पटना में NEET छात्रा की मौत के बाद पुलिस की नजर शंभू गर्ल्स हॉस्टल के बिल्डिंग मालिक मनीष चंद्रवंशी उर्फ मनीष रंजन पर टिकी है। सारी जांच अब उसी के इर्द-गिर्द घूम रही है। जांच में सामने आया है एक निजी अस्पताल में 15 हजार की नौकरी करने वाला मनीष पटना और जहानाबाद में अब करोड़ों की प्रॉपर्टी का मालिक है। पटना में गर्ल्स हॉस्टल की बिल्डिंग विवादित जमीन पर बनी है। जिस हॉस्टल में छात्रा बेहोश मिली, मनीष परिवार समेत उसी में रहता है। मनीष का विवादों से पुराना नाता है। उसके ऊपर एक समारोह में हर्ष फायरिंग का मुकदमा भी दर्ज है। जांच पड़ताल में पुलिस को 2 एपिक नंबर भी मिले हैं। बताया जा रहा है कि वो मुखिया का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। मनीष पटना कब आया..? कहां से उसने नौकरी की शुरुआत की…कैसे इतनी बड़ी संपत्ति का मालिक बना..? पुलिस जांच में अब तक जो निकला है, उसे भास्कर ने खंगाला, पढ़िए रिपोर्ट… सबसे पहले जानिए मनीष पटना कब आया… पहली नौकरी क्या थी? मनीष चंद्रवंशी मूलरूप से जहानाबाद जिले का रहने वाला है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मनीष चंद्रवंशी उर्फ मनीष रंजन 2020 में पटना आया और एक निजी अस्पताल में चतुर्थ कर्मचारी के रूप में काम करता था। उसकी महीने की सैलरी 15 हजार रुपए थी। इसी 15 पैसे से मनीष अपने परिवार को पालता था। इसके अलावा उसके पास कोई बड़ी संपत्ति नहीं थी।
इसलिए सवाल उठता है कि मात्र 5 वर्षों में उसके पास इतना पैसा कहां से आया, जिससे वह करोड़ों की बिल्डिंग का मालिक बन बैठा। पुलिस की शुरुआती पड़ताल में यह भी सामने आया है कि नौकरी के दौरान मनीष का कोई बड़ा बिजनेस नहीं था। कोरोना काल बना टर्निंग पॉइंट: ऑक्सीजन एजेंसी कैसे की खड़ी कोरोना महामारी के दौरान जब ऑक्सीजन की भारी किल्लत थी, उसी वक्त मनीष चंद्रवंशी ने एक ऑक्सीजन एजेंसी खड़ी की थी। पुलिस के अनुसार, यहीं से उसकी आमदनी बढ़ती गई। सवाल यह है कि इतनी बड़ी एजेंसी के लिए उसके पास पैसे कहां से आए और कैसे उसने सप्लाई चैन बनाई। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या एजेंसी सरकारी सप्लाई से जुड़ी थी या निजी अस्पतालों को ऑक्सीजन दी जाती थी। अगर सरकारी सप्लाई से संबंध रहा, तो टेंडर, परमिट और लाइसेंस भी जांच के दायरे में है। वहीं, निजी सप्लाई के मामले में यह देखा जा रहा है कि भुगतान किस तरह हुआ और किन खातों में पैसा गया। पटना–जहानाबाद में संपत्ति, विवादित जमीन पर खड़ा किया करोड़ों का हॉस्टल मनीष के नाम पटना में गर्ल्स हॉस्टल की एक बड़ी बिल्डिंग दर्ज है, जिसकी कीमत करोड़ों रुपए बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, यह हॉस्टल एक विवादित जमीन पर बना है। जमीन के कागजात, रजिस्ट्री और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज अब खंगाले जा रहे हैं। इसके अलावा जहानाबाद जिले में भी उसकी संपत्ति की जानकारी सामने आई है। जिसमें एक साधारण नौकरी से निकलकर इतने कम समय में 2 जिलों में जमीन खरीदना और उस पर बिल्डिंग बनवाना, जो जांच के सबसे बड़े विषय बन गए हैं। पुलिस यह भी देख रही है कि क्या