एनआइडी ने डिजाइन की राष्ट्रपति भवन के एट होम की आमंत्रण किट

एनआइडी ने डिजाइन की राष्ट्रपति भवन के एट होम की आमंत्रण किट

Ahmedabad. भारत के 77 वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में होने वाले एट होम कार्यक्रम के लिए अहमदाबाद स्थित राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआइडी) की ओर से आमंत्रण किट को तैयार किया है।

एनआइडी के निदेशक डॉ. अशोक मोंडल ने शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया कि यह लगातार तीसरा वर्ष है जब संस्थान ने राष्ट्रपति भवन के ‘एट होम’ कार्यक्रम की आमंत्रण किट तैयार की है।

उन्होंने कहा कि इस साल की आमंत्रण किट की विशेषता यह है कि यह पूर्वोत्तर के आठों राज्यों की पारंपरिक कला और संस्कृति से ओतप्रोत है। संस्थान की टीम ने तीन महीने तक 350 कारीगरों से संवाद, शोध और राष्ट्रपति भवन की टीम से परामर्श कर इन्हें तैयार किया है। 950 आमंत्रण किट को तैयार कर राष्ट्रपति भवन भेजा है।

उन्होंने बताया कि इसमें हर राज्य की विशिष्ट परंपरा, कारीगरों की हुनरमंदी और प्राकृतिक वातावरण को ध्यान में रखकर अलग-अलग कलाकृतियों को डिजाइन किया है। संस्थान के प्रो. एंड्रिया नोरोन्हा और प्रो. डॉ. सी.एस. सुसांथ के नेतृत्व में अहमदाबाद और बेंगलूरु स्थित एनआइडी टीमों ने स्थानीय कारीगरों के साथ मिलकर इसे आकार दिया।

इसमें पूर्वोत्तर राज्यों की अर्थव्यवस्था और संस्कृति के मूल आधार में समाहित बांस का उपयोग किया है। त्रिपुरा की परंपरागत तकनीक के तहत लूम पर बुनी गई बांस की चटाई से आमंत्रण बॉक्स तैयार किया है। उसमें रंगे हुए कपास के धागे और बांस की पतली पट्टियों का उपयोग किया है। बाहरी कवर मेघालय में बनाए गए स्मॉक किए बांस के अलंकार से जुड़े हैंडलूम कागज से बना है।कवर और बॉक्स की डिजाइन में असम की हस्तलिखित चित्रकला और उत्तर-पूर्व की वनस्पति व जीव-जगत की प्रेरणा झलकती है।

यह है विशेषता

किट में अष्टकोणीय बांस की बुनाई पैटर्न से बनी एक वॉल हैंगिंग स्क्रोल है, जिसमें सभी राज्यों की चुनिंदा कलाकृतियां प्रदर्शित हैं। इसमें सिक्किम के सिस्नु कपड़े की कढ़ाई- बुनाई है। लेपचा बुनाई परंपरा ‘थारा’ से बनी कृति में यूनेस्को की मिक्स्ड हेरिटेज साइट कंचनजंगा पर्वत के साथ आदिकाल के संबंध को दर्शाती है। मेघालय का ग्रीन बांस मॉसीनरम, असम के ‘गोगोना’ बांस, त्रिपुरा केन और बांस की पट्टियों से सुशोभन कार्य किया है। नागालैंड का दुर्लभ कप़ड़ा,मिजोरम की हस्तकला कपड़ा पुआन चेइ और मणिपुर के तांगखुल नागा समुदाय की निओलिथिक काल से चली आ रही मिट्टी कला परंपरा लोंगपी ब्लेक पोटरी का भी इसमें समावेश किया है।

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