मोतिहारी के पिपरा थाना क्षेत्र स्थित भगवानपुर गांव के उच्च विद्यालय परिसर में 22 फरवरी से 2 मार्च तक नौ दिवसीय श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। विश्व शांति और जन कल्याण के उद्देश्य से आयोजित इस महायज्ञ को लेकर क्षेत्र में तैयारियां जोरों पर हैं। आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं पंचायत समिति सदस्य मयंक कुमार कुशवाहा ने बताया कि यह महायज्ञ प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी अत्यंत श्रद्धा और धूमधाम से आयोजित हो रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि इस वर्ष महायज्ञ स्थल पर 251 देवी-देवताओं की भव्य मूर्तियां स्थापित की गई हैं, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 111 थी। समिति हर साल आयोजन को एक नया और भव्य स्वरूप देने का प्रयास करती है, ताकि श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक अनुभूति मिल सके। प्रवचन का किया जाएगा आयोजन महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हवन, हरिनाम संकीर्तन और प्रवचन का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के अनुसार, दोपहर 12 बजे से सायं 5 बजे तक दूर-दराज से आए संत-महात्मा धर्मोपदेश देंगे। वहीं, रात्रि 7 बजे से देर रात 2 बजे तक वृंदावन धाम की तर्ज पर सुप्रसिद्ध रासलीला का मंचन किया जाएगा, जो इस महायज्ञ का प्रमुख आकर्षण रहेगा। श्रद्धालुओं के मनोरंजन के लिए महायज्ञ स्थल पर झूला मेला, विशाल भंडारा और ‘मौत का कुआं’ जैसे पारंपरिक आकर्षणों की भी व्यवस्था की गई है। महायज्ञ की शुरुआत 22 फरवरी को एक भव्य कलश यात्रा के साथ होगी, जिसमें लगभग 1100 कन्याओं की सहभागिता प्रस्तावित है। यह कलश यात्रा पूरे क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का संचार करेगी। अध्यक्ष ने लोगों से की आयोजन में भाग लेने की अपील आयोजन समिति ने बताया कि इस महायज्ञ में देश-प्रदेश के कई प्रख्यात साधु-संतों के साथ-साथ बिहार सरकार के कैबिनेट मंत्री और अनेक विधायक भी शिरकत करेंगे। अध्यक्ष मयंक कुमार कुशवाहा ने क्षेत्रवासियों एवं श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस पुण्य आयोजन में भाग लें और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि शांत, सुव्यवस्थित और भक्तिपूर्ण वातावरण में आयोजित यह महायज्ञ पिछले दस वर्षों से क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मोतिहारी के पिपरा थाना क्षेत्र स्थित भगवानपुर गांव के उच्च विद्यालय परिसर में 22 फरवरी से 2 मार्च तक नौ दिवसीय श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। विश्व शांति और जन कल्याण के उद्देश्य से आयोजित इस महायज्ञ को लेकर क्षेत्र में तैयारियां जोरों पर हैं। आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं पंचायत समिति सदस्य मयंक कुमार कुशवाहा ने बताया कि यह महायज्ञ प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी अत्यंत श्रद्धा और धूमधाम से आयोजित हो रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि इस वर्ष महायज्ञ स्थल पर 251 देवी-देवताओं की भव्य मूर्तियां स्थापित की गई हैं, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 111 थी। समिति हर साल आयोजन को एक नया और भव्य स्वरूप देने का प्रयास करती है, ताकि श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक अनुभूति मिल सके। प्रवचन का किया जाएगा आयोजन महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हवन, हरिनाम संकीर्तन और प्रवचन का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के अनुसार, दोपहर 12 बजे से सायं 5 बजे तक दूर-दराज से आए संत-महात्मा धर्मोपदेश देंगे। वहीं, रात्रि 7 बजे से देर रात 2 बजे तक वृंदावन धाम की तर्ज पर सुप्रसिद्ध रासलीला का मंचन किया जाएगा, जो इस महायज्ञ का प्रमुख आकर्षण रहेगा। श्रद्धालुओं के मनोरंजन के लिए महायज्ञ स्थल पर झूला मेला, विशाल भंडारा और ‘मौत का कुआं’ जैसे पारंपरिक आकर्षणों की भी व्यवस्था की गई है। महायज्ञ की शुरुआत 22 फरवरी को एक भव्य कलश यात्रा के साथ होगी, जिसमें लगभग 1100 कन्याओं की सहभागिता प्रस्तावित है। यह कलश यात्रा पूरे क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का संचार करेगी। अध्यक्ष ने लोगों से की आयोजन में भाग लेने की अपील आयोजन समिति ने बताया कि इस महायज्ञ में देश-प्रदेश के कई प्रख्यात साधु-संतों के साथ-साथ बिहार सरकार के कैबिनेट मंत्री और अनेक विधायक भी शिरकत करेंगे। अध्यक्ष मयंक कुमार कुशवाहा ने क्षेत्रवासियों एवं श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस पुण्य आयोजन में भाग लें और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि शांत, सुव्यवस्थित और भक्तिपूर्ण वातावरण में आयोजित यह महायज्ञ पिछले दस वर्षों से क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।


