नीट छात्रा रेप-मौत मामले में CBI की जांच जारी है। CBI की टीम सोमवार को शम्भू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची। करीब 2 घंटे तक वहां रही। छात्रा जिस कमरे में रहती थी, फिर से उसकी जांच की। मौके पर हॉस्टल का गार्ड अमरेंद्र भी मौजूद था। ये वही गार्ड है, जो CCTV फुटेज में छात्रा के कमरे के बंद गेट को खोलता दिखा था। फिर अपनी गोद में उठाकर उसे पास के डॉ. शहजानंद के हॉस्पिटल पहुंचाया था। सूत्रों के अनुसार, टीम ने हॉस्टल के अंदर इस पूरे सीन को रीक्रिएट किया। उसे किसने कॉल कर वहां बुलाया? फिर वो सूचना मिलने के कितनी देर बाद वहां पहुंचा? इसके बाद उसने क्या किया? पहले इन सवालों को पूछा। इसके बाद छात्रा के कमरे के बंद गेट को उसने कैसे खोला? अंदर क्या देखा? फिर वो किस तरह से अपनी गोद में उठाकर छात्रा को भागा? इसका सीन रीक्रिएट किया। नीट छात्रा की माैत के मामले में सीबीआई काे अब तक काेई ठाेस सुराग नहीं मिला है। केंद्रीय जांच एजेंसी की सबसे बड़ी चुनाैती छात्रा के कपड़े से मिले स्पर्म के डीएनए का उस आरोपी के डीएनए के सैंपल से मिलान करना है, जिसने उसके साथ घिनाैनी हरकत की है। सूत्राें के अनुसार, जांच एजेंसी इस मामले में सच उगलवाने के लिए करीब 10 लाेगाें का पॉलीग्राफ टेस्ट करा सकती है। इसकाे लाय डिटेक्टर टेस्ट भी कहा जाता है। किसी भी व्यक्ति का यह टेस्ट कराने के लिए काेर्ट और आरोपी की सहमति जरूरी है। नीलम अग्रवाल और दोनों वार्डेन से हुई पूछताछ जिस वक्त हॉस्टल में जांच करने CBI की टीम पहुंची, उसी समय हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल और नीतू समेत दोनों महिला वार्डेन को वहां बुलाया गया। पूरी पड़ताल के दौरान ये तीनों हॉस्टल के अंदर ही थीं। देखें हॉस्टल के पास की तस्वीरें… सूत्रों के अनुसार, इन तीनों से अंदर में टीम ने एक-एक कर कई सवाल पूछे। तीनों के बयानों को टीम ने मिलाने की भी कोशिश की है। छात्रा की मां और मामी ने शुरुआती जांच के दौरान केंद्रीय एजेंसी की टीम को बताया था कि हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल ने उन्हें रुपए का ऑफर दिया था। कहा था कि ‘आपकी बेटी को बचा नहीं पाएं, आपको जितने रुपए लेना है, ले लीजिए।’ जांच टीम में शामिल अधिकारी ने संचालिका से इस बारे में भी सवाल पूछा कि आपने छात्रा की मां को रुपए का ऑफर क्यों दिया था? जरूरत पड़ने पर फिर इंटेरोगेट कर सकती CBI छात्रा 5 जनवरी को अपने घर से वापस हॉस्टल आई, तो उसकी हालत क्या थी? हॉस्टल में बाकी छात्राओं के साथ वो किस तरह से बात कर रही थी? क्या उसके व्यवहार में उस दिन कोई बदलाव दिखा था? रात में वो कब अपने कमरे में गई थी? इस तरह के कई सवाल हॉस्टल की वार्डेन से पूछे गए हैं। सूत्रों की मानें तो संचालिका और दोनों वार्डेन से टीम ने स्पष्ट कर दिया है कि जरूरत पड़ने पर आप सभी से दोबारा पूछताछ हो सकती है। दरअसल, केस का खुलासा करने