इन संपत्तियों में किसी बेनामी लेनदेन का एंगल है। हॉस्टल के ऊपर ही घर, परिवार के साथ उसी इमारत में रहता है मनीष जिस बिल्डिंग में शंभू गर्ल्स हॉस्टल संचालित है, उसी के सबसे ऊपर वाले फ्लोर में मनीष अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहता था। पुलिस के लिए यह तथ्य बेहद अहम है, क्योंकि इससे इमारत में आवाजाही और निगरानी के सवाल सीधे मनीष से जुड़ते हैं। जांच में यह देखा जा रहा है कि घटना वाली रात और उसके बाद कौन-कौन बिल्डिंग में आया-गया। परिवार के वहीं रहने से यह सवाल भी उठता है कि क्या किसी गतिविधि की जानकारी पहले से थी या नहीं। फर्जी वोटर आईडी, चुनावी तैयारी और 3 दिन बाद गिरफ्तारी पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक मनीष के नाम से 2 अलग-अलग EPIC नंबर से वोटर आईडी बनी हैं। एक जहानाबाद के मखदुमपुर और दूसरी कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र का। यह अपने आप में गंभीर मामला है। जांच में पता चल रहा है कि वह अपने गांव से मुखिया का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। वह इतना वर्चस्व वाला बन चुका है कि NEET छात्रा की मौत के बाद उसे तुरंत गिरफ्तार नहीं किया गया। पुलिस की एंट्री 3 दिन बाद हुई और उसके बाद साक्ष्य से छेड़छाड़ न हो, इस आधार पर उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। अब उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी है। शादी समारोह में हर्ष फायरिंग का केस पुलिस के अनुसार मनीष चंद्रवंशी के खिलाफ एक शादी समारोह में हर्ष फायरिंग का मामला दर्ज है। आरोप है कि नाच-गाने के दौरान उसने गोली चलाई, जो एक युवक को लगी थी। इस मामले में आर्म्स एक्ट समेत संबंधित धाराओं में केस दर्ज हुआ था। पुलिस अब इस पुराने केस की फाइल भी खंगाल रही है, ताकि यह देखा जा सके कि मनीष का आपराधिक व्यवहार पैटर्न क्या रहा है और क्या वर्तमान मामले से उसका कोई संबंध है। अब जानिए मनीष की बिल्डिंग में छात्रा के साथ क्या हुआ था, पुलिस की जांच अब तक कहां पहुंची…. छात्रा 2 घंटे तक लड़ती रही, पुलिस ने माना रेप हुआ रेप के दौरान छात्रा से काफी जोर जबरदस्ती की गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार करीब डेढ़ से दो घंटे तक छात्रा दरिंदगी करने वाले से लड़ी। उसके शरीर पर चोट के निशान कुछ यही कहानी बयां कर रहे हैं। प्राइवेट पार्ट में काफी चोट है, इससे यह भी आशंका जताई जा रही है कि रेप करने वाले एक से ज्यादा हो सकते हैं। फिलहाल अब पुलिस ने भी छात्रा से रेप की बात स्वीकार कर ली है। छात्रा की मौत 11 जनवरी को हुई, शुरुआत में पुलिस इसे सुसाइड बता रही थी। सेक्सुअल असॉल्ट से भी इनकार किया था। जबकि परिवार शुरुआत से रेप का आरोप लगा रहा था। परिजनों ने 13 जनवरी को मामले की निष्पक्ष जांच के लिए प्रदर्शन किया, तब भी पुलिस सुसाइड मानती रही और प्रदर्शनकारियों को डंडे मारकर भगाया। मौत के 4 दिन बाद पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने रेप की बात मानी। छात्रा के साथ कितनी देर तक दरिंदगी हुई, शरीर पर कहां-कहां चोट के निशान हैं, प्राइवेट पार्ट में किस तरह चोट आई और मौत का कारण क्या है? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर ने मेडिकल एक्सपर्ट से पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की स्टडी करवाई। पढ़िए पूरी रिपोर्ट.. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार कर रहे जांच: SSP पटना के SSP कार्तिकेय शर्मा ने कहा, ‘अभी तक जो सबूत मिले हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में जो आया है। उसके हिसाब से हम लोग जांच कर रहे हैं। अभी कुछ और सबूत जमा करने हैं। FSL की टीम ने कुछ सैंपल लिए थे, उनकी जांच बाकी है। मृतका के मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेज रहे हैं ताकि अगर किसी वीडियो को डिलीट किया गया हो तो उसे रिकवर कर सकें।’ उन्होंने कहा, ‘जांच का दायरा बढ़ाते हुए हम लोग अलग-अलग पहलुओं पर जांच कर रहे हैं। छात्रा के 5 तारीख को आने और उसके जाने तक का सीसीटीवी फुटेज लिया है। ASP सदर अभिनव के नेतृत्व में SIT का गठन किया गया है।’ DGP ने किया SIT का गठन, जांच करेंगे IG जितेंद्र राणा छात्रा के साथ रेप मामले पर DGP विनय कुमार ने संज्ञान लिया है। उन्होंने हायर लेवल SIT का गठन किया गया है। जोनल IG पटना जितेंद्र राणा को जांच का निर्देश दिया है। SIT में सदर ASP अभिनव, सचिवालय SDPO 1 डॉक्टर अनु, सचिवालय SDPO 2 साकेत कुमार, जक्कनपुर थानेदार ऋतुराज सिंह और कदमकुंआ थानेदार जनमेजय राय और एक महिला पदाधिकारी समेत 7 लोग शामिल हैं। वहीं, SHO पत्रकार नगर रौशनी कुमारी को दूर रखा गया है। पटना में NEET छात्रा की मौत के बाद पुलिस की नजर शंभू गर्ल्स हॉस्टल के बिल्डिंग मालिक मनीष चंद्रवंशी उर्फ मनीष रंजन पर टिकी है। सारी जांच अब उसी के इर्द-गिर्द घूम रही है। जांच में सामने आया है एक निजी अस्पताल में 15 हजार की नौकरी करने वाला मनीष पटना और जहानाबाद में अब करोड़ों की प्रॉपर्टी का मालिक है। पटना में गर्ल्स हॉस्टल की बिल्डिंग विवादित जमीन पर बनी है। जिस हॉस्टल में छात्रा बेहोश मिली, मनीष परिवार समेत उसी में रहता है। मनीष का विवादों से पुराना नाता है। उसके ऊपर एक समारोह में हर्ष फायरिंग का मुकदमा भी दर्ज है। जांच पड़ताल में पुलिस को 2 एपिक नंबर भी मिले हैं। बताया जा रहा है कि वो मुखिया का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। मनीष पटना कब आया..? कहां से उसने नौकरी की शुरुआत की…कैसे इतनी बड़ी संपत्ति का मालिक बना..? पुलिस जांच में अब तक जो निकला है, उसे भास्कर ने खंगाला, पढ़िए रिपोर्ट… सबसे पहले जानिए मनीष पटना कब आया… पहली नौकरी क्या थी? मनीष चंद्रवंशी मूलरूप से जहानाबाद जिले का रहने वाला है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मनीष चंद्रवंशी उर्फ मनीष रंजन 2020 में पटना आया और एक निजी अस्पताल में चतुर्थ कर्मचारी के रूप में काम करता था। उसकी महीने की सैलरी 15 हजार रुपए थी। इसी 15 पैसे से मनीष अपने परिवार को पालता था। इसके अलावा उसके पास कोई बड़ी संपत्ति नहीं थी।
