48 किलो डोडा-पोस्त तस्करी में 10 साल की जेल:पुलिस को देख कट्टे फेंककर भागा था तस्कर; 12 साल बाद एनडीपीएस कोर्ट का फैसला

48 किलो डोडा-पोस्त तस्करी में 10 साल की जेल:पुलिस को देख कट्टे फेंककर भागा था तस्कर; 12 साल बाद एनडीपीएस कोर्ट का फैसला

जोधपुर की विशेष एनडीपीएस कोर्ट के विशिष्ट न्यायाधीश मधुसूदन मिश्रा ने मादक पदार्थ तस्करी के 12 साल पुराने मामले में आरोपी भागीरथराम को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अभियुक्त पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। विशिष्ट न्यायाधीश ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अवैध मादक पदार्थों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और यह युवाओं का भविष्य बर्बाद करने वाला गंभीर अपराध है, जिसका समाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। बीट कॉन्स्टेबल की सजगता से पकड़ में आया तस्कर यह मामला 16 जनवरी 2014 का है, जब झंवर पुलिस थाना के तत्कालीन थानाधिकारी नरपतसिंह भाटी टीम के साथ गश्त पर थे। पुलिस टीम जब धवा से लुणावास जाटान रोड पर धतरवालों की ढाणी जाने वाले रास्ते पर पहुंची, तो वहां भागीरथराम की ढाणी के बाहर एक व्यक्ति दो भरे हुए कट्टे लेकर खड़ा दिखाई दिया। पुलिस को देखकर वह व्यक्ति घबरा गया और दोनों कट्टे लेकर भागने लगा। पुलिस द्वारा पीछा किए जाने पर वह व्यक्ति पकड़े जाने के डर से दोनों कट्टे रास्ते में ही फेंककर भागने में सफल रहा। हालांकि, पुलिस टीम में शामिल बीट कॉन्स्टेबल रामपाल ने भागने वाले व्यक्ति को करीब से देखा और उसकी पहचान भागीरथराम पुत्र पप्पाराम विश्नोई, निवासी धवा के रूप में की। पुलिस ने मौके पर छोड़े गए कट्टों की तलाशी ली, तो उनमें कुल 48 किलोग्राम अवैध डोडा पोस्त का चूरा बरामद हुआ। पुलिस ने अगले ही दिन आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और उसके खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया। 12 गवाह, 27 साक्ष्यों के साथ पुख्ता पैरवी काम आई मामले की सुनवाई के दौरान विशिष्ट लोक अभियोजक गोविन्द जोशी ने सरकार की ओर से पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने आरोपी के दोष को सिद्ध करने के लिए कोर्ट के समक्ष कुल 12 गवाहों के बयान दर्ज करवाए। इसके अतिरिक्त, 27 महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य और 6 आर्टिकल (प्रदर्श) भी साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत किए गए। लोक अभियोजक जोशी ने बहस के दौरान विशेष जोर देते हुए कहा कि नशे का कारोबार एक सामाजिक बुराई है जो युवा पीढ़ी को खोखला कर रही है। उन्होंने न्यायालय से अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को किसी भी प्रकार की राहत न देते हुए कठोरतम सजा देने की मांग की। दूसरी तरफ, बचाव पक्ष के वकील ने अभियुक्त की पारिवारिक स्थिति का हवाला देते हुए सजा में नरमी बरतने का आग्रह किया था, जिसे कोर्ट ने साक्ष्यों को देखते हुए अस्वीकार कर दिया। कोर्ट का नरमी बरतने से इनकार, सजा के साथ जुर्माना भी विशिष्ट न्यायालय एनडीपीएस जोधपुर ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत गवाहों और दस्तावेजी प्रमाणों को विश्वसनीय माना और अभियुक्त को अवैध मादक पदार्थ रखने का दोषी पाया। कोर्ट ने अपने फैसले में कानून के शासन को सर्वोपरि रखते हुए सजा का ऐलान किया। इसके तहत – कठोर कारावास: दोषी भागीरथराम को एनडीपीएस एक्ट के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। भारी जुर्माना: कोर्ट ने दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना राशि जमा न करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सख्त संदेश: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नशा तस्करी समाज के विरुद्ध अपराध है और ऐसे मामलों में नरमी बरतने से अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं। साक्ष्यों की स्वीकार्यता: बीट कॉन्स्टेबल द्वारा की गई पहचान और मौके से हुई बरामदगी को न्यायालय ने अभियुक्त के विरुद्ध ठोस आधार माना।

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