‘विरासत को खत्म करने के लिए नए अपने काफी हैं’:रोहिणी का इशारों में तेजस्वी, संजय यादव पर तंज- अंधकार सिर चढ़े तो बुद्धि हरता है

‘विरासत को खत्म करने के लिए नए अपने काफी हैं’:रोहिणी का इशारों में तेजस्वी, संजय यादव पर तंज- अंधकार सिर चढ़े तो बुद्धि हरता है

रोहिणी आचार्या ने एक बार फिर से इशारों-इशारों में तेजस्वी और संजय यादव पर निशाना साधा है। रोहिणी ने X पर लिखा है- ‘बड़ी शिद्दत से बनाई और खड़ी की गई ‘बड़ी विरासत’ को तहस – नहस करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती, ‘अपने’ और अपनों के चंद षड्यंत्रकारी ‘नए बने अपने’ ही काफी होते हैं। हैरानी तो तब होती है , जब ‘जिसकी’ वजह से पहचान होती है , जिसकी वजह से वजूद होता है , उस पहचान, उस वजूद के निशान को बहकावे में आ कर मिटाने और हटाने पर ‘अपने’ ही आमादा हो जाते हैं। जब विवेक पर पर्दा पड़ जाता है, अहंकार सिर पर चढ़ जाता है। तब ‘विनाशक’ ही आंख – नाक और कान बन बुद्धि – विवेक हर लेता है।’ चुनाव में हार के बाद से लालू परिवार में बवाल बिहार विधानसभा में करारी हार के बाद से ही लालू परिवार में घमासान मचा हुआ है। परिवार बिखर रहा, इसका आरोप तेजस्वी के करीबी संजय यादव और रमीज नेमत पर लग रहा है। तेजप्रताप यादव अब तक इन्हें जयचंद बताते थे उसके खिलाफ अब लालू यादव की बेटी रोहिणी ने भी मोर्चा खोल रखा है। रोहिणी ने तेजस्वी के करीबी संजय यादव और रमीज नेमत पर गंभीर आरोप लगाए थे। रोहिणी और तेजस्वी के बीच विवाद की शुरुआत ऐसा नहीं है कि तेजस्वी पर रोहिणी का गुस्सा चुनाव परिणाम आने के बाद भड़का। विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान वह पटना पहुंचीं थी। रिजल्ट आने से पहले जब तेजस्वी यादव की गाड़ी में उनकी सीट पर तेजस्वी के राइट हैंड माने जाने वाले राज्यसभा सांसद संजय यादव बैठे दिखे तो रोहिणी भड़क गईं। रोहिणी ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा- ‘लालू प्रसाद या तेजस्वी की जगह कोई और बैठे यह कतई मंजूर नहीं.. फ्रंट सीट सदैव पार्टी के शीर्ष नेता के लिए चिह्नित है।’ यह लिखने के बाद रोहिणी ने अपना अकाउंट अस्थायी रूप से प्राइवेट कर लिया था। उन्होंने परिवार के सदस्यों को अनफॉलो कर दिया था। तेजस्वी और संजय ने विवाद पर दी सफाई इस पर तेजस्वी ने कहा था, ‘रोहिणी दीदी सिर्फ बड़ी बहन नहीं, मां जैसी हैं। उन्होंने मुझे पाल-पोसकर बड़ा किया है। पापा को किडनी दी है। उनकी यह कुर्बानी अतुलनीय है। इस पर राजनीति करना शर्मनाक है।’ संजय यादव ने सफाई दी, ‘तेजस्वी की गाड़ी में आगे बैठना कार्यशैली और जिम्मेदारी का हिस्सा था, ताकत दिखाने का प्रयास नहीं। जो त्याग रोहिणी दीदी ने किया है, उसे भाजपा या बाहरी लोग समझ नहीं सकते।’ हार की जिम्मेदारी को लेकर रोहिणी का पारा हाई बिहार विधानसभा चुनाव के बाद रोहिणी का सख्त तेवर दिखा। उन्होंने हार की जिम्मेदारी को लेकर तेजस्वी यादव और उनके करीबी नेताओं पर सवाल उठाए। रोहिणी ने आरोप लगाया कि राबड़ी आवास में उन पर चप्पल उठाई गई। खासतौर से तेजस्वी के 2 करीबियों संजय यादव और रमीज नेमत को रोहिणी ने निशाने पर लिया। रोहिणी ने परिवार से नाता तोड़ने और राजनीति छोड़ने तक का ऐलान कर दिया। रोहिणी ने मीडिया में बयान दिया, ‘मेरा कोई परिवार नहीं है, संजय-रमीज, तेजस्वी से पूछिए। उन्हीं लोगों ने मुझे परिवार से निकाला। उन्हें जिम्मेदारी (चुनाव हारने की) लेनी नहीं है। पूरी दुनिया सवाल कर रही है कि पार्टी का ऐसा हाल क्यों हुआ?’ इसी दौरान बिहार के एक पत्रकार ने रोहिणी के मायके में रहने पर सवाल उठाया तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा। उन्होंने कहा, ‘बेटी कितने समय मायके में रहेगी, यह बाहर के लोग तय नहीं करेंगे। मां-बाप और बेटी तय करेगी।’ रोहिणी के सवालों का जवाब न तो संजय यादव या रमीज खान दे पाए, न कोई पार्टी प्रवक्ता। तेजस्वी को भी कोई जवाब नहीं सूझा। रोहिणी ने हार की जवाबदेही लेने का सवाल उठाया तो तेजस्वी यादव पत्नी और बच्चों के साथ यूरोप की यात्रा पर निकल गए। जानिए कौन है संजय यादव संजय यादव हरियाणा के महेंद्रगढ़ के नंगल सिरोही गांव के हैं। चुनावी हलफनामे के मुताबिक, संजय कंप्यूटर साइंस में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। 2.18 करोड़ संपत्ति है। तेजस्वी और संजय की मुलाकात दिल्ली में 2012 के आसपास क्रिकेट ग्राउंड पर हुई थी। 2013 में जब लालू यादव चारा घोटाले में जेल गए तब तेजस्वी पटना लौट आए। राजनीति सीखने लगे तब उन्होंने अपने दोस्त संजय को पटना बुला लिया। संजय मल्टी नेशनल IT कंपनी की नौकरी छोड़कर आ गए। सीनियर जर्नलिस्ट संतोष सिंह अपनी किताब ‘जेपी टू बीजेपी: बिहार आफ्टर लालू एंड नीतीश’ में लिखते हैं, ‘संजय ने तेजस्वी को समाजवादी राजनीति से जुड़ी कई किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित किया। देश के शीर्ष नेताओं अटल बिहारी वाजपेयी, जॉर्ज फर्नांडीस, कांशीराम, मायावती, चंद्रशेखर और वीपी सिंह के भाषण दिखाते और सुनाते थे, ताकि अच्छे भाषण की कला और बारीकी सीख सके। संजय रोज लालू के दिल्ली के तुगलक रोड स्थित आवास पर तेजस्वी के साथ चार से 5 घंटे साथ बिताते थे।’ पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रियदर्शी रंजन बताते हैं, ‘बिहार आकर संजय ने कुछ साल तक यहां की राजनीति को समझा, चुनावी समीकरण और आंकड़ों पर काम किया। जरूरत के मुताबिक RJD में कई तरह के तकनीकी और डिजिटल दौर के बदलाव भी किए।’ अब पढ़िए, कौन है रमीज नेमत? रमीज सपा के पूर्व सपा सांसद रिजवान जहीर के दामाद हैं। वह RJD का सोशल मीडिया और चुनाव का कामकाज देखते हैं। उनकी पत्नी जेबा रिजवान दो बार तुलसीपुर विधानसभा से चुनाव लड़ चुकी हैं। रोहिणी के पोस्ट के बाद से ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ उनकी तस्वीरें वायरल होने लगी हैं। विवादों से रमीज का पुराना नाता तुलसीपुर तहसील के भंगहाकला गांव के रहने वाले रमीज पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। उन पर 2021 पंचायत