गर्मियां आते ही लोग एयर कंडीशनर चलाना शुरू कर देते हैं। इससे गर्मी से राहत तो मिलती है, लेकिन बिजली का बिल भी तेजी से बढ़ता है। हालांकि, अगर एसी यूज करने के तरीकों में कुछ छोटे-छोटे बदलाव किए जाएं, तो बिजली बिल को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। ‘ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशियंसी’ की एक स्टडी के मुताबिक, एसी का तापमान 1°C बढ़ाने से करीब 6% तक बिजली की बचत हो सकती है। ऐसे में आज जरूरत की खबर में एसी यूज करने के स्मार्ट तरीकों की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- शशिकांत उपाध्याय, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर, अहमदाबाद सवाल- गर्मियों में एसी चलाने पर बिजली का बिल ज्यादा क्यों आता है? जवाब- गर्मियों में तापमान ज्यादा होता है। इसलिए कमरे को ठंडा करने के लिए एसी को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। उस पर ज्यादा दबाव पड़ता है। एसी का कंप्रेसर लंबे समय तक लगातार चलता है, जिससे बिजली की खपत बढ़ जाती है। इसके और भी कई कारण हैं- इन कारणों से एसी की ठंडक जल्दी खत्म होती है और एसी को ज्यादा देर तक चलाना पड़ता है। सवाल- क्या बिजली का बिल एसी चलाने के तरीके पर निर्भर करता है? जवाब- हां, बिजली का बिल काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि एसी का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि हमेशा, हर स्थिति में एसी का बिल एक जैसा ही आता है। अगर किसी को एसी इस्तेमाल का सही तरीका न पता हो या वो लापरवाही या गलती करे तो इससे बिजली का बिल बढ़ जाता है। वहीं सिर्फ थोड़ी सावधानियां बरतकर बिजली बिल को 40 से 50% तक कम किया जा सकता है। सवाल- एसी चलाते हुए लोग क्या गलतियां करते हैं, जिससे बिजली का बिल ज्यादा आता है? जवाब- गर्मियों में एसी राहत तो देता है, लेकिन कई बार छोटी-छोटी गलतियां बिजली का बिल बढ़ा सकती हैं। ग्राफिक में वो गलतियां देखिए, जो बेवजह बिल बढ़ाती हैं- सवाल- एसी कैसे चलाएं कि बिजली का बिल कम आए? जवाब- कुछ आसान आदतें अपनाकर आप अपने बिल को कंट्रोल में रख सकते हैं। ग्राफिक में बिजली का बिल कम करने वाली आदतें देखिए- ग्राफिक को थोड़ा विस्तार से समझते हैं- टेम्परेचर 24 से 26 पर सेट करें एसी को बहुत कम तापमान (16–18°C) पर चलाने से कंप्रेसर पर ज्यादा लोड पड़ता है और बिजली ज्यादा खर्च होती है। 24–26°C पर सेट करने से शरीर को पर्याप्त ठंडक मिलती है और एसी पर ज्यादा लोड नहीं पड़ता है। टाइमर और स्लीप मोड यूज करें टाइमर और स्लीप मोड एसी को ऑटोमैटिक तरीके से बंद या टेम्परेचर को एडजस्ट करने में मदद करते हैं। इससे अनावश्यक बिजली खर्च नहीं होती है। कमरा अच्छी तरह सील करें अगर कमरे से ठंडी हवा बाहर जा रही है या गर्म हवा अंदर आ रही है, तो एसी पर ज्यादा प्रेशर पड़ता है। इसलिए दरवाजे-खिड़कियां बंद रखें और गैप को सील करें। इससे कूलिंग लंबे समय तक बनी रहती है। एसी के साथ पंखा भी चलाएं पंखा चलाने से ठंडी हवा पूरे कमरे में फैलती है। इससे एसी को बार-बार कंप्रेसर ऑन नहीं करना पड़ता और कूलिंग जल्दी होती है। एसी को डायरेक्ट धूप से बचाएं अगर एसी की आउटडोर यूनिट पर सीधे धूप पड़ती है, तो वह ज्यादा गर्म हो जाती है। इससे उसकी कूलिंग एफिशिएंसी घटती है। इसे छाया में रखें या शेड लगाएं। इससे एसी कम ऊर्जा में बेहतर काम करता है। हाई स्टार रेटिंग वाला एसी चुनें 5-स्टार या हाई