महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की जान लेने वाले बारामती विमान हादसे की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के अनुसार, बारामती हवाई पट्टी पर लैंडिंग के दौरान पायलटों को रनवे को सही ढंग से देखने में भारी कठिनाई हो रही थी। रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि हादसे से पहले विमान के क्रू की ओर से कोई मेडे कॉल (Mayday) भी नहीं दी गई थी।
दो बार की लैंडिंग की कोशिश, फिर हुआ क्रैश
डीजीसीए (DGCA) की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली स्थित वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित ‘लियरजेट 45’ (VT-SSK) विमान ने सुबह 8:10 बजे मुंबई से उड़ान भरी थी। बारामती हवाई पट्टी पर लैंडिंग के दौरान विमान के पायलटों को रनवे दिखाई नहीं दे रहा था, जिसके चलते पहली कोशिश में विमान को वापस हवा में ले जाकर दोबारा लैंडिंग का प्रयास किया गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बारामती पहुंचने पर पायलटों ने पहली कोशिश में रनवे नहीं दिखने की बात कही, जिसके बाद उन्होंने ‘गो-अराउंड’ (विमान को वापस ऊपर ले जाना) किया। दूसरी कोशिश के दौरान पायलटों ने पहले रनवे नहीं दिखने की सूचना दी, लेकिन कुछ ही सेकंड बाद कहा कि अब रनवे दिख रहा है।
जांच में सामने आया है कि विमान ने सुबह 8.18 बजे बारामती से पहला संपर्क किया था। बयान के मुताबिक, रनवे 11 पर पहली बार उतरने की कोशिश के दौरान क्रू ने बताया कि रनवे दिखाई नहीं दे रहा है, जिसके बाद गो-अराउंड किया गया। दूसरी कोशिश में भी पहले रनवे न दिखने की सूचना दी गई, बाद में इसे दिखने की बात कही गई। विमान को 8.43 बजे लैंडिंग की अनुमति दी गई, लेकिन उस क्लीयरेंस की कोई रीडबैक नहीं मिली। कुछ ही क्षणों बाद रनवे के पास आग की लपटें दिखाई दीं और मलबा रनवे 11 के बाईं ओर खेतों के पास मिला।
हादसे से जुड़ी अहम बातें-
हादसे के समय दृश्यता लगभग 3000 मीटर थी, लेकिन अनियंत्रित हवाई क्षेत्र होने के कारण वहां आधुनिक नेविगेशन उपकरणों की कमी थी। बारामती एक अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड है, जहां एयर ट्रैफिक सेवाएं भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के बजाय फ्लाइंग ट्रेनिंग संगठनों द्वारा दी जाती हैं।
पायलटों ने कोई इमरजेंसी सिग्नल नहीं दिया, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि हादसा इतना अचानक हुआ कि उन्हें मेडे कॉल करने का समय ही नहीं मिला।
इस भीषण हादसे की विस्तृत जांच अब एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने अपने हाथ में ले ली है। AAIB के महानिदेशक खुद हादसे की जगह के लिए रवाना हो चुके हैं। जांच एजेंसी फ्लाइट डेटा, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर, मौसम और तकनीकी पहलुओं के आधार पर दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाएगी।