चुनाव के दौरान हिंसा, आगजनी और बलवे का केस लगा। हालांकि, वह बाद में कोर्ट से दोषमुक्त हो गए। रमीज 2022 तुलसीपुर नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन फिरोज पप्पू हत्याकांड में नामजद आरोपी हैं। इस मामले में उन पर एनएसए और गैंगस्टर एक्ट लगा। कौशांबी के कोखराज थाने में भी रमीज पर हत्या का केस दर्ज है। लंबे समय तक बलरामपुर जेल में रहने के बाद वह अप्रैल 2025 में जमानत पर रिहा हुए। रमीज के नाम के साथ रोहिणी आचार्य के सार्वजनिक आरोपों ने अब एक नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। इसके बाद लालू परिवार की अंदरूनी खींचतान, चुनावी रणनीति और बाहरी दखल की चर्चा हो रही है। संजय यादव के तेजस्वी की गाड़ी के फ्रंट सीट पर बैठने पर शुरू हुआ विवाद 18 सितंबर को लालू यादव की दूसरी बेटी रोहिणी आचार्य ने फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर किया था। पोस्ट आलोक कुमार नाम के एक RJD समर्थक का था। पोस्ट में लिखा था- पूरे बिहार के साथ-साथ हम तमाम लोग फ्रंट सीट पर लालू जी और तेजस्वी यादव को बैठे/बैठते देखने के अभ्यस्थ हैं। उनकी जगह पर कोई और बैठे यह हमें कतई मंजूर नहीं। जिन्हें एक दोयम दर्जे के व्यक्ति में एक विलक्षण रणनीतिकार-सलाहकार-तारणहार नजर आता है… ये बात अलग है। संजय की बढ़ती ताकत से घरवाले नाराज कहा जाता है कि लालू यादव ने तेजस्वी यादव को फ्री हैंड दे दिया है। जब से तेजस्वी को पूरी पावर मिली है, उनके करीबी संजय यादव का प्रभाव भी बढ़ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेजस्वी क्या करेंगे, किससे बात करेंगे, उनकी रणनीति क्या होगी सब संजय यादव तय करते हैं। रोहिणी ने इशारों-इशारों में संजय को निशाने पर लिया है। हालांकि, इससे पहले तेज प्रताप यादव खुलेआम आलोचना कर चुके हैं। आजकल तेज प्रताप ‘जयचंद’ कह कर निशाना साधते हैं। कहा जाता है कि उनका इशारा संजय की तरफ ही है। तेज प्रताप के पुराने पोस्ट को पढ़िए… मई 2025 को लालू ने तेजप्रताप को पार्टी-परिवार से निकाला इसी साल 24 मई को तेज प्रताप यादव के फेसबुक अकाउंट से एक तस्वीर पोस्ट की गई थी। जिसमें तेजप्रताप के अनुष्का यादव के साथ 12 साल से रिश्ते में होने की बात थी। हालांकि, कुछ ही घंटों बाद उस पोस्ट को डिलीट कर दिया गया। इसके बाद तेज प्रताप यादव ने रात 10:56 बजे X पर पोस्ट कर कहा कि हमारे सोशल मीडिया हैंडल को हैक कर लिया गया है और हमें बदनाम और परेशान करने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद तेजप्रताप-अनुष्का के कई फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। अगले दिन 25 मई को लालू यादव ने तेज प्रताप को पार्टी और परिवार से बाहर निकाल दिया। लालू के फैसले को परिवार का समर्थन तेज प्रताप को पार्टी और परिवार से निकालने के फैसले पर तेजस्वी यादव ने कहा, ‘हमारी पार्टी के अध्यक्ष ने इस बारे में अपनी भावना स्पष्ट कर दी है। कोई अपनी निजी जिंदगी में क्या कर रहा है, ये किसी से पूछकर नहीं करता। मुझे भी इस बारे में मीडिया के जरिए ही जानकारी मिली है।’ लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने X पर लिखा, ‘जो परिवेश, परंपरा, परिवार और परवरिश की मर्यादा का ख्याल रखते हैं, उन पर कभी सवाल नहीं उठते हैं, जो अपना विवेक त्याग कर मर्यादित आचरण व परिवार की प्रतिष्ठा की सीमा को बारम्बार लांघने की गलती- धृष्टता करते हैं, वो खुद को आलोचना का पात्र खुद ही बनाते हैं।’ बेदखल होने के 35 दिन बाद तेज प्रताप ने की बगावत पार्टी और परिवार से बेदखली के 35 दिन बाद तेज प्रताप ने RJD से बगावत कर दिया। उन्होंने महुआ विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया और 5 छोटे दलों भोजपुरिया जन मोर्चा, विकास वंचित इंसान पार्टी, संयुक्त किसान विकास पार्टी, प्रगतिशील जनता पार्टी और वाजिब अधिकार पार्टी के साथ ‘जन शक्ति मोर्चा’ बनाया और 43 सीटों पर चुनाव लड़ा। तेजप्रताप के सारे कैंडिडेट हारे वो अपनी सीट महुआ भी नहीं बचा पाए। ————————— ये भी पढ़ें लालू की बेटी बोली- पार्टी और परिवार छोड़ रही हूं:संजय यादव-रमीज ने मुझे यही करने को कहा; तेजप्रताप ने भी संजय को बताया था जयचंद बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार मिलने के बाद एक बार फिर संजय यादव को लेकर लालू परिवार में बवाल तेज हो गया है। लालू को किडनी देने वाली दूसरे नंबर की बेटी रोहिणी आचार्य ने शनिवार को X पर पोस्ट कर लिखा है, ‘मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं। संजय यादव और रमीज ने मुझसे यही करने को कहा था और मैं सारा दोष अपने ऊपर ले रही हूं।’ पूरी खबर पढ़ें रोहिणी आचार्या ने एक बार फिर से इशारों-इशारों में तेजस्वी और संजय यादव पर निशाना साधा है। रोहिणी ने X पर लिखा है- ‘बड़ी शिद्दत से बनाई और खड़ी की गई ‘बड़ी विरासत’ को तहस – नहस करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती, ‘अपने’ और अपनों के चंद षड्यंत्रकारी ‘नए बने अपने’ ही काफी होते हैं। हैरानी तो तब होती है , जब ‘जिसकी’ वजह से पहचान होती है , जिसकी वजह से वजूद होता है , उस पहचान, उस वजूद के निशान को बहकावे में आ कर मिटाने और हटाने पर ‘अपने’ ही आमादा हो जाते हैं। जब विवेक पर पर्दा पड़ जाता है, अहंकार सिर पर चढ़ जाता है। तब ‘विनाशक’ ही आंख – नाक और कान बन बुद्धि – विवेक हर लेता है।’ चुनाव में हार के बाद से लालू परिवार में बवाल बिहार विधानसभा में करारी हार के बाद से ही लालू परिवार में घमासान मचा हुआ है। परिवार बिखर रहा, इसका आरोप तेजस्वी के करीबी संजय यादव और रमीज नेमत पर लग रहा है। तेजप्रताप यादव अब तक इन्हें जयचंद बताते थे उसके खिलाफ अब लालू यादव की बेटी रोहिणी ने भी मोर्चा खोल रखा है। रोहिणी ने तेजस्वी के करीबी संजय यादव और रमीज नेमत पर गंभीर आरोप लगाए थे। रोहिणी और तेजस्वी के बीच विवाद की शुरुआत ऐसा नहीं है कि तेजस्वी पर रोहिणी का गुस्सा चुनाव परिणाम आने के बाद भड़का। विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान वह पटना पहुंचीं थी। रिजल्ट आने से पहले जब तेजस्वी यादव की गाड़ी में उनकी सीट पर तेजस्वी के राइट हैंड माने जाने वाले राज्यसभा सांसद संजय यादव बैठे दिखे तो रोहिणी भड़क गईं। रोहिणी ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा- ‘लालू प्रसाद या तेजस्वी की जगह कोई और बैठे यह कतई मंजूर नहीं.. फ्रंट सीट सदैव पार्टी के शीर्ष नेता के लिए चिह्नित है।’ यह लिखने के बाद रोहिणी ने अपना अकाउंट अस्थायी रूप से प्राइवेट कर लिया था। उन्होंने परिवार के सदस्यों को अनफॉलो कर दिया था। तेजस्वी और संजय ने विवाद पर दी सफाई इस पर तेजस्वी ने कहा था, ‘रोहिणी दीदी सिर्फ बड़ी बहन नहीं, मां जैसी हैं। उन्होंने मुझे पाल-पोसकर बड़ा किया है। पापा को किडनी दी है। उनकी यह कुर्बानी अतुलनीय है। इस पर राजनीति करना शर्मनाक है।’ संजय यादव ने सफाई दी, ‘तेजस्वी की गाड़ी में आगे बैठना कार्यशैली और जिम्मेदारी का हिस्सा था, ताकत दिखाने का प्रयास नहीं। जो त्याग रोहिणी दीदी ने किया है, उसे भाजपा या बाहरी लोग समझ नहीं सकते।’ हार की जिम्मेदारी को लेकर रोहिणी का पारा हाई बिहार विधानसभा चुनाव के बाद रोहिणी का सख्त तेवर दिखा। उन्होंने हार की जिम्मेदारी को लेकर तेजस्वी यादव और उनके करीबी नेताओं पर सवाल उठाए। रोहिणी ने आरोप लगाया कि राबड़ी आवास में उन पर चप्पल उठाई गई। खासतौर से तेजस्वी के 2 करीबियों संजय यादव और रमीज नेमत को रोहिणी ने निशाने पर लिया। रोहिणी ने परिवार से नाता तोड़ने और राजनीति छोड़ने तक का ऐलान कर दिया। रोहिणी ने मीडिया में बयान दिया, ‘मेरा कोई परिवार नहीं है, संजय-रमीज, तेजस्वी से पूछिए। उन्हीं लोगों ने मुझे परिवार से निकाला। उन्हें जिम्मेदारी (चुनाव हारने की) लेनी नहीं है। पूरी दुनिया सवाल कर रही है कि पार्टी का ऐसा हाल क्यों हुआ?’ इसी दौरान बिहार के एक पत्रकार ने रोहिणी के मायके में रहने पर सवाल उठाया तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा। उन्होंने कहा, ‘बेटी कितने समय मायके में रहेगी, यह बाहर के लोग तय नहीं करेंगे। मां-बाप और बेटी तय करेगी।’ रोहिणी के सवालों का जवाब न तो संजय यादव या रमीज खान दे पाए, न कोई पार्टी प्रवक्ता। तेजस्वी को भी कोई जवाब नहीं सूझा। रोहिणी ने हार की जवाबदेही लेने का सवाल उठाया तो तेजस्वी यादव पत्नी और बच्चों के साथ यूरोप की यात्रा पर निकल गए। जानिए कौन है संजय यादव संजय यादव हरियाणा के महेंद्रगढ़ के नंगल सिरोही गांव के हैं। चुनावी हलफनामे के मुताबिक, संजय कंप्यूटर साइंस में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। 2.18 करोड़ संपत्ति है। तेजस्वी और संजय की मुलाकात दिल्ली में 2012 के आसपास क्रिकेट ग्राउंड पर हुई थी। 