मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में आने की चर्चा इन दिनों तेज हो गई है। इसी बीच उनका गया दौरा काफी चर्चा में रहा। दौरे के दौरान उन्होंने अपने पिता के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल गंगा जल आपूर्ति योजना के तहत टेटर जलाशय का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से परियोजना की प्रगति, संचालन और जल आपूर्ति व्यवस्था की विस्तृत जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि गंगा का पानी पाइपलाइन के जरिए जलाशयों और जल शोधन संयंत्रों तक लाया जाता है, जहां इसे शुद्ध कर लोगों को पेयजल के रूप में उपलब्ध कराया जाता है। दशरथ मांझी को श्रद्धांजलि, संघर्ष को किया नमन गया दौरे के दौरान वे दशरथ मांझी मेमोरियल भी पहुंचे। वहां उन्होंने दशरथ मांझी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर उन्होंने मांझी के बेटे से आशीर्वाद लिया और परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना। इसके बाद वे उस ऐतिहासिक पहाड़ पर भी गए, जिसे मांझी ने 22 वर्षों तक अपने हाथों से काटकर रास्ता बनाया था। निशांत ने मांझी के अद्भुत दृढ़ संकल्प और अपनी पत्नी के प्रति उनके प्रेम को नमन करते हुए उनके संघर्ष को सलाम किया। नंगे पांव बोधगया भ्रमण, दिखाई आध्यात्मिक आस्था दौरे के दौरान वे बोधगया पहुंचे, जहां उन्होंने नंगे पांव भ्रमण कर अपनी आध्यात्मिक आस्था की मिसाल पेश की। उन्होंने महाबोधि मंदिर में ध्यान लगाया और भगवान बुद्ध के जीवन, उपदेशों और मध्यम मार्ग के सिद्धांतों को समझा। इस दौरान उन्होंने “अप्प दीपो भव” के संदेश के महत्व को भी जाना। बुद्ध के जीवन दर्शन और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण भ्रमण के दौरान उन्होंने जाना कि किस प्रकार सिद्धार्थ गौतम ने मानव जीवन के दुःखों के कारणों को समझने के लिए ज्ञान मार्ग अपनाया और कठोर तपस्या के बाद मध्यम मार्ग का अनुसरण करते हुए बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने बोधि वृक्ष के नीचे ध्यान किया, विदेश से आए पर्यटकों से मुलाकात की और बुद्ध से जुड़ी पुस्तकों का अध्ययन किया। 80 फीट बुद्ध प्रतिमा स्थल भी गए निशांत इसके अलावा वे शयन मुद्रा बुद्ध और 80 फीट बुद्ध प्रतिमा स्थल भी गए। पूरे दौरे की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने पूरे बोधगया क्षेत्र का भ्रमण नंगे पांव किया, जो उनकी गहरी आस्था और आध्यात्मिक झुकाव को दर्शाता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में आने की चर्चा इन दिनों तेज हो गई है। इसी बीच उनका गया दौरा काफी चर्चा में रहा। दौरे के दौरान उन्होंने अपने पिता के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल गंगा जल आपूर्ति योजना के तहत टेटर जलाशय का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से परियोजना की प्रगति, संचालन और जल आपूर्ति व्यवस्था की विस्तृत जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि गंगा का पानी पाइपलाइन के जरिए जलाशयों और जल शोधन संयंत्रों तक लाया जाता है, जहां इसे शुद्ध कर लोगों को पेयजल के रूप में उपलब्ध कराया जाता है। दशरथ मांझी को श्रद्धांजलि, संघर्ष को किया नमन गया दौरे के दौरान वे दशरथ मांझी मेमोरियल भी पहुंचे। वहां उन्होंने दशरथ मांझी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर उन्होंने मांझी के बेटे से आशीर्वाद लिया और परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना। इसके बाद वे उस ऐतिहासिक पहाड़ पर भी गए, जिसे मांझी ने 22 वर्षों तक अपने हाथों से काटकर रास्ता बनाया था। निशांत ने मांझी के अद्भुत दृढ़ संकल्प और अपनी पत्नी के प्रति उनके प्रेम को नमन करते हुए उनके संघर्ष को सलाम किया। नंगे पांव बोधगया भ्रमण, दिखाई आध्यात्मिक आस्था दौरे के दौरान वे बोधगया पहुंचे, जहां उन्होंने नंगे पांव भ्रमण कर अपनी आध्यात्मिक आस्था की मिसाल पेश की। उन्होंने महाबोधि मंदिर में ध्यान लगाया और भगवान बुद्ध के जीवन, उपदेशों और मध्यम मार्ग के सिद्धांतों को समझा। इस दौरान उन्होंने “अप्प दीपो भव” के संदेश के महत्व को भी जाना। बुद्ध के जीवन दर्शन और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण भ्रमण के दौरान उन्होंने जाना कि किस प्रकार सिद्धार्थ गौतम ने मानव जीवन के दुःखों के कारणों को समझने के लिए ज्ञान मार्ग अपनाया और कठोर तपस्या के बाद मध्यम मार्ग का अनुसरण करते हुए बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने बोधि वृक्ष के नीचे ध्यान किया, विदेश से आए पर्यटकों से मुलाकात की और बुद्ध से जुड़ी पुस्तकों का अध्ययन किया। 80 फीट बुद्ध प्रतिमा स्थल भी गए निशांत इसके अलावा वे शयन मुद्रा बुद्ध और 80 फीट बुद्ध प्रतिमा स्थल भी गए। पूरे दौरे की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने पूरे बोधगया क्षेत्र का भ्रमण नंगे पांव किया, जो उनकी गहरी आस्था और आध्यात्मिक झुकाव को दर्शाता है।


