स्मार्ट सिटी कंपनी चार साल से शहर के जिन तीन ऐतिहासिक तालाबों को गटर की गंदगी से बचाने करोड़ों रुपए की लागत से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगवा रही थी, वह काम अब जाकर पूरा होने की कगार पर पहुंचा है। महाराजबंध तालाब के किनारे प्लांट को पूरा करने में 20 से 25 कर्मचारियों की टीम लगी हुई है। प्लांट के सामने फिल्टर मशीन लगाने का काम पूरा हो गया। 10 से 15 दिन के अंदर महाराजबंध तालाब सहित नरैया और खोखो तालाब एसटीपी की टेस्टिंग शुरू हो जाएगी। इससे इन तालाबों में मिल रही तीन बड़े नालों की गंदगी साफ होगी, फिर उसे तालाब में छोड़ा जाएगा।
गंदगी और जलकुंभी के कारण बदहाल
शहर के तालाब, नालों और नालियों की गंदगी और जलकुंभी के कारण बदहाल हैं। 2022 में इन तीन प्रमुख तालाबों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का काम शुरू हुआ था, लेकिन ठेका एजेंसी की मनमानी से दौरान कई बार निर्माण ठप कर दिया गया। नतीजा, नालों की गंदगी से ये तालाब बजबजाते रहे। परंतु अब सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान चालू होने से पूरी गंदगी फिल्टर होगी और उससे निकलने वाले पानी को तालाब में छोड़ने का काम शुरू होगा। इस समय तीनों तालाबों के किनारे मशीनें फिट करने का काम तेजी से कराया जा रहा है। इन तीनों एसटीपी के लिए बेंग्लूर और दिल्ली से फिल्टर और मैकेनिकल स्क्रीनिंग मशीनें मंगाई गई है। जिसे प्लांट में लगाई जा रही है। मौके पर तकनीकी कर्मचारियों ने बताया कि 15 से 20 अप्रैल के बीच ये तीनों प्लांट काम करना शुरू कर देंगे।
महाराजबंध में तीन एमएलडी क्षमता का प्लांट
महाराजबंध तालाब का इतिहास प्राचीन दूधाधारी मठ से जुड़ा हुआ है, लेकिन यह तालाब बूढ़ापारा से लेकर तात्यापारा तरफ से आने वाले नाले की गंदगी से इस कदर बदहाल हो चुका है कि तालाब का एक बड़ा हिस्सा गंदगी से बजबजाता हुआ नजर आता है। इसी गंदगी से बचाने के लिए 3 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट 10 करोड़ों की लागत से बनाने का काम अब अंतिम चरण में है।
नरैया तालाब और खोखो तालाब में 1.1 एमएलडी क्षमता के प्लांट
रायपुर स्मार्ट सिटी प्लान के तहत मुख्य रूप से तीन तालाबों में एसटीपी का निर्माण कराने के लिए 17 करोड़ की स्वीकृति दी गई थी, लेकिन ठेका कंपनी समृद्धि वाटर वर्क और स्मार्ट सिटी कंपनी के इंजीनियरों की मनमानी और लापरवाही के चलते 18 महीने में पूरा होने वाला यह काम चार साल में होने जा रहा है। महाराजबंध तालाब की तरह नरैया तालाब और खोखो तालाब में 1-1 एमएलडी क्षमता का प्लांट तैयार किया जा रहा है। ताकि नाले की गंदगी सीधे इन तालाबों में न जाए।
समृद्धि वॉटरवर्क कंपनी ने पांच से छह बार अवधि बढ़ाई
इन तीनों तालाब में एसटीपी प्लांट लगाने का ठेका समृद्धि वाटर वर्क कंपनी को मिला था, लेकिन यह कंपनी समय पर काम पूरा नहीं कर सकी। इस दौरान स्मार्ट सिटी के अफसरों ने पांच से छह बार समय अवधि बढ़ाई। इसके बाद अब जाकर तीनों एसटीपी प्लांट में फिल्टर मशीन लगाने के साथ ही नालों का कचरा अलग करने के लिए मैकेनिकल स्क्रीनिंग लगाने का काम कराया जा रहा है।
अब जल्द शुरू होंगे तीनों एसटीपी प्लांट
लगातार मॉनिटरिंग और महापौर मीनल चौबे के सख्त हिदायत के बाद ठेका कंपनी के काम में तेजी आई है। तालाबों के एसटीपी प्लांट में मशीनें लगाने का काम अंतिम चरण में हैं। 15 से 20 अप्रैल के बीच तीन जगहों पर चालू हो जाएगा।
अतुल चोपड़ा, कार्यपालन अभियंता, स्मार्ट सिटी कंपनी


