बिहार में खनन और राजस्व व्यवस्था को लेकर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने आज प्रेसवार्ता करते हुए कई अहम दावे और घोषणाएं कीं। उन्होंने साफ कहा कि, पहले खनन विभाग पर बाहुबलियों का दबदबा रहता था, लेकिन अब यह विभाग “भय” से निकलकर पूरी तरह “राजस्व आधारित” व्यवस्था में बदल चुका है। राजस्व में दोगुना उछाल, 3592 करोड़ का आंकड़ा पार विजय सिन्हा ने बताया कि, वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद कुल 3592 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल हुआ, जिसे उन्होंने “नया इतिहास” बताया। राज्य के 21 जिलों ने 100% लक्ष्य हासिल कर इस उपलब्धि में अहम योगदान दिया। अवैध खनन पर सख्ती, 78 घाटों को किया सरेंडर डिप्टी सीएम ने बताया कि, बिहार में फिलहाल 473 बालू घाट संचालित हो रहे हैं। वहीं, 78 घाटों को संचालकों द्वारा सरेंडर कर दिया गया, जिससे करीब 600 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। ये घाट अधिक बोली लगाकर अवैध खनन के उद्देश्य से लिए गए थे, लेकिन सख्ती बढ़ने के बाद इन्हें छोड़ना पड़ा। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सरेंडर करने वाले ऐसे लोगों को भविष्य में किसी भी टेंडर प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा। डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता
खनन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए कई डिजिटल कदम उठाए गए हैं— इसके अलावा “बिहारी योद्धा पुरस्कार” के तहत अवैध खनन की सूचना देने वाले 96 लोगों को सम्मानित किया गया है। नई नीलामी और निवेश की तैयारी
सरकार ने खनन क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए नई नीलामी प्रक्रियाओं की घोषणा की है— सरकार ने खनन क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए नई नीलामी प्रक्रियाओं की घोषणा की है: बाहरी खनिज पर सख्त नियम विजय सिन्हा ने एक बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि, ‘अब दूसरे राज्यों से बालू या अन्य खनिज लाने वाले वाहनों के लिए ट्रांजिट पास अनिवार्य होगा। नियम का उल्लंघन करने पर 25 गुना तक जुर्माना लगाया जाएगा।’ पत्थर खनन के लिए नई योजना सरकार ने पत्थर खनन को व्यवस्थित करने के लिए 30 स्थानों का चयन किया है। जल्द ही इन क्षेत्रों के लिए नई नीति और प्रक्रिया की घोषणा की जाएगी। डिप्टी CM ने कहा कि इन सभी कदमों से न केवल राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि अवैध खनन पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। बिहार में खनन और राजस्व व्यवस्था को लेकर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने आज प्रेसवार्ता करते हुए कई अहम दावे और घोषणाएं कीं। उन्होंने साफ कहा कि, पहले खनन विभाग पर बाहुबलियों का दबदबा रहता था, लेकिन अब यह विभाग “भय” से निकलकर पूरी तरह “राजस्व आधारित” व्यवस्था में बदल चुका है। राजस्व में दोगुना उछाल, 3592 करोड़ का आंकड़ा पार विजय सिन्हा ने बताया कि, वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद कुल 3592 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल हुआ, जिसे उन्होंने “नया इतिहास” बताया। राज्य के 21 जिलों ने 100% लक्ष्य हासिल कर इस उपलब्धि में अहम योगदान दिया। अवैध खनन पर सख्ती, 78 घाटों को किया सरेंडर डिप्टी सीएम ने बताया कि, बिहार में फिलहाल 473 बालू घाट संचालित हो रहे हैं। वहीं, 78 घाटों को संचालकों द्वारा सरेंडर कर दिया गया, जिससे करीब 600 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। ये घाट अधिक बोली लगाकर अवैध खनन के उद्देश्य से लिए गए थे, लेकिन सख्ती बढ़ने के बाद इन्हें छोड़ना पड़ा। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सरेंडर करने वाले ऐसे लोगों को भविष्य में किसी भी टेंडर प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा। डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता
खनन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए कई डिजिटल कदम उठाए गए हैं— इसके अलावा “बिहारी योद्धा पुरस्कार” के तहत अवैध खनन की सूचना देने वाले 96 लोगों को सम्मानित किया गया है। नई नीलामी और निवेश की तैयारी
सरकार ने खनन क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए नई नीलामी प्रक्रियाओं की घोषणा की है— सरकार ने खनन क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए नई नीलामी प्रक्रियाओं की घोषणा की है: बाहरी खनिज पर सख्त नियम विजय सिन्हा ने एक बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि, ‘अब दूसरे राज्यों से बालू या अन्य खनिज लाने वाले वाहनों के लिए ट्रांजिट पास अनिवार्य होगा। नियम का उल्लंघन करने पर 25 गुना तक जुर्माना लगाया जाएगा।’ पत्थर खनन के लिए नई योजना सरकार ने पत्थर खनन को व्यवस्थित करने के लिए 30 स्थानों का चयन किया है। जल्द ही इन क्षेत्रों के लिए नई नीति और प्रक्रिया की घोषणा की जाएगी। डिप्टी CM ने कहा कि इन सभी कदमों से न केवल राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि अवैध खनन पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।


