्तार में दिखी नई भूमिका इस बार इफ्तार पार्टियों में भी निशांत की सक्रियता खास रही। कई जगहों पर वे नीतीश कुमार की जगह प्रमुख भूमिका में नजर आए। हज भवन की इफ्तार पार्टी में उनका अलग अंदाज देखने को मिला। लोगों ने उन्हें टोपी पहनाई और नारे लगे। बिहार का CM कैसा हो, निशांत कुमार जैसा हो। सीएम हाउस में भी वे रोजेदारों के साथ आगे बैठे, जबकि नीतीश कुमार पीछे नजर आए।  

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