अरवल में अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन के आह्वान पर देशव्यापी ‘चक्का जाम’ आंदोलन किया गया। यह प्रदर्शन केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए श्रम संहिताओं के विरोध में था, जिन्हें मजदूरों को गुलाम बनाने और कॉर्पोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने वाला बताया जा रहा है। संयुक्त वाम दल के तत्वावधान में खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के जिला सचिव उपेंद्र पासवान की अध्यक्षता में भी विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि संविधान में मजदूरों के अधिकारों के लिए मौजूद 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर मोदी सरकार ने चार नए लेबर कोड लागू किए हैं। वक्ताओं ने कहा कि इन कानूनों के तहत मजदूरों से 8 घंटे के बजाय 12 घंटे काम लिया जाएगा। इसके साथ ही, फैक्ट्रियों में ट्रेड यूनियन बनाने का अधिकार भी खत्म कर दिया गया है। उन्होंने याद दिलाया कि मजदूरों ने संघर्ष कर पूरी दुनिया में 8 घंटे काम का कानून बनवाया था, लेकिन वर्तमान सरकार इसे कमजोर कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने देश में बढ़ती महंगाई पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि कमरतोड़ महंगाई के बावजूद मजदूरों को समय पर और पर्याप्त मजदूरी नहीं मिल रही है, जिससे उन्हें अपना जीवन यापन और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में कठिनाई हो रही है। मनरेगा कानून में बदलावों को लेकर भी विरोध दर्ज कराया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मनरेगा, जिसके तहत 12 करोड़ लोगों को काम मिलता था और काम न मिलने पर भत्ता दिया जाता था, उसे कमजोर कर मजदूरों को गुलाम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस अवसर पर राम दिनेश उर्फ त्यागी, उमेश ठाकुर, पंकज कुमार, विजय यादव, रामचंद्र पाठक, अरुण कुमार, मोइन अंसारी, रविंद्र यादव, सुऐब आलम और जितेंद्र यादव सहित कई नेताओं ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने सरकार से इन श्रम विरोधी कानूनों को वापस लेने की मांग की। अरवल में अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन के आह्वान पर देशव्यापी ‘चक्का जाम’ आंदोलन किया गया। यह प्रदर्शन केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए श्रम संहिताओं के विरोध में था, जिन्हें मजदूरों को गुलाम बनाने और कॉर्पोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने वाला बताया जा रहा है। संयुक्त वाम दल के तत्वावधान में खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के जिला सचिव उपेंद्र पासवान की अध्यक्षता में भी विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि संविधान में मजदूरों के अधिकारों के लिए मौजूद 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर मोदी सरकार ने चार नए लेबर कोड लागू किए हैं। वक्ताओं ने कहा कि इन कानूनों के तहत मजदूरों से 8 घंटे के बजाय 12 घंटे काम लिया जाएगा। इसके साथ ही, फैक्ट्रियों में ट्रेड यूनियन बनाने का अधिकार भी खत्म कर दिया गया है। उन्होंने याद दिलाया कि मजदूरों ने संघर्ष कर पूरी दुनिया में 8 घंटे काम का कानून बनवाया था, लेकिन वर्तमान सरकार इसे कमजोर कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने देश में बढ़ती महंगाई पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि कमरतोड़ महंगाई के बावजूद मजदूरों को समय पर और पर्याप्त मजदूरी नहीं मिल रही है, जिससे उन्हें अपना जीवन यापन और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में कठिनाई हो रही है। मनरेगा कानून में बदलावों को लेकर भी विरोध दर्ज कराया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मनरेगा, जिसके तहत 12 करोड़ लोगों को काम मिलता था और काम न मिलने पर भत्ता दिया जाता था, उसे कमजोर कर मजदूरों को गुलाम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस अवसर पर राम दिनेश उर्फ त्यागी, उमेश ठाकुर, पंकज कुमार, विजय यादव, रामचंद्र पाठक, अरुण कुमार, मोइन अंसारी, रविंद्र यादव, सुऐब आलम और जितेंद्र यादव सहित कई नेताओं ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने सरकार से इन श्रम विरोधी कानूनों को वापस लेने की मांग की।