इसलिए सवाल उठता है कि मात्र 5 वर्षों में उसके पास इतना पैसा कहां से आया, जिससे वह करोड़ों की बिल्डिंग का मालिक बन बैठा। पुलिस की शुरुआती पड़ताल में यह भी सामने आया है कि नौकरी के दौरान मनीष का कोई बड़ा बिजनेस नहीं था। कोरोना काल बना टर्निंग पॉइंट: ऑक्सीजन एजेंसी कैसे की खड़ी कोरोना महामारी के दौरान जब ऑक्सीजन की भारी किल्लत थी, उसी वक्त मनीष चंद्रवंशी ने एक ऑक्सीजन एजेंसी खड़ी की थी। पुलिस के अनुसार, यहीं से उसकी आमदनी बढ़ती गई। सवाल यह है कि इतनी बड़ी एजेंसी के लिए उसके पास पैसे कहां से आए और कैसे उसने सप्लाई चैन बनाई। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या एजेंसी सरकारी सप्लाई से जुड़ी थी या निजी अस्पतालों को ऑक्सीजन दी जाती थी। अगर सरकारी सप्लाई से संबंध रहा, तो टेंडर, परमिट और लाइसेंस भी जांच के दायरे में है। वहीं, निजी सप्लाई के मामले में यह देखा जा रहा है कि भुगतान किस तरह हुआ और किन खातों में पैसा गया। पटना–जहानाबाद में संपत्ति, विवादित जमीन पर खड़ा किया करोड़ों का हॉस्टल मनीष के नाम पटना में गर्ल्स हॉस्टल की एक बड़ी बिल्डिंग दर्ज है, जिसकी कीमत करोड़ों रुपए बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, यह हॉस्टल एक विवादित जमीन पर बना है। जमीन के कागजात, रजिस्ट्री और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज अब खंगाले जा रहे हैं। इसके अलावा जहानाबाद जिले में भी उसकी संपत्ति की जानकारी सामने आई है। जिसमें एक साधारण नौकरी से निकलकर इतने कम समय में 2 जिलों में जमीन खरीदना और उस पर बिल्डिंग बनवाना, जो जांच के सबसे बड़े विषय बन गए हैं। पुलिस यह भी देख रही है कि क्या इन संपत्तियों में किसी बेनामी लेनदेन का एंगल है। हॉस्टल के ऊपर ही घर, परिवार के साथ उसी इमारत में रहता है मनीष जिस बिल्डिंग में शंभू गर्ल्स हॉस्टल संचालित है, उसी के सबसे ऊपर वाले फ्लोर में मनीष अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहता था। पुलिस के लिए यह तथ्य बेहद अहम है, क्योंकि इससे इमारत में आवाजाही और निगरानी के सवाल सीधे मनीष से जुड़ते हैं। जांच में यह देखा जा रहा है कि घटना वाली रात और उसके बाद कौन-कौन बिल्डिंग में आया-गया। परिवार के वहीं रहने से यह सवाल भी उठता है कि क्या किसी गतिविधि की जानकारी पहले से थी या नहीं। फर्जी वोटर आईडी, चुनावी तैयारी और 3 दिन बाद गिरफ्तारी पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक मनीष के नाम से 2 अलग-अलग EPIC नंबर से वोटर आईडी बनी हैं। एक जहानाबाद के मखदुमपुर और दूसरी कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र का। यह अपने आप में गंभीर मामला है। जांच में पता चल रहा है कि वह अपने गांव से मुखिया का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। वह इतना वर्चस्व वाला बन चुका है कि NEET छात्रा की मौत के बाद उसे तुरंत गिरफ्तार नहीं किया गया। पुलिस की एंट्री 3 दिन बाद हुई और उसके बाद साक्ष्य से छेड़छाड़ न हो, इस आधार पर उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। अब उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी है। शादी समारोह में हर्ष फायरिंग का केस पुलिस के अनुसार मनीष चंद्रवंशी के खिलाफ एक शादी