NEET छात्रा मामले में जांच एजेंसी CBI की भूमिका पर अब सवाल उठने लगे हैं। पीड़ित पक्ष के वकील एसके पांडे ने CBI पर जांच को सही दिशा में न ले जाने और पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मामले के अहम सबूतों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि असली दोषियों से पूछताछ तक नहीं हो रही है। वहीं, गुरुवार 19 मार्च को CBI की टीम चौथी बार जहानाबाद पहुंची। यहां उन्होंने NEET छात्रा के माता-पिता से फिर से पूछताछ करने की कोशिश की, लेकिन परिवारवालों ने बात करने से इनकार कर दिया। टीम करीब आधे घंटे तक गांव में मौजूद रही, लेकिन पीड़ित परिवार ने इस बार पूछताछ में सहयोग करने से साफ इनकार कर दिया। परिवार ने जांच एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें न्याय की उम्मीद अब केवल अदालत से ही है। मोबाइल डेटा की फॉरेंसिक जांच की मांग पीड़ित पक्ष के वकील एसके पांडे ने कहा, किसी भी आपराधिक मामले में मोबाइल फोन सबसे बड़ा सबूत होता है। उन्होंने कहा, मोबाइल हर अपराधी की जन्म कुंडली होता है और जुर्म से जुड़े अधिकांश साक्ष्य उसी में मिलते हैं। उन्होंने मांग की कि घटना के दिन आरोपी मनीष रंजन के मोबाइल की लोकेशन की फॉरेंसिक जांच कराई जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि घटना के दिन वह किन-किन लोगों के संपर्क में था। इसके अलावा घटनास्थल के आसपास मौजूद अन्य लोगों की पहचान भी मोबाइल लोकेशन के आधार पर की जानी चाहिए। CBI पर पीड़ित परिवार को परेशान करने का आरोप एसके पांडे ने आरोप लगाया कि CBI की टीम दोषियों से पूछताछ करने के बजाय पीड़ित परिवार को ही परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले राज्य की जांच एजेंसियों, जैसे CID और SIT, के दौरान भी यही स्थिति रही और अब CBI भी उसी राह पर चल रही है। वकील के मुताबिक, जिन लोगों से सख्ती से पूछताछ होनी चाहिए, उनसे कोई सवाल नहीं किया जा रहा है, जबकि पीड़ित पक्ष को बार-बार बुलाकर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। DGP पर लगे आरोपों की भी दिलाई याद वकील ने यह भी आरोप लगाया कि पहले बिहार पुलिस के शीर्ष अधिकारी, DGP विनय कुमार द्वारा भी पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा कि अब वही तरीका CBI द्वारा अपनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि CBI की टीम एक बार फिर पीड़ित पक्ष से मिलने पतियावा पहुंची है, जिसे उन्होंने दबाव बनाने की कोशिश बताया है। जब्त मोबाइल फोन की जांच पर उठाए सवाल मामले में जप्त किए गए मोबाइल फोन की जांच प्रक्रिया पर भी वकील ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि कुल 8 मोबाइल फोन जब्त किए गए थे, लेकिन उन्हें सील बंद लिफाफे में मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया, जो कि कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा होता है। उनका आरोप है कि इस तरह की लापरवाही या जानबूझकर की गई चूक से जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं और इससे सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका भी बनी रहती है। पास्को एक्ट नहीं जोड़ने पर नाराजगी
वकील ने यह भी कहा कि अब तक इस मामले में POCSO एक्ट की धाराएं नहीं जोड़ी गई हैं, जो कि बेहद गंभीर चूक है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में सख्त धाराओं का इस्तेमाल जरूरी होता है, ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिल सके। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर CBI अब तक इस दिशा में कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। CBI पर मामले को गुमराह करने का आरोप
एसके पांडे ने CBI पर सीधे तौर पर जांच को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एजेंसी जानबूझकर मामले को भटकाने की कोशिश कर रही है, ताकि असली गुनहगार सामने न आ सकें। उन्होंने कहा, ऐसा प्रतीत होता है कि CBI इस मामले में सच्चाई सामने लाने के बजाय लीपापोती करने में जुटी हुई है। जांच अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
