छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य तेलंगाना में PLGA बटालियन नंबर एक के कमांडर देवा बारसे के आत्मसमर्पण कर दिया है। देवा अपने 20 से ज्यादा साथियों के साथ तेलंगाना के मुलुगु जिला पहुंचा। जहां उसने पुलिस के सामने हथियार डाल दिए हैं। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक रूप से पुष्टि होना बाकी है। बस्तर के IG सुंदरराज पी का कहना है कि, यह पड़ोसी राज्य का मामला है। वहां की पुलिस से हम कॉर्डिनेट कर रहे हैं। फिलहाल बस्तर पुलिस के पास देवा के आत्मसमर्पण की अभी जानकारी नहीं आई है। दरअसल, 18 नवंबर को नक्सलियों के सेंट्रल कमेटी मेंबर माड़वी हिड़मा का आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सितारामा राजू जिले में एनकाउंटर हो गया था। हिड़मा के एनकाउंटर के बाद बस्तर में नक्सल संगठन टूट गया है। क्योंकि हिड़मा ही एक ऐसी कड़ी था जो माओवाद संगठन और बस्तर को जोड़े रखा था। हिड़मा और बारसे देवा दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे हिड़मा पूवर्ती गांव का रहने वाला था। वहीं बारसे देवा भी सुकमा जिले के पूवर्ती गांव का रहने वाला है। करीब 2 साल पहले जब हिड़मा को सेंट्रल कमेटी में शामिल किया गया तो उसने ही बारसे देवा को PLGA बटालियन नंबर 1 का कमांडर बनाया था। देवा के साथ बड़ी संख्या में नक्सली थे। लेकिन अब पुलिस के बढ़ते दबाव और लगातार हो रहे एनकाउंटर के बाद से बटालियन भी लगभग टूट गई है। 3 जिलों में बटालियन का ज्यादा प्रभाव नक्सलियों की बटालियन नंबर 1 को नक्सल संगठन की सबसे खतरनाक टीम माना जाता है। दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा इन 3 जिलों में बटालियन का ज्यादा प्रभाव रहा है। हालांकि, अब फोर्स ने इस टीम को काफी बैकफुट कर दिया है। इस टीम में AK-47, इंसास, SLR, स्नाइपर गन जैसे हथियारों से लैस सैकड़ों नक्सली थे। टेकलगुडेम, बुरकापाल, मिनपा, ताड़मेटला, टहकवाड़ा में नक्सलियों की इसी टीम ने बड़े हमले किए थे। जिसमें सैकड़ों जवानों की शहादत हुई है। हालांकि, अब ये टीम भी कमजोर हो गई है। अब देवा सरेंडर करना चाह रहा है। जानकारी ये भी है कि किसी माध्यम से उसने अपना संदेश बाहर भी भिजवाया है। देवा सरेंडर करता है तो उसकी बटालियन टूट जाएगी। इसका नेतृत्व करने वाला कोई नक्सली नहीं रहेगा। गृह मंत्री ने मां से की थी मुलाकात दरअसल, छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा कुछ दिन पहले पूवर्ती गांव गए थे। वहां उन्होंने देवा और हिड़मा इन दोनों की मां से मुलाकात की थी। इनके माध्यम से उनसे सरेंडर करने की अपील की थी। वहीं हिड़मा नहीं माना और आंध्र प्रदेश के जंगल में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में पत्नी राजे समेत 6 साथियों के साथ मारा गया। जिसके बाद अब देवा बारसे छत्तीसगढ़ में सरेंडर करने की कोशिश कर रहा है। 15 में से 7 एरिया कमेटी बची, डिवीजन भी खत्म बस्तर IG सुंदरराज पी के मुताबिक बस्तर में नक्सलियों की कुल 7 डिवीजन और 15 एरिया कमेटी सक्रिय थी। माड़ डिवीजन, केशकाल और दरभा डिवीजन में नक्सली लगभग खत्म हो गए हैं। पश्चिम बस्तर डिवीजन में कुछ नक्सली हैं। लेकिन अब 7 एरिया कमेटी में कुछ छिटपुट नक्सली ही बचे हैं। दंडकारण्य इलाके में महज 120 से 150 सशस्त्र नक्सली ही सक्रिय हैं। ये नक्सली खत्म हुए तो नक्सलवाद लगभग खत्म हो जाएगा। ……………….. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… बस्तर में नक्सल संगठन का नेतृत्व लगभग खत्म: देवा-पापाराव समेत कुछ ही लीडर बचे; डेढ़ साल में 13 से ज्यादा टॉप नक्सलियों का एनकाउंटर छत्तीसगढ़ का बस्तर पिछले 40 सालों से नक्सलियों के आतंक का गढ़ रहा है। हिड़मा, बसवाराजू जैसे टॉप लीडर्स के मारे जाने के बाद बस्तर से नक्सलवाद अब खत्म होने की कगार पर है। पिछले डेढ़ सालों में जवानों ने करीब 13 से ज्यादा टॉप लीडर्स का एनकाउंटर किया है। पढ़ें पूरी खबर…