के लिए CBI साइंटिफिक, टेक्निकल और फिजिकल तरीके से सबूत जुटाने में लगी है। गयाजी में छात्रा की मामी से कई सवाल किए थे इसके पहले गुरुवार को गयाजी में छात्रा की मामी से CBI ने पूछताछ की थी। इस दौरान मामी ने जांच एजेंसी को कई अहम जानकारियां दी थीं। मामी ने CBI से कहा था, प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जाए, क्योंकि वहां से महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया था, जब बच्ची जिंदगी और मौत से जूझ रही थी, तब हॉस्टल की संचालिका नीलू अग्रवाल ने पैसे का ऑफर दिया था। मामी के मुताबिक, मौके पर मौजूद एक महिला सिपाही ने नील अग्रवाल को थप्पड़ भी मारा था। छात्रा मामी ने CBI को बताया, ‘जब उनकी भांजी की सांसे चल रही थी, उसी दौरान हॉस्टल संचालिका हॉस्पिटल नीलू अग्रवाल प्रभात मेमोरियल अस्पताल आई थी। उसने छात्रा की मां के सिर पर हाथ फेरा। सिर को सहलाते हुए कहा- ‘आपकी बेटी को तो हम बचा नहीं पाए, जो पैसा लेना है ले लीजिए।’ जांच टीम के सामने उन्होंने सवाल उठाया था, ‘जब हमारी भांजी की सांसे उस वक्त चल रही थी तो ऐसी बातें क्यों की? रुपए का ऑफर परिवार को क्यों दिया? ये बातें पटना पुलिस की SIT को भी बताई गई थी, लेकिन SIT ने नीलम अग्रवाल से पूछताछ नहीं की। उसी दौरान वहां मौजूद एक महिला सिपाही ने नीलू को थप्पड़ भी मारा था। ये सब हॉस्पिटल के कैमरे में कैद हुआ है। इसलिए वहां के फुटेज की जांच होनी चाहिए।’ नीट छात्रा रेप-मौत मामले में CBI की जांच जारी है। CBI की टीम सोमवार को शम्भू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची। करीब 2 घंटे तक वहां रही। छात्रा जिस कमरे में रहती थी, फिर से उसकी जांच की। मौके पर हॉस्टल का गार्ड अमरेंद्र भी मौजूद था। ये वही गार्ड है, जो CCTV फुटेज में छात्रा के कमरे के बंद गेट को खोलता दिखा था। फिर अपनी गोद में उठाकर उसे पास के डॉ. शहजानंद के हॉस्पिटल पहुंचाया था। सूत्रों के अनुसार, टीम ने हॉस्टल के अंदर इस पूरे सीन को रीक्रिएट किया। उसे किसने कॉल कर वहां बुलाया? फिर वो सूचना मिलने के कितनी देर बाद वहां पहुंचा? इसके बाद उसने क्या किया? पहले इन सवालों को पूछा। इसके बाद छात्रा के कमरे के बंद गेट को उसने कैसे खोला? अंदर क्या देखा? फिर वो किस तरह से अपनी गोद में उठाकर छात्रा को भागा? इसका सीन रीक्रिएट किया। नीट छात्रा की माैत के मामले में सीबीआई काे अब तक काेई ठाेस सुराग नहीं मिला है। केंद्रीय जांच एजेंसी की सबसे बड़ी चुनाैती छात्रा के कपड़े से मिले स्पर्म के डीएनए का उस आरोपी के डीएनए के सैंपल से मिलान करना है, जिसने उसके साथ घिनाैनी हरकत की है। सूत्राें के अनुसार, जांच एजेंसी इस मामले में सच उगलवाने के लिए करीब 10 लाेगाें का पॉलीग्राफ टेस्ट करा सकती है। इसकाे लाय डिटेक्टर टेस्ट भी कहा जाता है। किसी भी व्यक्ति का यह टेस्ट कराने के लिए काेर्ट और आरोपी की सहमति जरूरी है। नीलम अग्रवाल