वकील ने कहा कि जो अधिकारी जांच के नाम पर पीड़ित परिवार को परेशान कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि ऐसे अधिकारियों को तत्काल सेवा से मुक्त किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि CBI जैसी संस्था, जिस पर जनता का पैसा खर्च होता है, अगर सही तरीके से जांच नहीं करती, तो यह बेहद चिंताजनक है। डंप डेटा और लोकेशन आधारित जांच पर जोर अंत में वकील ने कहा कि घटनास्थल के डंप डेटा और मोबाइल लोकेशन के आधार पर ही सच्चाई सामने आ सकती है। उन्होंने मांग की कि वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से जांच को आगे बढ़ाया जाए और सभी संदिग्धों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो। NEET छात्रा मामले में अब जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ित पक्ष के वकील के आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। अब देखना होगा कि CBI इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और जांच को किस दिशा में आगे बढ़ाती है। दोपहर 2 बजे गांव पहुंची CBI टीम मिली जानकारी के अनुसार, CBI की तीन सदस्यीय टीम गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे पीड़ित छात्र के गांव पहुंची। टीम का उद्देश्य परिवार से पूछताछ करना था, लेकिन इस बार परिवार ने उनसे बातचीत करने से इनकार कर दिया। करीब आधे घंटे तक गांव में रुकने के बाद टीम बिना किसी ठोस जानकारी के वापस लौट गई। परिवार का आरोप- जांच एजेंसियों पर नहीं रहा भरोसा पीड़ित छात्र के पिता ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें अब किसी भी जांच एजेंसी पर भरोसा नहीं है। उनका कहना है कि अब तक की कार्रवाई में सिर्फ उनके परिवार को ही परेशान किया गया है, जबकि असली अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं। उन्होंने कहा, जितनी भी जांच एजेंसियां हैं, उन पर मेरा कोई भरोसा नहीं है। हमारे परिवार को बार-बार तंग और परेशान किया जा रहा है, लेकिन अपराधियों को नहीं पकड़ा जा रहा है। बार-बार परिवार से ही पूछताछ का आरोप परिवार का कहना है कि चाहे SIT टीम हो या CBI, सभी एजेंसियां बार-बार उन्हीं से पूछताछ कर रही हैं। पिता ने कहा, जिन लोगों से सख्ती से पूछताछ होनी चाहिए, उनसे कोई सवाल नहीं किया जा रहा है। बार-बार हमारे परिवार को ही बुलाया जाता है और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। सरकार पर मामले को दबाने का आरोप पीड़ित पक्ष ने सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है। पिता ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस तरह पहले कहा जाता था कि CBI एक तोता है, वैसा ही व्यवहार अब इस मामले में देखने को मिल रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें CBI से न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। कोर्ट में दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने का आरोप परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने CBI टीम को जो लिखित जानकारी दी थी, उसे अदालत में प्रस्तुत नहीं किया गया। इस पर पिता ने कहा कि अगर उनकी बातों को रिकॉर्ड में ही नहीं लिया जा रहा है, तो जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब न्यायालय से ही उम्मीद
पीड़ित परिवार ने कहा कि उन्हें अब सिर्फ न्यायालय पर ही भरोसा है। उनका मानना है कि अदालत ही उन्हें निष्पक्ष और सही न्याय दिला सकती है। उन्होंने कहा, अब हमें केवल न्यायालय से ही उम्मीद है। वहीं से हमें इंसाफ मिलेगा। चौकीदार ने दी टीम के आने की पुष्टि गांव के चौकीदार गिरजा पासवान ने बताया कि गुरुवार को करीब 2 बजे CBI की टीम गांव पहुंची थी। उन्होंने कहा कि टीम में तीन सदस्य शामिल थे और वे पीड़ित परिवार से पूछताछ करना चाहते थे। हालांकि, परिवार द्वारा सहयोग नहीं करने के कारण टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा। NEET