भागलपुर में नीलगाय फसलें कर रहे बर्बाद:किसान मक्का-टमाटर के लिए हैं परेशान, वन विभाग से शिकायत तक कर चुके

भागलपुर के नाथनगर में नीलगाय से किसान परेशान हो गए हैं। नीलगाय के झुंड लगातार मक्का, टमाटर और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जिससे किसानों को आर्थिक क्षति हो रही है। स्थानीय किसानों के अनुसार, लगभग 6 नीलगायों का झुंड शाम होते ही खेतों में प्रवेश कर जाता है और फसलों को नष्ट कर देता है। दिन में किसान निगरानी करते हैं, लेकिन रात में स्थिति गंभीर हो जाती है। किसानों ने खेतों की घेराबंदी करने और शोर मचाकर नीलगायों को भगाने का प्रयास किया है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं मिल पाया है। अमरी विशनपुर के किसान राजेश मंडल ने बताया कि किसानों ने इस समस्या को लेकर कई बार वन विभाग में शिकायत की है। हालांकि, अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि नीलगाय के कारण हर साल फसल पर खर्च बढ़ रहा है, जबकि उत्पादन घट रहा है, जिससे उनकी आय प्रभावित हो रही है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे खेती छोड़ने पर मजबूर हो सकते हैं। राघोपुर दियारा और रंन्नुचक इलाकों में नीलगाय के कारण किसान परेशान हैं। आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर करती कई परिवारों की आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर करती है। किसानों ने प्रशासन और वन विभाग से नीलगाय से राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है, जिसमें फेंसिंग, गश्त बढ़ाना या नीलगाय को सुरक्षित रूप से अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित करना शामिल है। वर्तमान में नाथनगर क्षेत्र के किसान नीलगाय की समस्या से जूझ रहे हैं और सरकार से तत्काल कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि उनकी फसल और आजीविका सुरक्षित रह सके। भागलपुर के नाथनगर में नीलगाय से किसान परेशान हो गए हैं। नीलगाय के झुंड लगातार मक्का, टमाटर और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जिससे किसानों को आर्थिक क्षति हो रही है। स्थानीय किसानों के अनुसार, लगभग 6 नीलगायों का झुंड शाम होते ही खेतों में प्रवेश कर जाता है और फसलों को नष्ट कर देता है। दिन में किसान निगरानी करते हैं, लेकिन रात में स्थिति गंभीर हो जाती है। किसानों ने खेतों की घेराबंदी करने और शोर मचाकर नीलगायों को भगाने का प्रयास किया है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं मिल पाया है। अमरी विशनपुर के किसान राजेश मंडल ने बताया कि किसानों ने इस समस्या को लेकर कई बार वन विभाग में शिकायत की है। हालांकि, अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि नीलगाय के कारण हर साल फसल पर खर्च बढ़ रहा है, जबकि उत्पादन घट रहा है, जिससे उनकी आय प्रभावित हो रही है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे खेती छोड़ने पर मजबूर हो सकते हैं। राघोपुर दियारा और रंन्नुचक इलाकों में नीलगाय के कारण किसान परेशान हैं। आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर करती कई परिवारों की आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर करती है। किसानों ने प्रशासन और वन विभाग से नीलगाय से राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है, जिसमें फेंसिंग, गश्त बढ़ाना या नीलगाय को सुरक्षित रूप से अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित करना शामिल है। वर्तमान में नाथनगर क्षेत्र के किसान नीलगाय की समस्या से जूझ रहे हैं और सरकार से तत्काल कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि उनकी फसल और आजीविका सुरक्षित रह सके।  

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