समारोह में हर्ष फायरिंग का मामला दर्ज है। आरोप है कि नाच-गाने के दौरान उसने गोली चलाई, जो एक युवक को लगी थी। इस मामले में आर्म्स एक्ट समेत संबंधित धाराओं में केस दर्ज हुआ था। पुलिस अब इस पुराने केस की फाइल भी खंगाल रही है, ताकि यह देखा जा सके कि मनीष का आपराधिक व्यवहार पैटर्न क्या रहा है और क्या वर्तमान मामले से उसका कोई संबंध है। अब जानिए मनीष की बिल्डिंग में छात्रा के साथ क्या हुआ था, पुलिस की जांच अब तक कहां पहुंची…. छात्रा 2 घंटे तक लड़ती रही, पुलिस ने माना रेप हुआ रेप के दौरान छात्रा से काफी जोर जबरदस्ती की गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार करीब डेढ़ से दो घंटे तक छात्रा दरिंदगी करने वाले से लड़ी। उसके शरीर पर चोट के निशान कुछ यही कहानी बयां कर रहे हैं। प्राइवेट पार्ट में काफी चोट है, इससे यह भी आशंका जताई जा रही है कि रेप करने वाले एक से ज्यादा हो सकते हैं। फिलहाल अब पुलिस ने भी छात्रा से रेप की बात स्वीकार कर ली है। छात्रा की मौत 11 जनवरी को हुई, शुरुआत में पुलिस इसे सुसाइड बता रही थी। सेक्सुअल असॉल्ट से भी इनकार किया था। जबकि परिवार शुरुआत से रेप का आरोप लगा रहा था। परिजनों ने 13 जनवरी को मामले की निष्पक्ष जांच के लिए प्रदर्शन किया, तब भी पुलिस सुसाइड मानती रही और प्रदर्शनकारियों को डंडे मारकर भगाया। मौत के 4 दिन बाद पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने रेप की बात मानी। छात्रा के साथ कितनी देर तक दरिंदगी हुई, शरीर पर कहां-कहां चोट के निशान हैं, प्राइवेट पार्ट में किस तरह चोट आई और मौत का कारण क्या है? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर ने मेडिकल एक्सपर्ट से पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की स्टडी करवाई। पढ़िए पूरी रिपोर्ट.. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार कर रहे जांच: SSP पटना के SSP कार्तिकेय शर्मा ने कहा, ‘अभी तक जो सबूत मिले हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में जो आया है। उसके हिसाब से हम लोग जांच कर रहे हैं। अभी कुछ और सबूत जमा करने हैं। FSL की टीम ने कुछ सैंपल लिए थे, उनकी जांच बाकी है। मृतका के मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेज रहे हैं ताकि अगर किसी वीडियो को डिलीट किया गया हो तो उसे रिकवर कर सकें।’ उन्होंने कहा, ‘जांच का दायरा बढ़ाते हुए हम लोग अलग-अलग पहलुओं पर जांच कर रहे हैं। छात्रा के 5 तारीख को आने और उसके जाने तक का सीसीटीवी फुटेज लिया है। ASP सदर अभिनव के नेतृत्व में SIT का गठन किया गया है।’ DGP ने किया SIT का गठन, जांच करेंगे IG जितेंद्र राणा छात्रा के साथ रेप मामले पर DGP विनय कुमार ने संज्ञान लिया है। उन्होंने हायर लेवल SIT का गठन किया गया है। जोनल IG पटना जितेंद्र राणा को जांच का निर्देश दिया है। SIT में सदर ASP अभिनव, सचिवालय SDPO 1 डॉक्टर अनु, सचिवालय SDPO 2 साकेत कुमार, जक्कनपुर थानेदार ऋतुराज सिंह और कदमकुंआ थानेदार जनमेजय राय और एक महिला पदाधिकारी समेत 7 लोग शामिल हैं। वहीं, SHO पत्रकार नगर रौशनी कुमारी को दूर रखा गया है।


