लखनऊ विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग (अटल सुशासन पीठ) में सोमवार को एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।जिसका विषय ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एवं सुशासन के नए आयाम रहा । इसमें विशेषज्ञों ने आगाह किया कि AI को केवल एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए और उसे मानवीय चेतना पर हावी नहीं होने देना चाहिए। मुख्य अतिथि महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि मानव सभ्यता और तकनीक का संबंध सदियों पुराना है। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर AI के कई मॉडल प्रचलित हैं, लेकिन भारत ‘ह्यूमन-सेंट्रिक AI’ (मानव केंद्रित तकनीक) पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसका उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना है जो समाज के नैतिक मूल्यों और जमीनी जरूरतों के अनुरूप हो। AI की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई संगोष्ठी में भारत की बुनियादी समस्याओं जैसे स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कृषि के समाधान में AI की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने AI को इन क्षेत्रों में ‘गेमचेंजर’ बताया।IIPA दिल्ली की प्रो. चारु मल्होत्रा ने जोर दिया कि तकनीक का भविष्य उसकी संवेदनशीलता में निहित है। उन्होंने कहा कि AI को डेटा के साथ-साथ मानवीय भावनाओं को समझने में भी सक्षम होना चाहिए। पूर्व कुलपति प्रो. मनुका खन्ना ने चेतावनी दी कि AI को एक स्वायत्त मशीन नहीं बनने देना चाहिए, बल्कि इसे हमेशा सही और गलत के मानवीय मापदंडों पर परखा जाना चाहिए।प्रमुख सचिव (IAS) अनुराग यादव ने बताया कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने में AI एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 40 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. जय प्रकाश सैनी ने शोधार्थियों से आह्वान किया कि सुशासन तभी संभव है जब AI के नकारात्मक पहलुओं से बचा जाए और इसमें मानवीय संवेदनाओं को जोड़ा जाए। विभागाध्यक्ष प्रो. नंदलाल भारती के नेतृत्व में आयोजित इस संगोष्ठी में तीन तकनीकी सत्र हुए, जिनमें डॉ. अभिनव शर्मा और डॉ. प्रीति चौधरी जैसे विशेषज्ञों की उपस्थिति में 40 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो. उत्कर्ष मिश्र ने किया।


