Budget 2026 में सादगी और संस्कार का संगम, निर्मला सीतारमण का दक्षिण भारत आउटफिट बना चर्चा का विषय, जानें साड़ी में क्या है खास

Budget 2026 में सादगी और संस्कार का संगम, निर्मला सीतारमण का दक्षिण भारत आउटफिट बना चर्चा का विषय, जानें साड़ी में क्या है खास

Nirmala Sitharaman Look at Budget 2026: हर साल की तरह इस बार भी बजट के आंकड़ों के साथ-साथ एक और चीज ने सबका ध्यान खींचा वह है वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का पहनावा। 1 फरवरी 2026 को जब उन्होंने लगातार नौवां बजट पेश करने संसद के दरवाजे पर कदम रखा, तो उनकी साड़ी ने भारतीय हस्तशिल्प और परंपरा की खूबसूरती को नए अंदाज में पेश किया। औपचारिक बजट के माहौल में उनका यह पारंपरिक लुक साबित करता है कि शालीनता और सादगी हमेशा प्रभावशाली होती है।

परंपरा से जुड़ा चयन

Budget 2026 के लिए निर्मला सीतारमण ने तमिलनाडु की मशहूर कांजीवरम साड़ी को चुना। यह सिर्फ एक फैशन स्टेटमेंट नहीं था, बल्कि दक्षिण भारतीय संस्कृति और परंपरा को सम्मान देने का प्रतीक भी था। गहरे मैरून रंग की इस साड़ी पर की गई बारीक सुनहरी नक्काशी बेहद संतुलित और सुरुचिपूर्ण लग रही थी।

रंगों का संतुलन और सादगी की चमक

साड़ी का गहरे मैरून रंग और उस पर उभरा कॉन्ट्रास्ट बॉर्डर और साथ में पहना गया पीले रंग का ब्लाउज इन सबने मिलकर उनके पूरे लुक को प्रभावशाली बना दिया। न ज्यादा आभूषण, न कोई दिखावा; फिर भी पूरा व्यक्तित्व आत्मविश्वास और गरिमा से भरा हुआ नजर आया। यही वजह है कि उनका यह लुक सोशल मीडिया से लेकर फैशन चर्चाओं तक में छाया रहा।

क्या खास है कांजीवरम साड़ियों में

कांजीवरम साड़ियां तमिलनाडु के कांचीपुरम में बनाई जाती हैं और इन्हें भारतीय हथकरघा कला की शान माना जाता है। इन साड़ियों में कर्नाटक से लाया गया शुद्ध शहतूत रेशम और गुजरात के सूरत की जरी का इस्तेमाल किया जाता है। भारी रेशम और मजबूत बुनावट के कारण इनका वजन आमतौर पर 750 से 1000 ग्राम तक होता है।

मेहनत और समय की पहचान

एक कांजीवरम साड़ी को तैयार करना आसान काम नहीं होता। इसकी बुनाई बेहद धैर्य और सावधानी से की जाती है, जिसमें कई दिन, कभी-कभी हफ्तों का समय लग जाता है। पारंपरिक रूप से ये साड़ियां नौ गज लंबी होती थीं, हालांकि समय के साथ इनकी लंबाई में बदलाव आया है। फिर भी, इनकी भव्यता और पहचान आज भी वैसी ही बनी हुई है।

सादगी में छुपा संदेश

Budget 2026 के दिन निर्मला सीतारमण का यह पारंपरिक लुक सिर्फ फैशन की बात नहीं था। यह भारतीय संस्कृति, स्थानीय कारीगरों और आत्मनिर्भर हस्तकला के प्रति सम्मान का संदेश भी देता नजर आया। बिना किसी बनावटी चमक के, उनका यह पहनावा एक बार फिर याद दिला गया कि सच्ची शान सादगी और संस्कार में ही होती है।

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