छात्रा मामले में जांच एजेंसी CBI की भूमिका पर अब सवाल उठने लगे हैं। पीड़ित पक्ष के वकील एसके पांडे ने CBI पर जांच को सही दिशा में न ले जाने और पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मामले के अहम सबूतों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि असली दोषियों से पूछताछ तक नहीं हो रही है। वहीं, गुरुवार 19 मार्च को CBI की टीम चौथी बार जहानाबाद पहुंची। यहां उन्होंने NEET छात्रा के माता-पिता से फिर से पूछताछ करने की कोशिश की, लेकिन परिवारवालों ने बात करने से इनकार कर दिया। टीम करीब आधे घंटे तक गांव में मौजूद रही, लेकिन पीड़ित परिवार ने इस बार पूछताछ में सहयोग करने से साफ इनकार कर दिया। परिवार ने जांच एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें न्याय की उम्मीद अब केवल अदालत से ही है। मोबाइल डेटा की फॉरेंसिक जांच की मांग पीड़ित पक्ष के वकील एसके पांडे ने कहा, किसी भी आपराधिक मामले में मोबाइल फोन सबसे बड़ा सबूत होता है। उन्होंने कहा, मोबाइल हर अपराधी की जन्म कुंडली होता है और जुर्म से जुड़े अधिकांश साक्ष्य उसी में मिलते हैं। उन्होंने मांग की कि घटना के दिन आरोपी मनीष रंजन के मोबाइल की लोकेशन की फॉरेंसिक जांच कराई जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि घटना के दिन वह किन-किन लोगों के संपर्क में था। इसके अलावा घटनास्थल के आसपास मौजूद अन्य लोगों की पहचान भी मोबाइल लोकेशन के आधार पर की जानी चाहिए। CBI पर पीड़ित परिवार को परेशान करने का आरोप एसके पांडे ने आरोप लगाया कि CBI की टीम दोषियों से पूछताछ करने के बजाय पीड़ित परिवार को ही परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले राज्य की जांच एजेंसियों, जैसे CID और SIT, के दौरान भी यही स्थिति रही और अब CBI भी उसी राह पर चल रही है। वकील के मुताबिक, जिन लोगों से सख्ती से पूछताछ होनी चाहिए, उनसे कोई सवाल नहीं किया जा रहा है, जबकि पीड़ित पक्ष को बार-बार बुलाकर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। DGP पर लगे आरोपों की भी दिलाई याद वकील ने यह भी आरोप लगाया कि पहले बिहार पुलिस के शीर्ष अधिकारी, DGP विनय कुमार द्वारा भी पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा कि अब वही तरीका CBI द्वारा अपनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि CBI की टीम एक बार फिर पीड़ित पक्ष से मिलने पतियावा पहुंची है, जिसे उन्होंने दबाव बनाने की कोशिश बताया है। जब्त मोबाइल फोन की जांच पर उठाए सवाल मामले में जप्त किए गए मोबाइल फोन की जांच प्रक्रिया पर भी वकील ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि कुल 8 मोबाइल फोन जब्त किए गए थे, लेकिन उन्हें सील बंद लिफाफे में मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया, जो कि कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा होता है। उनका आरोप है कि इस तरह की लापरवाही या जानबूझकर की गई चूक से जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं और इससे सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका भी बनी रहती है। पास्को एक्ट नहीं जोड़ने पर नाराजगी
वकील ने यह भी कहा कि अब तक इस मामले में POCSO एक्ट की धाराएं नहीं जोड़ी गई हैं, जो कि बेहद गंभीर चूक है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में सख्त धाराओं का इस्तेमाल जरूरी होता है, ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिल सके। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर CBI अब तक इस दिशा में कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। CBI पर मामले को गुमराह करने का आरोप
एसके पांडे ने CBI पर सीधे तौर पर जांच को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एजेंसी जानबूझकर मामले को भटकाने की कोशिश कर रही है, ताकि असली गुनहगार सामने न आ सकें। उन्होंने कहा, ऐसा प्रतीत होता है कि CBI इस मामले में सच्चाई सामने लाने के बजाय लीपापोती करने में जुटी हुई है। जांच अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