और दोनों वार्डेन से हुई पूछताछ जिस वक्त हॉस्टल में जांच करने CBI की टीम पहुंची, उसी समय हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल और नीतू समेत दोनों महिला वार्डेन को वहां बुलाया गया। पूरी पड़ताल के दौरान ये तीनों हॉस्टल के अंदर ही थीं। देखें हॉस्टल के पास की तस्वीरें… सूत्रों के अनुसार, इन तीनों से अंदर में टीम ने एक-एक कर कई सवाल पूछे। तीनों के बयानों को टीम ने मिलाने की भी कोशिश की है। छात्रा की मां और मामी ने शुरुआती जांच के दौरान केंद्रीय एजेंसी की टीम को बताया था कि हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल ने उन्हें रुपए का ऑफर दिया था। कहा था कि ‘आपकी बेटी को बचा नहीं पाएं, आपको जितने रुपए लेना है, ले लीजिए।’ जांच टीम में शामिल अधिकारी ने संचालिका से इस बारे में भी सवाल पूछा कि आपने छात्रा की मां को रुपए का ऑफर क्यों दिया था? जरूरत पड़ने पर फिर इंटेरोगेट कर सकती CBI छात्रा 5 जनवरी को अपने घर से वापस हॉस्टल आई, तो उसकी हालत क्या थी? हॉस्टल में बाकी छात्राओं के साथ वो किस तरह से बात कर रही थी? क्या उसके व्यवहार में उस दिन कोई बदलाव दिखा था? रात में वो कब अपने कमरे में गई थी? इस तरह के कई सवाल हॉस्टल की वार्डेन से पूछे गए हैं। सूत्रों की मानें तो संचालिका और दोनों वार्डेन से टीम ने स्पष्ट कर दिया है कि जरूरत पड़ने पर आप सभी से दोबारा पूछताछ हो सकती है। दरअसल, केस का खुलासा करने के लिए CBI साइंटिफिक, टेक्निकल और फिजिकल तरीके से सबूत जुटाने में लगी है। गयाजी में छात्रा की मामी से कई सवाल किए थे इसके पहले गुरुवार को गयाजी में छात्रा की मामी से CBI ने पूछताछ की थी। इस दौरान मामी ने जांच एजेंसी को कई अहम जानकारियां दी थीं। मामी ने CBI से कहा था, प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जाए, क्योंकि वहां से महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया था, जब बच्ची जिंदगी और मौत से जूझ रही थी, तब हॉस्टल की संचालिका नीलू अग्रवाल ने पैसे का ऑफर दिया था। मामी के मुताबिक, मौके पर मौजूद एक महिला सिपाही ने नील अग्रवाल को थप्पड़ भी मारा था। छात्रा मामी ने CBI को बताया, ‘जब उनकी भांजी की सांसे चल रही थी, उसी दौरान हॉस्टल संचालिका हॉस्पिटल नीलू अग्रवाल प्रभात मेमोरियल अस्पताल आई थी। उसने छात्रा की मां के सिर पर हाथ फेरा। सिर को सहलाते हुए कहा- ‘आपकी बेटी को तो हम बचा नहीं पाए, जो पैसा लेना है ले लीजिए।’ जांच टीम के सामने उन्होंने सवाल उठाया था, ‘जब हमारी भांजी की सांसे उस वक्त चल रही थी तो ऐसी बातें क्यों की? रुपए का ऑफर परिवार को क्यों दिया? ये बातें पटना पुलिस की SIT को भी बताई गई थी, लेकिन SIT ने नीलम अग्रवाल से पूछताछ नहीं की। उसी दौरान वहां मौजूद एक महिला सिपाही ने नीलू को थप्पड़ भी मारा था। ये सब हॉस्पिटल के कैमरे में कैद हुआ है। इसलिए वहां के फुटेज की जांच होनी चाहिए।’


