चारा घोटाले में लालू यादव को सजा दिलाने, शारदा चिटफंड घोटाले की जांच कर ममता बनर्जी और उनकी सरकार की मुसीबत बढ़ाने वाले सीबीआई के आईजी राजीव रंजन चर्चा में हैं। वजह, NEET छात्रा रेप-हत्या मामले की जांच उनके हवाले होना। छात्रा को रेप के बाद किसने मार डाला? उन पर इस सवाल का जवाब तलाशने की जिम्मेदारी है। रविवार को राजीव रंजन अपनी टीम के साथ जहानाबाद भी गए। मृतक छात्रा के परिजनों से बात की। आइए जानते हैं राजीव रंजन कौन हैं? बिहार से उनका क्या नाता है? किन वजहों से चर्चा में रहे हैं? लालू परिवार की मुसीबतों से उनका क्या संबंध है? कौन हैं राजीव रंजन? राजीव रंजन 2005 बैच के IPS अधिकारी हैं। CBI में बिहार और झारखंड ज्वाइंट डायरेक्टर (IG) के पद पर सेवा दे रहे हैं। उनका ऑफिस रांची में है। पहले वह CBI में ACB (Anti Corruption Branch) कोलकाता के SP और ACB भुवनेश्वर के SP थे। सिक्किम कैडर के अधिकारी राजीव रंजन मूल रूप से बिहार के रोहतास जिला के करगहर थाना क्षेत्र के एमनडेरी गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता स्व. मुरली प्रसाद शिक्षक थे। राजीव ने स्कूली पढ़ाई नोखा सर्वोदय स्कूल से की। इसके बाद आरा और पटना में पढ़े। पटना कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रेजुएशन करने के बाद UPSC क्रैक किया और आईपीएस चुना।
CBI में उनका यह दूसरा कार्यकाल है। पहला कार्यकाल अक्टूबर 2011 से अक्टूबर 2018 तक चला। इसके बाद नवंबर 2023 से दूसरे कार्यकाल के लिए सीबीआई में आए। राजीव रंजन ने CRPF में भी दी सेवा राजीव रंजन ने CRPF में भी लंबे समय तक सेवा दी है। अयोध्या के श्रीराम मंदिर और मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि को सुरक्षा देने वाली CRPF टीम का नेतृत्व किया है। राजीव ने जम्मू-कश्मीर में एंटी टेरर ऑपरेशन भी संभाला है। वह नगरोटा के हीरानगर रेंज के डीआईजी थे। उनके नेतृत्व में आतंकवादियों के खिलाफ कई ऑपरेशन चलाए गए। राजीव रंजन को उत्कृष्ट एवं विशिष्ट सेवा के लिए 2025 में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्हें पुलिस मेडल भी मिला है। किन बड़े मामलों की जांच के चलते चर्चा में रहे राजीव रंजन? चारा घोटाला: करीब 950 करोड़ रुपए के चारा घोटाले की जांच 1996 में पटना हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंपी थी। इसकी जांच में राजीव रंजन ने बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सीबीआई की जांच के चलते राजद प्रमुख लालू यादव को कोर्ट ने सजा सुनाई। IRCTC घोटाला: यह मामला उस समय का है जब लालू यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उन्होंने साल 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते हुए एक निजी कंपनी को अवैध तरीके से भुवनेश्वर और रांची में दो होटलों को चलाने का ठेका दिया। इसके बदले उन्हें पटना के सगुना मोड़ इलाके में कंपनी ने 3 एकड़ जमीन दी। इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और उनके बेटे तेजस्वी यादव आरोपी हैं। लैंड फोर जॉब घोटाला: आरोप है कि लालू यादव ने रेल मंत्री रहते हुए मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर स्थित रेलवे के अलग-अलग जोन में बिहार के लोगों को ‘ग्रुप-डी’ पदों पर बहाल किया गया। इसके बदले इन लोगों या उनके परिवारों ने अपनी जमीन लालू यादव के परिवार के सदस्यों और एके इन्फोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी को दी। बाद में कंपनी पर लालू के परिवार के सदस्यों ने कब्जा कर लिया। CBI में बिहार और झारखंड के ज्वाइंट डायरेक्टर होने के नाते IRCTC घोटाला और लैंड फोर जॉब घोटाला की जांच का नेतृत्व राजीव रंजन कर रहे हैं। इन मामलों के चलते लालू यादव और उनके परिवार के लोगों की परेशानी बढ़ी हुई है। चिटफंड घोटाला: राजीव रंजन के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल के शारदा चिटफंड घोटाला मामले की जांच हुई। इस केस ने सीएम ममता बनर्जी की मुसीबत बढ़ा दी थी। करीब 20 हजार करोड़ रुपए के इस घोटाले की जांच 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सौंपी थी। CBI ने पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर छापा मारा था। इसके विरोध में ममता बनर्जी धरने पर बैठी थीं। अवैध खनन घोटाला: सीबीआई अधिकारी रहते हुए राजीव ने झारखंड के साहिबगंज में अवैध खनन घोटाला का पर्दाफाश किया था। अब नीट छात्रा रेप-हत्या मामला सुलझाने की चुनौती सीबीआई के आईजी राजीव रंजन के सामने अब नीट छात्रा रेप-हत्याकांड सुलझाने की चुनौती है। इस मामले में बिहार पुलिस की SIT ने जिस तरह जांच की, उससे राज्य सरकार की काफी फजीहत हुई है। पुलिस पहले कहती रही कि रेप का मामला नहीं है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में छात्रा के प्राइवेट पार्ट में जख्म और शरीर पर चोटों के गंभीर निशान होने की बात कही गई। FSL की रिपोर्ट में कहा गया कि छात्रा के अंडरगारमेंट में स्पर्म था। इसके बाद बाद SIT ने छात्रा के जानने वाले लोगों, परिजनों समेत कई लोगों के DNA सैम्पल लिए। स्पर्म के डीएनए से मिलान किया गया, लेकिन पता नहीं चला कि वह स्पर्म किसका है। नीट छात्रा रेप-हत्याकांड में अब तक CBI ने क्या किया? 11 जनवरी को छात्रा की मौत हुई थी। 31 जनवरी को राज्य सरकार ने सीबीआई से जांच का आग्रह किया। 12 फरवरी को सीबीआई ने केस टेकओवर किया। 15 फरवरी को पहली बार सीबीआई की टीम जहानाबाद स्थित छात्रा के घर पहुंची। टीम ने मां, पिता, भाई और अन्य परिजनों से पूछताछ की। आसपास के लोगों से भी जानकारी ली। सीबीआई ने मां से अलग से करीब दो घंटे तक बातचीत की। शुरू से लेकर अंत तक की पूरी घटनाक्रम की जानकारी ली गई। पिता और भाई से भी अलग-अलग सवाल पूछे गए। छात्रा के भाई और पिता के मोबाइल के बारे में पूछा गया। परिजनों ने बताया कि दोनों का मोबाइल टूट गया है। दुकान में बनाने के लिए दिया गया है। दोनों मोबाइल बनने के बाद सीबीआई को देने को कहा गया है। छात्रा की किताबें और कपड़े सीबीआई साथ ले गई। बिहार के इन हाई-प्रोफाइल मामलों में CBI को नहीं मिली सफलता 1. शिल्पी-गौतम कांड: 3 जुलाई 1999 को पटना के फ्रेजर रोड इलाके में एक कार के अंदर 2 लाश अर्धनग्न हालत में मिली थी। पुलिस ने शुरुआती जांच में बताया कि शिल्पी और गौतम की मौत संबंध बनाने के दौरान हुई। राबड़ी देवी (उस समय मुख्यमंत्री थीं) ने सितंबर 1999 में मामला CBI को ट्रांसफर किया। सितंबर 1999 से 2004 तक CBI की टीम ने पटना और फुलवारीशरीफ की गलियों में हर तरह की छानबीन की। 3 साल की जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट पेश किया। दावा किया कि यह हत्या का मामला नहीं था। शिल्पी और गौतम ने जहर खाकर अपनी जान दी। 2. नवरुणा चक्रवर्ती अपहरण कांड: 18 सितंबर 2012 को 12 साल की नवरुणा चक्रवर्ती को मुजफ्फरपुर स्थित उसके घर से अगवा किया गया था। बिहार पुलिस पता नहीं लगा पाई कि नवरुणा को किसने अगवा किया। उसके साथ क्या हुआ। 26 नवंबर 2012 को उसके घर के पास के नाले से इंसान का कंकाल मिला। 25 नवंबर 2013 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CBI ने मामले की जांच शुरू की। 24 नवंबर 2020 को सीबीआई ने मुजफ्फरपुर कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। ऐजेंसी 6 साल की जांच में अपराध साबित नहीं कर पाई। 3. ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड: 1 जून 2012 को ब्रह्मेश्वर मुखिया की गोली मारकर हत्या की गई थी। 6 जून को बिहार सरकार ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की। 