2013 में जब लालू यादव चारा घोटाले में जेल गए तब तेजस्वी पटना लौट आए। राजनीति सीखने लगे तब उन्होंने अपने दोस्त संजय को पटना बुला लिया। संजय मल्टी नेशनल IT कंपनी की नौकरी छोड़कर आ गए। सीनियर जर्नलिस्ट संतोष सिंह अपनी किताब ‘जेपी टू बीजेपी: बिहार आफ्टर लालू एंड नीतीश’ में लिखते हैं, ‘संजय ने तेजस्वी को समाजवादी राजनीति से जुड़ी कई किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित किया। देश के शीर्ष नेताओं अटल बिहारी वाजपेयी, जॉर्ज फर्नांडीस, कांशीराम, मायावती, चंद्रशेखर और वीपी सिंह के भाषण दिखाते और सुनाते थे, ताकि अच्छे भाषण की कला और बारीकी सीख सके। संजय रोज लालू के दिल्ली के तुगलक रोड स्थित आवास पर तेजस्वी के साथ चार से 5 घंटे साथ बिताते थे।’ पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रियदर्शी रंजन बताते हैं, ‘बिहार आकर संजय ने कुछ साल तक यहां की राजनीति को समझा, चुनावी समीकरण और आंकड़ों पर काम किया। जरूरत के मुताबिक RJD में कई तरह के तकनीकी और डिजिटल दौर के बदलाव भी किए।’ अब पढ़िए, कौन है रमीज नेमत? रमीज सपा के पूर्व सपा सांसद रिजवान जहीर के दामाद हैं। वह RJD का सोशल मीडिया और चुनाव का कामकाज देखते हैं। उनकी पत्नी जेबा रिजवान दो बार तुलसीपुर विधानसभा से चुनाव लड़ चुकी हैं। रोहिणी के पोस्ट के बाद से ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ उनकी तस्वीरें वायरल होने लगी हैं। विवादों से रमीज का पुराना नाता तुलसीपुर तहसील के भंगहाकला गांव के रहने वाले रमीज पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। उन पर 2021 पंचायत चुनाव के दौरान हिंसा, आगजनी और बलवे का केस लगा। हालांकि, वह बाद में कोर्ट से दोषमुक्त हो गए। रमीज 2022 तुलसीपुर नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन फिरोज पप्पू हत्याकांड में नामजद आरोपी हैं। इस मामले में उन पर एनएसए और गैंगस्टर एक्ट लगा। कौशांबी के कोखराज थाने में भी रमीज पर हत्या का केस दर्ज है। लंबे समय तक बलरामपुर जेल में रहने के बाद वह अप्रैल 2025 में जमानत पर रिहा हुए। रमीज के नाम के साथ रोहिणी आचार्य के सार्वजनिक आरोपों ने अब एक नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। इसके बाद लालू परिवार की अंदरूनी खींचतान, चुनावी रणनीति और बाहरी दखल की चर्चा हो रही है। संजय यादव के तेजस्वी की गाड़ी के फ्रंट सीट पर बैठने पर शुरू हुआ विवाद 18 सितंबर को लालू यादव की दूसरी बेटी रोहिणी आचार्य ने फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर किया था। पोस्ट आलोक कुमार नाम के एक RJD समर्थक का था। पोस्ट में लिखा था- पूरे बिहार के साथ-साथ हम तमाम लोग फ्रंट सीट पर लालू जी और तेजस्वी यादव को बैठे/बैठते देखने के अभ्यस्थ हैं। उनकी जगह पर कोई और बैठे यह हमें कतई मंजूर नहीं। जिन्हें एक दोयम दर्जे के व्यक्ति में एक विलक्षण रणनीतिकार-सलाहकार-तारणहार नजर आता है… ये बात अलग है। संजय की बढ़ती ताकत से घरवाले नाराज कहा जाता है कि लालू यादव ने तेजस्वी यादव को फ्री हैंड दे दिया है। जब से तेजस्वी को पूरी पावर मिली है, उनके करीबी संजय यादव का प्रभाव भी बढ़ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेजस्वी क्या करेंगे, किससे बात करेंगे, उनकी रणनीति क्या होगी सब संजय यादव तय करते हैं। रोहिणी