वकील ने कहा कि जो अधिकारी जांच के नाम पर पीड़ित परिवार को परेशान कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि ऐसे अधिकारियों को तत्काल सेवा से मुक्त किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि CBI जैसी संस्था, जिस पर जनता का पैसा खर्च होता है, अगर सही तरीके से जांच नहीं करती, तो यह बेहद चिंताजनक है। डंप डेटा और लोकेशन आधारित जांच पर जोर अंत में वकील ने कहा कि घटनास्थल के डंप डेटा और मोबाइल लोकेशन के आधार पर ही सच्चाई सामने आ सकती है। उन्होंने मांग की कि वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से जांच को आगे बढ़ाया जाए और सभी संदिग्धों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो। NEET छात्रा मामले में अब जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ित पक्ष के वकील के आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। अब देखना होगा कि CBI इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और जांच को किस दिशा में आगे बढ़ाती है। दोपहर 2 बजे गांव पहुंची CBI टीम मिली जानकारी के अनुसार, CBI की तीन सदस्यीय टीम गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे पीड़ित छात्र के गांव पहुंची। टीम का उद्देश्य परिवार से पूछताछ करना था, लेकिन इस बार परिवार ने उनसे बातचीत करने से इनकार कर दिया। करीब आधे घंटे तक गांव में रुकने के बाद टीम बिना किसी ठोस जानकारी के वापस लौट गई। परिवार का आरोप- जांच एजेंसियों पर नहीं रहा भरोसा पीड़ित छात्र के पिता ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें अब किसी भी जांच एजेंसी पर भरोसा नहीं है। उनका कहना है कि अब तक की कार्रवाई में सिर्फ उनके परिवार को ही परेशान किया गया है, जबकि असली अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं। उन्होंने कहा, जितनी भी जांच एजेंसियां हैं, उन पर मेरा कोई भरोसा नहीं है। हमारे परिवार को बार-बार तंग और परेशान किया जा रहा है, लेकिन अपराधियों को नहीं पकड़ा जा रहा है। बार-बार परिवार से ही पूछताछ का आरोप परिवार का कहना है कि चाहे SIT टीम हो या CBI, सभी एजेंसियां बार-बार उन्हीं से पूछताछ कर रही हैं। पिता ने कहा, जिन लोगों से सख्ती से पूछताछ होनी चाहिए, उनसे कोई सवाल नहीं किया जा रहा है। बार-बार हमारे परिवार को ही बुलाया जाता है और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। सरकार पर मामले को दबाने का आरोप पीड़ित पक्ष ने सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है। पिता ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस तरह पहले कहा जाता था कि CBI एक तोता है, वैसा ही व्यवहार अब इस मामले में देखने को मिल रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें CBI से न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। कोर्ट में दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने का आरोप परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने CBI टीम को जो लिखित जानकारी दी थी, उसे अदालत में प्रस्तुत नहीं किया गया। इस पर पिता ने कहा कि अगर उनकी बातों को रिकॉर्ड में ही नहीं लिया जा रहा है, तो जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब न्यायालय से ही उम्मीद
पीड़ित परिवार ने कहा कि उन्हें अब सिर्फ न्यायालय पर ही भरोसा है। उनका मानना है कि अदालत ही उन्हें निष्पक्ष और सही न्याय दिला सकती है। उन्होंने कहा, अब हमें केवल न्यायालय से ही उम्मीद है। वहीं से हमें इंसाफ मिलेगा। चौकीदार ने दी टीम के आने की पुष्टि गांव के चौकीदार गिरजा पासवान ने बताया कि गुरुवार को करीब 2 बजे CBI की टीम गांव पहुंची थी। उन्होंने कहा कि टीम में तीन सदस्य शामिल थे और वे पीड़ित परिवार से पूछताछ करना चाहते थे। हालांकि, परिवार द्वारा सहयोग नहीं करने के कारण टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा।


