नई दिल्ली. जेन-Z आंदोलन के बाद नेपाल 5 मार्च को नई सरकार चुनने के लिए मतदान करेगा। अभी वहां अंतरिम सरकार का शासन है, जिसका नेतृत्व पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की कर रही हैं। उन्होंने छह महीने के भीतर चुनाव कराने और सत्ता हस्तांतरण का वादा किया था। आइए, जानें इस चुनाव में कौन मैदान में हैं और प्रक्रिया क्या होगी:
वोटिंग कैसे होगी?
- करीब 1.9 करोड़ लोग नेपाल के प्रतिनिधि सभा के लिए मतदान करेंगे।
- 8 लाख पहली बार वोट डालने वाले मतदाता भी हैं।
- कुल 275 सांसदों का चुनाव होगा।
- 3,400 से अधिक उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। 1,000 से अधिक की उम्र 40 वर्ष से कम है।
दो तरह के मतपत्र क्यों हैं?
- 2015 के संविधान के तहत यहां मिश्रित चुनावी प्रणाली लागू है।
- पहली प्रणाली फर्स्ट पास्ट द पोस्ट है, जिसमें जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिलते हैं, वही सीट जीतता है।
- दूसरी आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली है, जिसमें किसी राजनीतिक दल को मिले कुल वोट प्रतिशत के आधार पर सीटें आवंटित की जाती हैं।
- कुल 165 सीटें फर्स्ट पास्ट द पोस्ट प्रणाली के तहत भरी जाएंगी, जबकि शेष 110 सीटें दूसरी प्रणाली से तय होंगी।
मैदान में मुख्य खिलाड़ी कौन हैं?
बालेंद्र शाह: 35 साल के बालेंद्र रैपर और काठमांडू के मेयर रह चुके हैं और बालेन के नाम से जाने जाते हैं। वह प्रमुख युवा चेहरा हैं। बालेंद्र राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। पार्टी 2022 के चुनाव में चौथे स्थान पर रही थी। इस बार प्रदर्शन बेहतर हो सकता है।
केपी शर्मा ओली: ओली को ही आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। वह अपनी पारंपरिक सीट झापा-5 से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके कार्यकाल में भारत से रिश्तों में तनाव रहा। इसकी मुख्य वजह नेपाल के नए नोटों पर छपे नक्शे में भारत के कुछ हिस्सों को दिखाया गया था। ओली को चीन का करीबी माना जाता है।
गगन थापा: नेपाली कांग्रेस ने युवा गगन थापा (49) को अपना नेता चुना है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की जगह ली है। नेपाली कांग्रेस को भारत के साथ घनिष्ठ संबंध रखने वाली एक उदार पार्टी के रूप में जाना जाता है। थापा ने कहा है कि अगर उनकी सरकार बनी तो वह सभी घोटालों की जांच की जाएगी।
चुनाव में मुख्य मुद्दे क्या हैं?
सितंबर के प्रदर्शनों के दौरान 77 लोगों की मौत हुई थी। इनमें कई प्रदर्शनकारी थे जिन्हें पुलिस ने गोली मारी थी। प्रदर्शन की शुरुआत सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के विरोध में हुई थी, लेकिन यह भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और आर्थिक ठहराव के खिलाफ व्यापक असंतोष में बदल गया। इन्हीं मुद्दों का असर चुनाव में दिखेगा।
भारत की चुनाव पर करीबी नजर
भारत, नेपाल नेपाल की राजनीतिक स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है। पूर्व प्रधानमंत्री ओली के साथ भारत के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। चीन का नेपाल में बड़ा प्रभाव है और वह चाहेगा कि भविष्य की सरकार उसके हितों, खासकर बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के प्रति सहयोगी हो। भारत चाहेगा कि नई सरकार से उसके करीबी रिश्ते रहें।
नतीजे कब तक आएंगे?
165 प्रत्यक्ष रूप से चुनी गई सीटों के परिणाम बैलेट बॉक्स इकट्ठा होने के 24 घंटे के भीतर जारी कर दिए जाएंगे। 110 आनुपातिक प्रतिनिधित्व सीटों के परिणाम आने में दो से तीन दिन लग सकते हैं। 2022 के चुनाव में अंतिम परिणाम आने में दो सप्ताह से अधिक समय लगा था।