ने इशारों-इशारों में संजय को निशाने पर लिया है। हालांकि, इससे पहले तेज प्रताप यादव खुलेआम आलोचना कर चुके हैं। आजकल तेज प्रताप ‘जयचंद’ कह कर निशाना साधते हैं। कहा जाता है कि उनका इशारा संजय की तरफ ही है। तेज प्रताप के पुराने पोस्ट को पढ़िए… मई 2025 को लालू ने तेजप्रताप को पार्टी-परिवार से निकाला इसी साल 24 मई को तेज प्रताप यादव के फेसबुक अकाउंट से एक तस्वीर पोस्ट की गई थी। जिसमें तेजप्रताप के अनुष्का यादव के साथ 12 साल से रिश्ते में होने की बात थी। हालांकि, कुछ ही घंटों बाद उस पोस्ट को डिलीट कर दिया गया। इसके बाद तेज प्रताप यादव ने रात 10:56 बजे X पर पोस्ट कर कहा कि हमारे सोशल मीडिया हैंडल को हैक कर लिया गया है और हमें बदनाम और परेशान करने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद तेजप्रताप-अनुष्का के कई फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। अगले दिन 25 मई को लालू यादव ने तेज प्रताप को पार्टी और परिवार से बाहर निकाल दिया। लालू के फैसले को परिवार का समर्थन तेज प्रताप को पार्टी और परिवार से निकालने के फैसले पर तेजस्वी यादव ने कहा, ‘हमारी पार्टी के अध्यक्ष ने इस बारे में अपनी भावना स्पष्ट कर दी है। कोई अपनी निजी जिंदगी में क्या कर रहा है, ये किसी से पूछकर नहीं करता। मुझे भी इस बारे में मीडिया के जरिए ही जानकारी मिली है।’ लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने X पर लिखा, ‘जो परिवेश, परंपरा, परिवार और परवरिश की मर्यादा का ख्याल रखते हैं, उन पर कभी सवाल नहीं उठते हैं, जो अपना विवेक त्याग कर मर्यादित आचरण व परिवार की प्रतिष्ठा की सीमा को बारम्बार लांघने की गलती- धृष्टता करते हैं, वो खुद को आलोचना का पात्र खुद ही बनाते हैं।’ बेदखल होने के 35 दिन बाद तेज प्रताप ने की बगावत पार्टी और परिवार से बेदखली के 35 दिन बाद तेज प्रताप ने RJD से बगावत कर दिया। उन्होंने महुआ विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया और 5 छोटे दलों भोजपुरिया जन मोर्चा, विकास वंचित इंसान पार्टी, संयुक्त किसान विकास पार्टी, प्रगतिशील जनता पार्टी और वाजिब अधिकार पार्टी के साथ ‘जन शक्ति मोर्चा’ बनाया और 43 सीटों पर चुनाव लड़ा। तेजप्रताप के सारे कैंडिडेट हारे वो अपनी सीट महुआ भी नहीं बचा पाए। ————————— ये भी पढ़ें लालू की बेटी बोली- पार्टी और परिवार छोड़ रही हूं:संजय यादव-रमीज ने मुझे यही करने को कहा; तेजप्रताप ने भी संजय को बताया था जयचंद बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार मिलने के बाद एक बार फिर संजय यादव को लेकर लालू परिवार में बवाल तेज हो गया है। लालू को किडनी देने वाली दूसरे नंबर की बेटी रोहिणी आचार्य ने शनिवार को X पर पोस्ट कर लिखा है, ‘मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं। संजय यादव और रमीज ने मुझसे यही करने को कहा था और मैं सारा दोष अपने ऊपर ले रही हूं।’ पूरी खबर पढ़ें  

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