16 दिसंबर 2023 को सीबीआई ने कोर्ट में चार्जशीट दायर की। हुलास पांडेय सहित 8 लोगों को आरोपी बनाया। मामला अभी तक कोर्ट में है। किसी को सजा नहीं मिली है। चारा घोटाले में लालू यादव को सजा दिलाने, शारदा चिटफंड घोटाले की जांच कर ममता बनर्जी और उनकी सरकार की मुसीबत बढ़ाने वाले सीबीआई के आईजी राजीव रंजन चर्चा में हैं। वजह, NEET छात्रा रेप-हत्या मामले की जांच उनके हवाले होना। छात्रा को रेप के बाद किसने मार डाला? उन पर इस सवाल का जवाब तलाशने की जिम्मेदारी है। रविवार को राजीव रंजन अपनी टीम के साथ जहानाबाद भी गए। मृतक छात्रा के परिजनों से बात की। आइए जानते हैं राजीव रंजन कौन हैं? बिहार से उनका क्या नाता है? किन वजहों से चर्चा में रहे हैं? लालू परिवार की मुसीबतों से उनका क्या संबंध है? कौन हैं राजीव रंजन? राजीव रंजन 2005 बैच के IPS अधिकारी हैं। CBI में बिहार और झारखंड ज्वाइंट डायरेक्टर (IG) के पद पर सेवा दे रहे हैं। उनका ऑफिस रांची में है। पहले वह CBI में ACB (Anti Corruption Branch) कोलकाता के SP और ACB भुवनेश्वर के SP थे। सिक्किम कैडर के अधिकारी राजीव रंजन मूल रूप से बिहार के रोहतास जिला के करगहर थाना क्षेत्र के एमनडेरी गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता स्व. मुरली प्रसाद शिक्षक थे। राजीव ने स्कूली पढ़ाई नोखा सर्वोदय स्कूल से की। इसके बाद आरा और पटना में पढ़े। पटना कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रेजुएशन करने के बाद UPSC क्रैक किया और आईपीएस चुना।
CBI में उनका यह दूसरा कार्यकाल है। पहला कार्यकाल अक्टूबर 2011 से अक्टूबर 2018 तक चला। इसके बाद नवंबर 2023 से दूसरे कार्यकाल के लिए सीबीआई में आए। राजीव रंजन ने CRPF में भी दी सेवा राजीव रंजन ने CRPF में भी लंबे समय तक सेवा दी है। अयोध्या के श्रीराम मंदिर और मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि को सुरक्षा देने वाली CRPF टीम का नेतृत्व किया है। राजीव ने जम्मू-कश्मीर में एंटी टेरर ऑपरेशन भी संभाला है। वह नगरोटा के हीरानगर रेंज के डीआईजी थे। उनके नेतृत्व में आतंकवादियों के खिलाफ कई ऑपरेशन चलाए गए। राजीव रंजन को उत्कृष्ट एवं विशिष्ट सेवा के लिए 2025 में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्हें पुलिस मेडल भी मिला है। किन बड़े मामलों की जांच के चलते चर्चा में रहे राजीव रंजन? चारा घोटाला: करीब 950 करोड़ रुपए के चारा घोटाले की जांच 1996 में पटना हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंपी थी। इसकी जांच में राजीव रंजन ने बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सीबीआई की जांच के चलते राजद प्रमुख लालू यादव को कोर्ट ने सजा सुनाई। IRCTC घोटाला: यह मामला उस समय का है जब लालू यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उन्होंने साल 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहते हुए एक निजी कंपनी को अवैध तरीके से भुवनेश्वर और रांची में दो होटलों को चलाने का ठेका दिया। इसके बदले उन्हें पटना के सगुना मोड़ इलाके में कंपनी ने 3 एकड़ जमीन दी। इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और उनके बेटे तेजस्वी यादव आरोपी हैं। लैंड फोर जॉब घोटाला: आरोप है कि लालू यादव ने रेल मंत्री रहते हुए मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर स्थित रेलवे के अलग-अलग जोन में बिहार के लोगों को ‘ग्रुप-डी’ पदों पर बहाल किया गया। इसके बदले इन लोगों या उनके परिवारों ने अपनी जमीन लालू यादव के परिवार के सदस्यों और एके इन्फोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी को दी। बाद में कंपनी पर लालू के परिवार के सदस्यों ने कब्जा कर लिया। CBI में बिहार और झारखंड के ज्वाइंट डायरेक्टर होने के नाते IRCTC घोटाला और लैंड फोर जॉब घोटाला की जांच का नेतृत्व राजीव रंजन कर रहे हैं। इन मामलों के चलते लालू यादव और उनके परिवार के लोगों की परेशानी बढ़ी हुई है। चिटफंड घोटाला: राजीव रंजन के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल के शारदा चिटफंड घोटाला मामले की जांच हुई। इस केस ने सीएम ममता बनर्जी की मुसीबत बढ़ा दी थी। करीब 20 हजार करोड़ रुपए के इस घोटाले की जांच 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सौंपी थी। CBI ने पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर छापा मारा था। इसके विरोध में ममता बनर्जी धरने पर बैठी थीं। अवैध खनन घोटाला: सीबीआई अधिकारी रहते हुए राजीव ने झारखंड के साहिबगंज में अवैध खनन घोटाला का पर्दाफाश किया था। अब नीट छात्रा रेप-हत्या मामला सुलझाने की चुनौती सीबीआई के आईजी राजीव रंजन के सामने अब नीट छात्रा रेप-हत्याकांड सुलझाने की चुनौती है। इस मामले में बिहार पुलिस की SIT ने जिस तरह जांच की, उससे राज्य सरकार की काफी फजीहत हुई है। पुलिस पहले कहती रही कि रेप का मामला नहीं है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में छात्रा के प्राइवेट पार्ट में जख्म और शरीर पर चोटों के गंभीर निशान होने की बात कही गई। FSL की रिपोर्ट में कहा गया कि छात्रा के अंडरगारमेंट में स्पर्म था। इसके बाद बाद SIT ने छात्रा के जानने वाले लोगों, परिजनों समेत कई लोगों के DNA सैम्पल लिए। स्पर्म के डीएनए से मिलान किया गया, लेकिन पता नहीं चला कि वह स्पर्म किसका है। नीट छात्रा रेप-हत्याकांड में अब तक CBI ने क्या किया? 11 जनवरी को छात्रा की मौत हुई थी। 31 जनवरी को राज्य सरकार ने सीबीआई से जांच का आग्रह किया। 12 फरवरी को सीबीआई ने केस टेकओवर किया। 15 फरवरी को पहली बार सीबीआई की टीम जहानाबाद स्थित छात्रा के घर पहुंची। टीम ने मां, पिता, भाई और अन्य परिजनों से पूछताछ की। आसपास के लोगों से भी जानकारी ली। सीबीआई ने मां से अलग से करीब दो घंटे तक बातचीत की। शुरू से लेकर अंत तक की पूरी घटनाक्रम की जानकारी ली गई। पिता और भाई से भी अलग-अलग सवाल पूछे गए। छात्रा के भाई और पिता के मोबाइल के बारे में पूछा गया। परिजनों ने बताया कि दोनों का मोबाइल टूट गया है। दुकान में बनाने के लिए दिया गया है। दोनों मोबाइल बनने के बाद सीबीआई को देने को कहा गया है। छात्रा की किताबें और कपड़े सीबीआई साथ ले गई। बिहार के इन हाई-प्रोफाइल मामलों में CBI को नहीं मिली सफलता 1. शिल्पी-गौतम कांड: 3 जुलाई 1999 को पटना के फ्रेजर रोड इलाके में एक कार के अंदर 2 लाश अर्धनग्न हालत में मिली थी। पुलिस ने शुरुआती जांच में बताया कि शिल्पी और गौतम की मौत संबंध बनाने के दौरान हुई। राबड़ी देवी (उस समय मुख्यमंत्री थीं) ने सितंबर 1999 में मामला CBI को ट्रांसफर किया। सितंबर 1999 से 2004 तक CBI की टीम ने पटना और फुलवारीशरीफ की गलियों में हर तरह की छानबीन की। 3 साल की जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट पेश किया। दावा किया कि यह हत्या का मामला नहीं था। शिल्पी और गौतम ने जहर खाकर अपनी जान दी। 2. नवरुणा चक्रवर्ती अपहरण कांड: 18 सितंबर 2012 को 12 साल की नवरुणा चक्रवर्ती को मुजफ्फरपुर स्थित उसके घर से अगवा किया गया था। बिहार पुलिस पता नहीं लगा पाई कि नवरुणा को किसने अगवा किया। उसके साथ क्या हुआ। 26 नवंबर 2012 को उसके घर के पास के नाले से इंसान का कंकाल मिला। 25 नवंबर 2013 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CBI ने मामले की जांच शुरू की। 24 नवंबर 2020 को सीबीआई ने मुजफ्फरपुर कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। ऐजेंसी 6 साल की जांच में अपराध साबित नहीं कर पाई। 3. ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड: 1 जून 2012 को ब्रह्मेश्वर मुखिया की गोली मारकर हत्या की गई थी। 6 जून को बिहार सरकार ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की। 16 दिसंबर 2023 को सीबीआई ने कोर्ट में चार्जशीट दायर की। हुलास पांडेय सहित 8 लोगों को आरोपी बनाया। मामला अभी तक कोर्ट में है। किसी को सजा नहीं मिली है।