एनर्जी रेटिंग वाले एसी कम बिजली में ज्यादा कूलिंग देते हैं। ये थोड़े महंगे होते हैं, लेकिन बिजली का बिल कम कर देते हैं। इन्वर्टर एसी का इस्तेमाल करें इन्वर्टर एसी कंप्रेसर की स्पीड को जरूरत के हिसाब से एडजस्ट करता है, जिससे वह बार-बार ऑन-ऑफ नहीं होता। इससे बिजली की खपत कम होती है और कूलिंग भी स्मूद रहती है। सही टन (कैपेसिटी) का एसी चुनें कमरे के साइज के हिसाब से सही टन का एसी चुनना जरूरी है। सही कैपेसिटी वाला एसी संतुलित कूलिंग देता है और बिजली का बिल कम करता है। इको मोड का इस्तेमाल करें इको मोड एसी की पावर खपत को ऑटोमैटिक तरीके से कंट्रोल करता है। यह जरूरत के हिसाब से कूलिंग एडजस्ट करता है, जिससे बिजली कम खर्च होती है। मौसम ठंडा हो तो एसी न चलाएं जब मौसम पहले से ठंडा या सुहावना हो, तो एसी चलाने की जरूरत नहीं होती। ऐसे में पंखा या नेचुरल वेंटिलेशन बेहतर विकल्प है। हर हफ्ते फिल्टर की सफाई करें गंदे फिल्टर हवा के फ्लो को रोकते हैं, जिससे एसी पर ज्यादा प्रेशर पड़ता है। इस कारण कूलिंग कम होती है और बिजली ज्यादा खर्च होती है। इसलिए महीने में एक बार फिल्टर जरूर साफ करें। साल में दो बार सर्विसिंग कराएं रेगुलर सर्विसिंग से एसी के सभी पार्ट्स मेंटेन रहते हैं। गैस लेवल, कंप्रेसर और कॉइल की जांच से उसकी एफिशिएंसी बनी रहती है। सवाल- बिजली बचाने के लिए सही कैपेसिटी के एसी का इस्तेमाल बहुत जरूरी है। कमरे के साइज के हिसाब से कितने टन का एसी लगावाना चाहिए? जवाब- एसी की सही कैपेसिटी सिर्फ कमरे के साइज पर नहीं, बल्कि उसकी कंडीशन पर भी निर्भर करती है। तेज धूप, टॉप फ्लोर, ज्यादा लोग होने से कूलिंग लोड बढ़ता है। इसलिए ज्यादा टन की एसी लेना बेहतर होता है। ग्राफिक में देखें, किस कमरे के लिए कितने टन का एसी सही है- सवाल- एसी के मेंटेनेंस का सही तरीका क्या है? जवाब- एसी की अच्छी परफॉर्मेंस के लिए सिर्फ सर्विसिंग ही नहीं, रोजमर्रा की देखभाल भी जरूरी है। पॉइंटर्स से समझते हैं- सवाल- कितने दिनों में एसी की सर्विसिंग करवानी चाहिए? जवाब- एसी की सर्विसिंग साल में कम-से-कम 2 बार करानी चाहिए। एक बार गर्मियों की शुरुआत में और एक बार सीजन खत्म होने के बाद। इससे कूलिंग और एफिशिएंसी बनी रहती है। सवाल- एसी चलाने का ‘3 मिनट रूल’ क्या है, जिसे फॉलो करने से बिजली की बचत होती है? जवाब- एसी बंद करने के बाद उसे दोबारा चालू करने के बीच कम-से-कम 3 मिनट का गैप होना चाहिए। इसे ही ‘3 मिनट रूल’ कहते हैं। अगर एसी को तुरंत फिर से ऑन कर देते हैं तो उसका कंप्रेसर ज्यादा दबाव में काम करता है। 3 मिनट रूल फॉलो करने से एसी स्मूद तरीके से चलता है और करीब 20–30% तक बिजली की बचत हो सकती है। ………………………… ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- बारिश में AC से आती है बदबू:सीलन, फंगस समेत हो सकते हैं ये 7 रिस्क, मानसून में बरतें 6 जरूरी सावधानियां भारत उन गिने-चुने देशों में है, जहां सभी ऋतुएं होती हैं। इनमें मानसून बेहद सुकून देने वाला मौसम है। इस मौसम में भी कुछ लोग AC (एयर कंडीशनर) का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसकी देखभाल और बदली हुई जरूरतों को नजरअंदाज कर देते हैं। नतीजतन सीलन, फंगस, बदबू, बिजली बिल में इजाफा और कई बार AC में खराबी तक आ जाती है। पूरी खबर पढ़ें..
जरूरत की खबर– गर्मियों में ज्यादा नहीं आएगा बिजली बिल:एसी चलाते हुए न करें ये 19 गलतियां, बिजली बचाने के 12 स्मार्ट टिप्स


